ईरोम शर्मिला के समर्थन में 'संगीत सत्याग्रह'

ईरोम शर्मीला का समर्थन
Image caption ईरोम शर्मीला के समर्थन में दिल्ली में आयोजित संगीत सत्याग्रह में हालाँकि गिने-चुने लोग ही आए लेकिन उनमें जोश की कमी नहीं थी.

शायद कुछ मीडियाकर्मी ना होते तो ट्रैफ़िक के शोर के बीच शायद किसी ने देखा भी नहीं होता कि संगीतकारों और युवा मानवाधिकार कार्यकर्ता का एक बेहद छोटा सा गुट दिल्ली के पटियाला अदालत के बाहर ईरोम शर्मिला के समर्थन में ‘संगीत सत्याग्रह’ कर रहा है.

इस गुट ने खुद को नाम दिया था ‘ईरोम शर्मिला के दोस्त’ और वो मणिपुर और भारत-प्रशासित कश्मीर में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों का संगीत के माध्यम से विरोध कर रहे थे. उनके गानों में कथित उल्लंघनों के लिए भारतीय सेना की आलोचना की गई थी.

Image caption ईरोम शर्मीला

इस कार्यक्रम के पीछे सोच 23-वर्षीय साक्षी कुमार (बाएँ) की थी जिसमें उनकी बहन प्रतीक्षा ने भी उनका साथ दिया. साक्षी ने अप्रैल में ईरोम शर्मिला के समर्थन में एक फ़ेसबुक पेज की शुरुआत की जिस पर उन्हें बहुत अच्छी प्रतिक्रिया मिली. उनके फ़ेसबुक पेज से कई लोग जुड़े. फिर उन्होंने युवा कलाकारों के साथ मिलकर ईरोम शर्मिला के समर्थन में संगीत सत्याग्रह करने की सोची.

Image caption आयोजक साक्षी कुमार और बहन प्रतीक्षा

ईरोम शर्मिला पिछले 12 सालों से मणिपुर में सैन्य विशेषाधिकार क़ानून के ख़िलाफ़ अनशन पर हैं. दिल्ली पुलिस ने उन पर आत्महत्या का मुक़दमा दर्ज किया था. ये मुक़दमा साल 2006 के एक अनशन से संबंधित है. भारतीय कानून के मुताबिक अपनी जान लेने की कोशिश के लिए व्यक्ति को सज़ा दी जा सकती है.

Image caption कार्यक्रम का आयोजन सुबह आठ से दस के बीच किया गया था

ईरोम शर्मिला के मंगेतर डेसमंड कूटिन्हो ने बीबीसी को बताया कि बुधवार को शर्मिला को अदालत में पेश होना था ताकि उन्हें उनपर लगे आरोपों के बारे में बताया जा सके लेकिन वो पेश नहीं हो सकीं. डेसमंड के मुताबिक अभी स्पष्ट नहीं है कि अदालती कार्यवाही आगे कैसे बढ़ेगी.

Image caption आयोजकों का कहना है कि वो इस प्रयास को आगे भी ले जाने का सोचेंगे

ईरोम शर्मिला पिछले बारह सालों से भोजन ग्रहण नहीं कर रही हैं, और उन्हे नाक के रास्ते जबरन तरल आहार दिया जाता है. मार्च में उनके ऊपर आत्महत्या के आरोपों पर शर्मिला ने कहा था कि वो जिंदगी से प्यार करती हैं.

Image caption मुंबई के हिप-हॉप गायक अश्विनी मिश्रा

बुधवार के कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों का कहना था कि वो ईरोम शर्मिला के समर्थन में आगे भी आवाज़ें उठाते रहेंगे. युवा हिप-हॉप गायक अश्विनी मिश्रा ने कहा कि वुधवार के कार्यक्रम का मक़सद था ईरोम शर्मिला के अनशन और सैन्य विशेषाधिकार कानून के बारे में युवाओं को अवगत करवाना. उन्होंने कहा, "हम लोगों को बताना चाहते हैं कि भारतीय प्रशासन ने इलाकों में लोगों के साथ कैसा व्यवहार किया है."

Image caption संगीत का आनंद लेते कुछ युवा गायक

उधर आयोजक साक्षी कुमार कहती हैं कि उन्होंने अपने अगले कदम के बारे में नहीं सोचा है लेकिन अगर अदालत ईरोम शर्मिला को अदालत में पेश होने का आदेश देती है तो वो इसी प्रकार आगे भी "समान विचार वाले लोगों के साथ संगीत सत्याग्रह आयोजित करने के बारे में सोचेंगी".

(तस्वीरें: असद अली और समाचार एजेंसी पीटीआई)

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