'निर्भया' के मित्र का इंटरव्यू सबूत नहीं: सुप्रीम कोर्ट

विरोध प्रदर्शन (फ़ाइल फोटो)
Image caption दिल्ली गैंगरेप के ख़िलाफ़ प्रदर्शन हुए थे

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि दिसंबर में हुए दिल्ली गैंगरेप के मामले में पीड़िता (निर्भया) के मित्र का टेलीविज़न इंटरव्यू सबूत के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता.

मुख्य न्यायाधीश अल्तमस कबीर की अगुआई वाली खंडपीठ ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले को ख़ारिज कर दिया, जिसमें पीड़िता के दोस्त के टीवी इंटरव्यू को सबूत माना गया था.

खंडपीठ ने कहा कि टीवी इंटरव्यू अभियुक्तों के ख़िलाफ़ चार्जशीट दाखिल किए जाने के बाद दिया गया, इसलिए क़ानून के तहत इसे सबूत के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता.

दिल्ली सरकार ने सात मार्च को दिए दिल्ली हाई कोर्ट के फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी.

आदेश

दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले में अभियुक्त रहे राम सिंह और मुकेश की याचिका को स्वीकार करते हुए निचली अदालत के आठ फरवरी के आदेश को ख़ारिज़ कर दिया था.

निचले कोर्ट के आदेश के तहत चार जनवरी को प्रसारित इंटरव्यू की सीडी को सबूत के रूप में प्रदर्शित करने की अनुमति नहीं दी गई थी.

11 मार्च को राम सिंह की तिहाड़ जेल में मौत हो गई थी. 22 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी.

पिछले साल 16 दिसंबर को चलती बस में एक लड़की के साथ सामूहिक बलात्कार हुआ था. सिंगापुर में इलाज के दौरान 29 दिसंबर को लड़की की मौत हो गई थी.

राम सिंह की मौत के बाद इस मामले में अन्य चार लोगों मुकेश, विनय शर्मा, अक्षय सिंह और पवन गुप्ता अभियुक्त हैं और उनके ख़िलाफ़ बलात्कार और हत्या का मामला चल रहा है.

एक अन्य अभियुक्त नाबालिग है और जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में उनके ख़िलाफ़ अदालती कार्यवाही चल रही है.

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