स्काइप पर जारी है गुरू-शिष्य परंपरा

Image caption स्काइप के ज़रिए सुरों का ज्ञान देती विद्या सुब्रमण्यम

एक ज़माना था जब गुरु के चरणों में शिष्य कला सीखा करते थे और गुरु-शिष्य के बीच एक अटूट रिश्ता होता था. लेकिन अब ये परंपरा कम ही दिखाई देती है और ऐसा लगने लगा था कि तकनीक के दौर में कला का माध्यम कहीं पीछे रह जाएगा.

पर किसे मालूम था कि तकनीक का माध्यम ही कला के प्रसार में एक अहम भूमिका निभाएगा.

चेन्नई में टी वी रामप्रसाद और उनकी पत्नी इंदिरा कादम्बि अपने घर से स्काइप या लाइव विडियो चैट के ज़रिए हजारों मील दूर बैठे अपने विद्यार्थियों को नाच-गाना सिखाते हैं.

टीवी रामप्रसाद कहते हैं, "हम ऑनलाइन के माध्यम से अपने शिष्यों को न केवल नृत्य और संगीत सिखाते हैं बल्कि पुराने रीत-रिवाज को अपनाने की कोशिश भी करते हैं."

उनकी पत्नी इंदिरा कहती हैं कि उनकी कोशिश यही होती है कि विदेशी विद्यार्थियों को वे इंटरनेट पर ही गुरु को सम्मान देने और भारतीय संस्कृति के बारे में सीख दें.

वेब पर विश्वविद्यालय !

चेन्नई में पति और पत्नी की इस जोड़ी ने शिक्षकों की एक टीम को तनख्वाह पर रखा है जिनका काम है विदेशी विद्यार्थियों को प्रशिक्षण देना.

नाच और गाने की परंपरागत संस्थाओं की जगह अब इन्होंने वेब की दुनिया में ही एक विश्वविद्यालय खोल दिया है.

टीवी रामप्रसाद कहते हैं, "हम अपने विद्यार्थियों को वेब पर इस तरह की ट्रेनिंग देने की कोशिश करते हैं कि वो दूर रह कर भी अच्छी तरह से सब कुछ सीख सकते हैं."

एक से चार साल की अवधि के संगीत व डांस के कोर्स वेब पर दिए जाते हैं जिसके पूरे होने पर विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र भी दिए जाते हैं.

नाच-गाने के अलावा तबला और घटम का प्रशिक्षण भी ऑनलाइन ही दिया जाता है.

सुरेश वैद्यनाथम घटम बजाने में इतने माहिर हैं कि उन्हें चेन्नई में ‘घटम सुरेश’ के नाम से जाना जाता है और उनके विद्यार्थी दुनिया भर में फैले हुए हैं.

विदेश में देसी धुन

Image caption वैद्यनाथन चेन्नई में 'घटम सुरेश' के नाम से भी जाने जाते हैं.

जब मैं उनके घर गया तो वे स्काइप पर टोक्यो में बैठे अपने एक विद्यार्थी कुनो टाका आकी को घटम की शिक्षा दे रहे थे.

इधर गुरु चेन्नई में अपने घर पर घटम बजा रहे थे और शिष्य टोक्यो में अपने घर पर. दोनों के बीच ज़बर्दस्त जुगलबंदी चल रही थी.

कुनो टाका आकी ने हमें स्काइप पर बताया कि किस तरह से वे पिछले दो सालों से अपने गुरू से घटम सीख रहे हैं.

उनका कहना था, “अब मैं जापान में अकेला पेशेवर घटम बजाने वाला बन गया हूं और इसका श्रेय मेरे गुरू को जाता है.”

ऑनलाइन का फायदा उठाते हुए विदेशों में पेशेवर संगीतकार भी भारतीय राग अलाप रहे हैं.

सुरेश वैद्यनाथन कहते हैं, “घटम पश्चिमी कलाकारों को बहुत पसंद है. हमारे शागिर्दों में संगीतकार भी हैं.”

15 साल अमरीका में रह चुकी शास्त्रीय संगीत के जगत की जानी-मानी हस्ती, विद्या सुब्रमण्यन दो साल पहले वापस चेन्नई लौटी हैं.

अच्छी कमाई

स्काइप पर वे फ्रांस, अमरीका, ऑस्ट्रेलिया और कई दूसरे देशों के लोगों को संगीत सिखाती हैं.

उनका कहना है, “मैंने ये काम अमरीका में ही शुरू कर दिया था और अब मैं चेन्नई में अपने घर बैठे-बेठे विदेश में रहने वाले लोगों को संगीत सिखाती हूं. इसमें पैसे भी अच्छे मिलते हैं.”

विदेशियों के बीच भारतीय संगीत और कला को सीखने की ख्वाहिश पहले से ही रही है.

लेकिन लाइव वीडियो चैट की सेवाएं इसे विदेशों में और भी लोकप्रिय बनाने में एक अहम भूमिका निभा रही है.

संगीत के गुरुओं का कहना है कि इस पेशे में कमाई भी अच्छी है.

एक घंटे की ट्रेनिंग के लिए विदेशी विद्यार्थियों को दो से तीन हज़ार रुपए देने पड़ते हैं.

अगर गुरू हज़ारों मील दूर हो और विदेशियों को भारतीय संगीत और नृत्य सीखने का शौक हो, तो उनके लिए ये सौदा महंगा नहीं है.

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