ज़ालिम बेटे पर नज़र रखेगा सीसीटीवी

Image caption सीसीटीवी कैमरे का खर्च भी अरुण धारीवाल को ही उठाना होगा.

बेटा बुढ़ापे में मां के सहारे की लाठी होता है, लेकिन राजस्थान में कथित रूप से अपनी मां पर सितम ढहा रहे बेटे के सलूक पर नजर रखने के लिए अदालत ने घर में सीसीटीवी कैमरे लगाने का आदेश दिया है.

राजस्थान हाई कोर्ट के न्यायाधीश संदीप मेहता ने विमला धारीवाल की गुहार सुनी और उनके बेटे अरुण धारीवाल आदेश दिया कि वे अपनी मां को हर महीने आठ हजार रुपए दें.

अदालत के इस फैसले से विमला ने राहत की सांस ली है.

अपने बेटे द्वारा सताई गई विमला की फरियाद अदालत ने सुनी और पुलिस को आदेश दिया कि वो उनके बेटे अरुण के घर में उनके साथ हो रहे बर्ताव का ब्यौरा रखने के लिए कमरों में कैमरे लगवाए.

पुलिस को आदेश दिया गया है कि वो पंद्रह दिन तक विमला के साथ हुए सलूक को सीसीटीवी के ज़रिए जांचे और पुख्ता करे कि उनका बेटा उनके साथ बुरा बर्ताव कर रहा है या नहीं.

ज़ुल्म

इसके साथ ही अदालत ने अरुण को ये भी फरमान सुनाया कि इन आधुनिक कैमरे लगवाने का खर्च भी उन्हें ही उठाना होगा.

विमला धारीवाल के वकील नदीश सिंघवी ने बीबीसी को बताया कि अदालत के इस निर्णय से विमला ने बड़ी राहत महसूस की है.

विमला के वकील ने अदालत को बताया कि उनका बेटा एक अच्छे कारोबार का संचालन करता है, लेकिन मां की मदद करना तो दूर बल्कि उनके साथ मारपीट करता है और उन्हें घर से बेदखल करने की धमकी भी दे चुका है.

पीड़िता ने अदालत को बताया कि जैसे ही अरुण के सिर से पिता का साया उठा, वो अपनी मर्जी का मालिक हो गया.

विमला ने अपने बेटे को ममता का वास्ता दिया और खुद की उम्र का हवाला भी दिया, मगर बेटे का दिल नहीं पसीजा.

विमला के वकील ने अदालत में एक फरियाद कर एक मां के दर्द को बयान किया और कहा कि मुसीबत में हर मां अपने बेटे की और देखती है, मगर इस बेटे ने जब अपनी मां पर हाथ उठाया तो उन्हें पुलिस बुलानी पड़ी.

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