हिरासत में मौत, सीबीआई जांच की सिफारिश

हिरासत में मौत
Image caption पुलिस इसे तबीयत खराब होने से हुई मौत मान रही है

उत्तर प्रदेश सरकार ने फैजाबाद जिला कचहरी में करीब छह साल पहले हुए बम धमाकों के अभियुक्त खालिद मुजाहिद की शनिवार को पुलिस हिरासत में हुई मौत की जांच सीबीआई को सौंपने की सिफारिश कर दी है.

सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने खालिद के परिवार की मांग पर यह मामला सीबीआई को सौंपने का फैसला लिया है.

खालिद 23 नवंबर 2007 को फैजाबाद जिला कचहरी में हुए सीरियल ब्लास्ट के मुख्य अभियुक्त थे.

खालिद इस समय लखनऊ जेल में बंद थे. पुलिस के सात जवान शनिवार को खालिद और तीन अन्य अभियुक्तों को कड़ी सुरक्षा में पेशी के लिए फैजाबाद ले गए थे. वापसी में रामसनेही घाट के पास खालिद की तबीयत खराब होने लगी. उनके सीने में तेज दर्द उठा.

'बीमारी से मौत'

पुलिसकर्मी खालिद को इलाज के लिए बाराबंकी के जिला अस्पताल में ले गए, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

उनके साथ चल रहे एक कैदी ने मीडिया से कहा कि खालिद चार दिन से बीमार थे और जेल में उनका ठीक से इलाज नही हुआ था.

Image caption खालिद के परिवार की मांग पर अखिलेश ने सीबीआई जांच की सिफारिश की है

बाराबंकी पुलिस का कहना है कि पहली नजर में खालिद की मौत बीमारी से हुई लगती है.

खालिद के साथ तीन अन्य कैदी और सात पुलिसवाले चल रहे थे. इसलिए भी समझा जाता है कि उनकी मौत के पीछे किसी और का हाथ नही हो सकता है.

हिरासत में मौत का मामला होने की वजह से सरकार ने शनिवार शाम ही इस मामले की न्यायिक और उच्च स्तरीय प्रशासनिक जांच के आदेश दे दिए थे. खालिद का पोस्टमार्टम भी डॉक्टरों के एक पैनल से कराने का फैसला किया गया.

सरकार के इस फैसले खालिद के परिवार के लोग संतुष्ट नही थे. उनके परिजनों ने पिछली मायावती सरकार के कार्यकाल में उच्च पदों पर तैनात कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज कराया है.

इसी मुक़दमे की जांच सीबीआई को सौंपी जा रही है.

खालिद और उनके साथी अन्य अभियुक्तों के परिवार शुरू से आरोप लगा रहे थे कि उन्हें बम धमाकों के मामलों में गलत तरीके से फंसाया गया है. अपने चुनावी वादे के मुताबिक समाजवादी पार्टी सरकार ने खालिद पर आपराधिक मामला वापस ले लिया था. लेकिन अदलात ने उसे नामंजूर कर दिया था.

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