सरकार के कहने पर सीबीआई ने बदली रिपोर्ट: सुप्रीम कोर्ट

मनमोहन सिंह
Image caption सुप्रीम कोर्ट ने खास प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के लिए दुविधा पैदा कर दी है क्यों की कानून मंत्री उनके नज़दीकी माने जाते हैं.

सीबीआई प्रमुख और भारत सरकार के तमाम तर्कों दावों को दरकिनार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार की सलाह पर रिपोर्ट का सार बदला गया.

सीबीआई ने बीते सोमवार को अदालत एक हलफ़नामा को सौंपा था. ख़बरों के अनुसार सीबीआई ने अदालत को बताया था कि अश्विनी कुमार ने स्क्रीनिंग कमेटी द्वारा बने गए कुछ चार्ट रिपोर्ट में से हटवाए थे साथ ही उन्होंने एक दो वाक्य सीबीआई की जांच के दायरे में बारे में बदलवाए थे.

समाचारों के अनुसार सीबीआई के हलफ़नामे में यह भी कहा गया था कि अश्विनी कुमार या सरकार से जुड़े अन्य लोगों में से किसी ने भी जांच रिपोर्ट में मूल मसौदे में कोई बदलाव नहीं किया.

'पिंजरे मे बंद तोता'

सीबीआई के कोलगेट घोटाला जांच पर दिए हलफ़नामे को पढ़ने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सरकार के सुझाव पर सीबीआई ने घोटाले की रिपोर्ट का सार बदला.

यूपीए सरकार की आफत बढ़ाते हुए सुपीर्म कोर्ट ने कोयला घोटाले की जांच करे पुराने अधिकारी रविकांत को वापस लाने के आदेश दिए हैं. रविकांत को कोयला घोटाले की जांच के दौरान सरकार ने सीबीआई से हटा कर दूसरे विभाग में भेज दिया था.

Image caption आम आदमी पार्टी के नेता और सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण इस मुक़दमे में सरकार के खिलाफ लड़ रहे थे.

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को यह भी कहा है कि वो सीबीआई की स्वतंत्रता को सुनिश्चित करे वरना अदालत खुद इस मसले को हाथ में लेने पर मजबूर होगी. गुस्साई अदालत ने सीबीआई को 'पिंजरे मे बंद तोता' तक कह डाला.

जस्टिस आरएम लोधा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय बेंच ने सीबीआई द्वारा कोलगेट घोटाले की रिपोर्ट को सरकार के साथ साझा किए जाने पर सख्त गुस्सा दिखाया है. आम आदमी पार्टी के नेता और सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण इस मुक़दमे में सरकार के खिलाफ लड़ रहे थे. भूषण ने बताया की इस मुक़दमे में अगली सुनवाई जुलाई 10 को होगी.

अदालत खफ़ा

अदालत ने यह भी कहा है कि सीबीआई का काम सरकारी अधिकारीयों से मेल मिलाप करना नहीं बल्कि उनसे पूछताछ करके सच्चाई का पता लगाना है.

अदालत ने यह निर्देश भी दिया है कि अगर सरकार या उसके किसी अधिकारी को सीबीआई के इस घोटाले के सिलसिले में कोई मुलाक़ात करना है तो उसे अदालत की अनुमति लेना होगा.

केन्द्रीय जांच आयोग या सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट की डांट के बाद नौ पन्नों का हलफ़नामा दिया था. इस हलफ़नामे में सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट को कोयला खदान आवंटन घोटाले की रिपोर्ट में केन्द्रित कानून मंत्री अश्विनी कुमार, भारत सरकार के वकील अटॉर्नी जनरल गुलाम वाहनवती और अन्य लोगों द्वारा किए गए बदलावों के बारे में बताया था.

Image caption केन्द्रीय जांच आयोग या सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट की डांट के बाद नौ पन्नों का हलफ़नामा दिया था.

भारत सरकार के वकील अटॉर्नी जनरल गुलाम वाहनवती ने अदालत के सामने कहा है कि वो केवल केन्द्रीय कानून मंत्री अश्विनी कुमार के कहने पर ही सीबीआई के अधिकारीयों से मिले थे.

अदालत ने सीधे कानून मंत्री अश्विनी कुमार का नाम लेकर कोई टिपण्णी नहीं की है.

सरकार का बचाव

भारत सरकार ने भी यह दावा किया था कि केन्द्रीय कानून मंत्री ने सीबीआई की जांच रिपोर्ट में कोई बदलाव नहीं किया था.

सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर सरकार और सीबीआई को पहले ही बहुत लताड़ लगा चुका है.

सीबीआई ने कोयला खदान आवंटन घोटाले की जांच रिपोर्ट सबसे पहले मार्च में सुप्रीम कोर्ट को सौंपी थी. उस रिपोर्ट को सौंपते वक़्त सीबीआई ने कहा था कि उन्होंने रिपोर्ट की गोपनीयता को बनाए रखा है.

संसद में भारतीय जनता पार्टी सहित विपक्षी दल लंबे समय से अश्विनी कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट में सरकार की खिंचाई के बाद भाजपा ने एक बार फिर कहा है कि सरकार कानून मंत्री को बर्खास्त करे.

संबंधित समाचार