भारत में सस्ते स्मार्टफोन्स का चोखा धंधा

स्मार्टफोन

अनिमेष राय कोलकाता शहर में नौकरी करते हैं. 26 साल के इस नौजवान की पगार 13 हजार रुपए है और उन्होंने ढेर सारी खूबियों वाला एक स्मार्टफोन कुछ दिनों पहले ही खरीदा हैं.

लेकिन मोबाइल खरीदते वक्त एक मुश्किल सी शर्त थी कि खरीदा जाने वाला स्मार्टफोन सस्ता होना चाहिए

इसलिए उन्होंने दुनिया के सबसे मशहूर ब्रांडों में न तो ऐपल आईफोन को चुना और न ही सैमसंग गैलेक्सी को.

अनिमेष ने मोबाइल सेट निर्माता कंपनी माइक्रोमैक्स का एक मॉडल 4,200 रुपए में खरीदा.

अनिमेष बीबीसी से अपने अनुभव के बारे में कहते हैं, "मैं एक ऐसा फोन तलाश रहा था जो मेरे पैसे की सही कीमत चुकाए. बेहद मंहगा फोन खरीदना मेरे बस में नहीं था. लेकिन माइक्रोमैक्स के बोल्ट ए-35 मॉडल में वो तमाम खूबियां हैं जो सैमसंग या आई-फोन में होती हैं और वह भी कहीं कम कीमत पर."

एक अरब स्मार्टफोन

अनिमेष उन भारतीयों में से हैं जो पहली बार स्मार्टफोन खरीदने जा रहे हैं और उनकी चाहत मोबाइल फोन उत्पादकों को इस उभरते बाजार में अपने लिए नई संभावनाएं तलाशने का मौका दे रही हैं.

एक अनुमान के मुताबिक भारत के मोबाइल बाजार में फिलहाल 10 फीसदी उपभोक्ताओं के ही पास स्मार्टफोन की सुविधा है लेकिन यह तस्वीर आने वाले कुछ सालों में बदल सकती है.

पिछले साल भारत में एक करोड़ 90 लाख स्मार्टफोन बेचे गए थे और इस बात की संभावना जताई जा रही है कि अगले तीन सालों में यह बढ़कर एक अरब स्मार्टफोन के आंकड़े को पार कर जाएगा.

रिसर्च कंपनी आईडीसी के मुताबिक भारत 2017 तक चीन और अमरीका के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा बाजार बन जाएगा.

एंड्रॉयड प्लेटफ़ॉर्म

माइक्रोमैक्स के सहसंस्थापक राहुल शर्मा कहते हैं, "स्मार्टफोन को लेकर फिलहाल ऐसे हालात हैं जिसके बारे में पहले सोचा तक न गया था. मांग में यह उछाल बरकरार रहेगा. बाजार में ग्राहकों का बड़ा हिस्सा ऐसा है जो अपने पुराने हैंड सेट की जगह स्मार्टफोन खरीद रहा है."

मौजूदा बाजार की अग्रणी कंपनी सैमसंग के पास कारोबार का 40 फीसदी हिस्सा है.

जबकि माइक्रोमैक्स और कॉर्बन जैसी कंपनियां भी 5500 रुपए से कम के स्मार्टफोन मुहैया कराकर उपभोक्ताओं को लुभाने में कामयाब हो रही हैं.

Image caption मंहगे स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनियों के हाथ से बाजार फिसलता जा रहा है.

भारत में इन दोनों कंपनियों के एंड्रॉयड प्लेटफ़ॉर्म वाले स्मार्टफोन 4100 रुपए की कीमत पर उपलब्ध हैं.

जबकि ऐपल और सैमसंग के सबसे सस्ते स्मार्टफोन क्रमशः 26,850 और 6200 रुपए में उपलब्ध हैं.

उपभोक्ताओं की जेब

मालूम पड़ता है कि सस्ते स्मार्टफोन निर्माता कंपनियों की रणनीति काम कर रही है.

डाटा फर्म आईडीसी का कहना है कि भारत में इस साल की पहली तिमाही में माइक्रोमैक्स स्मार्टफोन बनाने वाली दूसरी सबसे बड़ी कंपनी रही और कॉर्बन पांचवीं.

सोनी तीसरी नंबर पर और नोकिया चौथे पायदान पर.

कार्बन के साथ खास बात यह है कि वह साल भर पहले ही स्मार्टफोन के बाजार में उतरी थी.

इसमें चौंकाने वाली कोई बात नहीं है.

उपभोक्ताओं की जेब के दायरे में उत्पाद की कीमत रखना ही इस कामयाबी की कुंजी है.

मूल्य रणनीति

माइक्रोमैक्स ने अपने लिए अगले साल तक बाजार की अगुवा कंपनी का लक्ष्य रखा है.

इस बात में किसी को कोई शक नहीं है कि आने वाले सालों में भारत का स्मार्टफोन बाजार और बढ़ेगा लेकिन उपभोक्ताओं की क्षमता के भीतर उत्पाद मुहैया कराने की कंपनियों की काबिलियत ही निर्णायक होगी.

अभी तक भारत के मोबाइल हैंडसेट उत्पादकों ने बाजार पर अपनी पकड़ बना रखी थी.

लेकिन वैश्विक कंपनियों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे अपनी मूल्य रणनीति में बदलाव के जरिए मुकाबला करेंगे.

इन हालात में जबकि बाजार में हिस्सेदारी के लिए दोनों पक्ष नजर गड़ाए हुए हों यह साफ कहा जा सकता है कि भारतीय उपभोक्ता ही वास्तव में बाजार का राजा है.

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