सिब्बल को कानून और जोशी को रेल मंत्रालय

Image caption अश्विनी कुमार की जगह कपिल सिब्बल को कानून मंत्रालय का प्रभार, सीपी जोशी को रेल मंत्रालय

केंद्रीय दूर संचार एवं सूचना प्रोद्यौगिकी मंत्री कपिल सिब्बल को कानून मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है जबकि केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री सीपी जोशी को रेल मंत्रालय का जिम्मा दिया गया है.

राष्ट्रपति कार्यालय की प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि रेल मंत्रालय से पवन कुमार बंसल और कानून मंत्रालय से अश्विनी कुमार के इस्तीफ़े के बाद प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति ने ये फ़ैसला लिया है.

हालांकि पहले कहा जा रहा था कानून मंत्रालय के लिए मनीष तिवारी और वीरप्पा मोइली भी दावेदार हैं जबकि रेल मंत्रालय के लिए मल्लिकाअर्जुन खड़गे का नाम चर्चा में था. लेकिन प्रधानमंत्री ने कपिल सिब्बल और सीपी जोशी पर ज़्यादा भरोसा दिखाया.

इससे पहले केंद्रीय कानून मंत्री के पद से इस्तीफ़ा देने के बाद अश्विनी कुमार ने पहली प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया है लेकिन विवादों को दूर करने के लिए अपने पद से इस्तीफ़ा दिया है.

'कुछ भी ग़लत नहीं किया'

उन्होंने कहा, “मैं ख़ुशनसीब था कि प्रधानमंत्री ने मुझे अपने कैबिनेट टीम का सदस्य बनाया. कल उनसे मिलकर मैंने अपना इस्तीफ़ा सौंपा है. मुझे लेकर जो फ़िजूल के विवाद इतने दिनों से चल रहे थे उसे खत्म करने के लिए मैं ने अपना इस्तीफ़ा दिया है.”

अश्विनी कुमार को कोलगेट मामले की सीबीआई जांच में दखल देने का आरोप है. इस मामले में अश्विनी कुमार ने कहा है, “मामले की सुनवाई माननीय सुप्रीम कोर्ट में चल रही है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने मेरे ख़िलाफ़ कोई टिप्पणी नहीं की है. लेकिन इस मुद्दे पर विवाद ज़्यादा नहीं बढ़े इसलिए मैं ने इस्तीफ़ा दिया.”

अश्विनी कुमार ने ये भी कहा है कि इस्तीफ़ा देने का मतलब ये नहीं है कि उन्हें कुछ गलत किया है. उन्होंने इस्तीफ़ा देने की वजह के बारे में कहा, “कुछ राजनीतिक फ़ैसले होते हैं. पार्टी और प्रधानमंत्री महोदय ने जो फ़ैसला लिया उसके मुताबिक मैंने भरोसेमंद सिपाही की तरह अपना काम किया.”

हालांकि अश्विनी कुमार ने ये भी कहा कि इस मामले में इंसाफ़ और सच्चाई की जीत होगी.

पार्टी का भरोसा कायम

Image caption अश्विनी कुमार ने कहा इंसाफ़ और सच्चाई की जीत होगी

रेल मंत्री पवन कुमार बंसल के साथ इस्तीफ़े की बात पर प्रतिक्रिया देने से इनकार करते हुए अश्विनी कुमार ने कहा, "प्रधानमंत्री का विशेषाधिकार होता कि वे अपने सहयोगियों से इस्तीफ़ा देने के लिए कह सकते हैं. कब और कैसे इस्तीफ़ा देना है, इसके लिए भी कह सकते हैं."

कोलगेट मामले में सीबीआई जांच रिपोर्ट को बदलवाने के आरोप अश्विनी कुमार पर लगे हैं, लेकिन उन्होंने कहा आरोप लगाने वालों को सुप्रीम कोर्ट की आठ फ़रवरी का आदेश पढ़ना चाहिए.

पहले इस मुद्दे पर सोनिया गांधी ने अश्विनी कुमार का समर्थन किया था लेकिन बाद में क्या उन्होंने अपने पार्टी नेता का भरोसा खो दिया?

इस सवाल के जवाब में अश्विनी कुमार ने कहा, “मैं ने अपने किसी नेता का भरोसा नहीं खोया है.”

सरकार पर सवाल

उधर भारतीय जनता पार्टी ने दो मंत्रियों के इस्तीफ़े को सरकार की विश्वसनीयता का संकट बताया है.

भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कहा, "मंत्रियों के इस्तीफ़े से सरकार की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल पैदा होते हैं. ये सरकार सभी मोर्चों पर नाकाम रही है."

राजनाथ सिंह ने कांग्रेस पर तीखा प्रहार करते हुए कहा है, "कांग्रेस पार्टी ने देश को राजनीतिक संकट में डाल दिया है."

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