कर्नाटक चुनाव: नुक्कड़ नाटक बनाम सोशल मीडिया

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Image caption चुनाव आयोग ने मतदान केंद्रों पर नजर रखने की तैयारी कर रखी है.

चुनाव आयोग ने कर्नाटक के लगभग एक हज़ार से भी ज्यादा मतदान केंद्रों की गतिविधियों को 'वेब-कास्टिंग' के ज़रिये देखते रहने की योजना बनाई है.

इन सभी मतदान केंद्रों पर जाने वाले मतदाताओं और वहां की गतिविधियों को रिकॉर्ड भी किया जाएगा.

राज्य चुनाव आयोग के अधिकारियों का कहना है कि पूरे राज्य में ऐसे 1100 मतदान केंद्र होंगे जहाँ कैमरे लगाए गए हैं.

इन कैमरों के ज़रिए जिले के कंट्रोल रूम में बैठे अधिकारी मतदान केंद्रों पर नज़र रख सकेंगे.

साथ ही राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी के कक्ष से भी मतदान केंद्रो पर नज़र रखी जाएगी.

यह पहला मौक़ा है जब कर्नाटक में चुनाव के दौरान इस तरह के इंतज़ाम किये गए हैं.

नुक्कड़ नाटक

फिलहाल प्रत्येक जिले में इस तरह के छह मतदान केंद्रों पर ही ये व्यवस्था की गई है.

इस बार चुनाव आयोग ने मतदाताओं के बीच जागरूकता अभियान चलाने के लिए बेंगलूर सहित प्रदेश के कई स्थानों पर नुक्कड़ नाटकों का आयोजन भी करवाया है.

आयोग के अधिकारियों का कहना है कि अमूमन चुनाव के दौरान देखा गया है कि शहरी मतदाता वोट देने के लिए अपने घरों से बाहर नहीं निकलते हैं.

कार्यक्रम के संचालन में लगे एक अधिकारी ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "उच्च मध्यम वर्ग के ज्यादातर लोग चुनाव के दिन छुट्टी मनाते हैं. वो घरों से निकलना नहीं चाहते हैं. वहीं आईटी क्षेत्र में काम करने वालों में भी इसी तरह की बात देखी गई है."

एक ओर जहाँ कर्नाटक विधान सभा के चुनाव में उम्मीदवारों ने सोशल मीडिया को प्रचार का बड़ा माध्यम बनाया है.

वहीं चुनाव आयोग ने जागरूकता अभियान चलाने के लिए पुराने तरीकों को अपनाने का मन बनाया.

फेसबुक और ट्विटर

Image caption चुनाव प्रचार में सोशल मीडिया का भी इस्तेमाल किया जा रहा है.

मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टर सहित राज्य के लगभग सभी प्रमुख उम्मीदवारों ने फेसबुक और ट्विटर पर अपना प्रचार अभियान पूरे जोशो-ख़रोश के साथ चला रखा है.

प्रियाकृष्ण जैसे युवा उम्मीदवार ने तो अपनी वेबसाइट तक बना रखी है और अपने चुनाव प्रचार में इसका इस्तेमाल भी किया है.

नुक्कड़ नाटकों के ज़रिये जागरूकता फैलाने के लिए चुनाव आयोग ने थियेटर से जुड़े राज्य स्तर के कलाकारों की मदद ली है.

गाँव मुहल्लों के अलावा नुक्कड़ नाटक मंडलियों नें आईटी क्षेत्र में काम करने वालों के बीच भी जमकर प्रचार किया.

कार्यक्रम से जुड़े जीएस मल्लाना ने बताया, "अभियान में लगे कलाकार मतदाताओं को ये भी बताने का प्रयास कर रहे हैं कि अगर उन्हें कोई उम्मीदवार पसंद नहीं भी है तो मतदान केंद्र में रखे रजिस्टर में वे इस बात का उल्लेख कर सकते हैं."

चुनाव आयोग के अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया अपनी जगह पर है लेकिन जागरूकता फैलाने का पुराना देसी नुस्खा भी कम प्रभावशाली नहीं है.

खास तौर पर युवा वर्ग में इन नुक्कड़ नाटकों के प्रति काफी दिलचस्पी देखी जा रही है.

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