पाकिस्तानी कैदियों को मिले सुरक्षा: दलबीर

  • 9 मई 2013
सरबजीत सिंह का परिवार
सरबजीत सिंह की रिहाई के लिए दलबीर सिंह ने हर स्तर पर लड़ाई लड़ी

पाकिस्तानी क़ैदी सनाउल्लाह की मौत की ख़बर आने के बाद पाकिस्तान में मारे गए भारतीय कैदी सरबजीत सिंह की बहन दलबीर कौर ने केंद्र सरकार से अपील की है कि वह भारत की जेलों में बंद पाकिस्तानी कैदियों की सुरक्षा सुनिश्चित करे.

इसके साथ ही दलबीर ने पाकिस्तान सरकार से मांग की वह वहाँ की जेलों में बंद भारतीय कैदियों को पुख्ता सुरक्षा मुहैया कराए.

सनाउल्लाह की मौत की ख़बर आने के बाद बीबीसी संवाददाता रूपा झा से दलबीर कौर ने कहा,''सनाउल्लाह की मौत की ख़बर सुनकर मुझे बहुत दुख हुआ.ऐसा लगा कि मैं दूसरी बार सरबजीत की मौत की खबर सुन रही हूं.''

दुख की घड़ी

उन्होंने कहा कि सरबजीत के मौत की खबर सुनकर जिस तरह का दुख उनके परिवार को हुआ था. वैसा ही दुख उनके सनाउल्लाह के परिवार को भी हुआ होगा. उन्होंने कहा कि इस तरह के समाचार को सुनकर, उसे सहन कर पाना बहुत मुश्किल होता. मैंने अपने प्रिय को खोने का दुख मैंने झेला है.

दलबीर कौर ने कहा,''दुख की इस घड़ी में मैं पूरी तरह सनाउल्लाह के परिवार के साथ हूं. मैं ईश्वर से प्रार्थना करती हूं कि वह सनाउल्लाह के परिवार को इस दुख को सहन करन की ताकत दे.ईश्वर उनकी आत्मा को शांति बख्शे.''

उन्होंने कहा कि वे इस घटना की कड़े से कड़े शब्दों में निंदा करती हैं.

दलबीर ने कहा,''हम महात्मा गांधी के देश के निवासी है. इसलिए हमें अमन और शांति को बनाए रखना चाहिए. हमें पाकिस्तान के रास्ते पर नहीं चलना है.''

सरबजीत का मामला

शुक्रवार 26 अप्रैल को कोट लखपत जेल में छह क़ैदियों ने भारतीय कैदियों ने सरबजीत सिंह पर ईंट और धारदार हथियारों से हमला किया था. इस हमले में उनके सिर में गंभीर चोटें आई थीं और वो कोमा में चले गए थे.

इसके बाद उन्हें उनका लाहौर के जिन्ना अस्पताल में भर्ती कराया गया था. वहाँ इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई थी.

सरबजीत सिंह पर 1990 में पाकिस्तान के दो शहरों में हुए बम धमाकों में शामिल होने का आरोप था. इन हमलों में 14 लोग मारे गए थे. लेकिन, सरबजीत का परिवार इन आरोपों से इनकार करता रहा.

परिवार के मुताबिक सरबजीत गलत पहचान की वजह से पकड़े गए है.

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