कहाँ गया बीसीसीआई के 'सुपरकिंग' का वादा!

  • 23 मई 2013

मुझे याद है जब मैं भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई का अध्यक्ष बनने के बाद नारायणस्वामी श्रीनिवासन से मिला था, तो मेरे सवाल के उत्तर में उन्होंने अपनी प्राथमिकताएं गिनाते हुए कहा था, "खेल का विकास, ज़्यादा जवाबदेही और पूरी पारदर्शिता."

अध्यक्ष बनने के बाद श्रीनिवासन ने अपनी पहली पत्रकारवार्ता में कहा था, "मेरे पास जीरो टॉलरेंस है. मैं किसी भी ऐसे आदमी को अपने पास नहीं फटकने दूंगा जिसके ऊपर भ्रष्टाचार का दाग हो."

लेकिन जब उनके दामाद गुरुनाथ मेयप्पन और विंदू दारा सिंह के रिश्तों की बात सामने आई तो श्रीनिवासन का कोई बयान सामने नहीं आया.

( जगन मामले में बीसीसीआई प्रमुख को बुलावा)

जब श्रीसंत और दो अन्य खिलाड़ी स्पॉट फ़िक्सिंग में पकड़े गए, तो 48 घंटों तक ना श्रीनिवासन का ना राजीव शुक्ला का कोई बयान आया.

मुझे नहीं पता कि गुरुनाथ मेयप्पन और विंदू दारा सिंह के बीच क्या रिश्ता है. लेकिन मुझे नहीं लगता कि विंदू और मेयप्पन दोनों अगर पिछले कुछ दिनों से लगातार बात कर रहे थे तो यह किसी ऐसी फ़िल्म के बारे में थी, जिसे ये दोनों मिल कर बनाना चाहते थे.

'घोर धार्मिक'

मुझे यह भी याद है कि बीसीसीआई का अध्यक्ष बनने के बाद जो पहला सवाल मैंने उसने पूछा था वो यह था कि "आपने अपने ज्योतिषी से अपने कार्यकाल के बारे में सलाह कर ली है ना."

Image caption जब श्रीसंत और दो अन्य खिलाड़ी स्पॉट फ़िक्सिंग में पकड़े गए तो 48 घंटों तक ना श्रीनिवासन का ना राजीव शुक्ला का कोई बयान आया.

उत्तर में श्रीनिवासन जोर से हँसे थे और बोले थे, "हाँ, लेकिन मैं यह नहीं बताउंगा कि मेरे ज्योतिषी ने मुझे क्या बोला और मेरा ज्योतिषी हैं कौन."

पता नहीं उन्हें उनके ज्योतिषी ने इस दिन के बारे में बताया था कि नहीं. वैसे श्रीनिवासन का ज्योतिष में इस कदर विश्वास है कि वो बिना ज्योतिषियों से पूछे कोई काम नहीं करते. यहाँ तक की वर्ल्ड कप का फ़ाइनल हो या उनकी अपनी टीम के मैचों का समय, सब कुछ ज्योतिषी के सलाह पर ही होता है.

'कद से बड़ा रूतबा'

वैसे श्रीनिवासन को जो लोग जानते हैं वो जानते हैं कि उन्हें ज़्यादा दिखाई देने का शौक नहीं है. वो बड़े 'लो की ऑपरेटर हैं'.

श्रीनिवासन 'लो की' हो सकते हैं और उनकी कंपनी इंडिया सीमेंट लिमिटेड और उनका घराना भारत के सबसे बड़े औद्योगिक घरानों में भले ना आता हो लेकिन उनका रूतबा कहीं ज़्यादा है.

( बीसीसीआई पर गिरी आयकर विभाग की गाज)

दिल्ली में सत्ता के गलियारों में आम तौर पर लोग मानते हैं कि केंद्रीय मंत्री अजय माकन को खेल मंत्रालय से इसलिए हाथ धोना पड़ा, क्योंकि वो बीसीसीआई पर फंदा कसने की कोशिश कर रहे थे.

हालाँकि कांग्रेस पार्टी और सरकार ऐसे आरोपों को सिरे से खारिज करती है.

और बीसीसीआई बेहद ताकतवर लोगों की जमात है "यहाँ कांग्रेसी राजीव शुक्ला हैं तो भाजपा के अरुण जेटली और उभरते नेता जैसे अनुराग ठाकुर भी हैं. यही चीज़ बीसीसीआई को इतना महत्वपूर्ण बनाती है."

मैं कई बार एन श्रीनिवासन से मिला हूँ, लेकिन मुझे याद नहीं पड़ता कि उन्होंने मुझसे कभी अपने व्यापार के बारे में बात की हो.

उनकी कंपनी का टर्न ओवर 4200 करोड़ रूपए हैं और पिछले साल उनकी कंपनी का मुनाफ़ा टैक्स देने के बाद 300 करोड़ रूपए से कम था. लेकिन कभी उन्होंने नहीं कहा कि वो अपनी कंपनी को कैसे भारत की नंबर वन कंपनी बनाना चाहते हैं या वो क्यों एसीसी या गुजरात अंबुजा जितना बड़ा नहीं बन पा रहे हैं.

वो केवल क्रिकेट की बात करते हैं, वैसे वो खेल प्रेमी आदमी हैं लेकिन क्रिकेट से उनका हमेशा बहुत गहरा नाता रहा हो ऐसा नहीं है.

श्रीनिवासन खुद किसी ज़माने में रोज़ गोल्फ खेलते थे और शतरंज एसोसिएशन के अध्यक्ष भी थे लेकिन बीसीसीआई उन्हें जो सम्मान या रूतबा दिला सकता है जो और ज़्यादा दौलत नहीं दिला सकती. वैसे नेटवर्किंग करने के लिए बीसीसीआई जैसी जगहें बहुत ही मुफ़ीद होती हैं.

श्रीनिवासन की तरह उनके दामाद गुरुनाथ मेयप्पन यूं तो रियल एस्टेट के कारोबार से जुड़े थे. लेकिन वो भी पिछले कुछ समय से केवल क्रिकेट पर ही अपना ध्यान ज़्यादा लगाते दिख रहे हैं. चाहे उनकी टीम चेन्नई सुपरकिंग्स मैदान में खेल रही हो या खिलाड़ियों की नीलामी हो रही हो, गुरुनाथ मेयप्पन सामने दिखाई देते हैं.

आशंका

Image caption शारजाह क्रिकेट प्रेमियों की धड़कन होता था लेकिन धीरे धीरे उस पर माफिया का, सट्टेबाजों का, दुबई के तस्करों का शिकंजा कसता गया और वो बंद गया.

एक क्रिकेट के प्रेमी की तरह जैसे हालात से क्रिकेट गुज़र रहा है उसे देख कर दुख होता है. आज भी बीसीसीआई कोई कड़ा कदम उठाती नहीं दिख रही.

( फिक्सिंग मामले में पांच खिलाड़ी निलंबित)

भारत के खेल मंत्री कह रहे हैं कि टोकरी में एक दो खराब सेब पूरी टोकरी के सेबों को खराब नहीं करते.

कहीं आईपीएल का भी वही हश्र ना हो जो किसी ज़माने में शारजाह क्रिकेट का हुआ था. शारजाह क्रिकेट प्रेमियों की धड़कन होता था लेकिन धीरे धीरे उस पर माफिया और सट्टेबाजों का प्रभाव होने के आरोप लगने लगे.

आईपीएल को फ़ीफ़ा की तरह कड़े कदम उठाने चाहिए ताकि फुटबॉल की तरह ही क्रिकेट में सट्टेबाज़ी को लेकर लोगों की शंकाओं का अंत हो और खेल बच जाए.

बीबीसी संवाददाता अविनाश दत्त से बातचीत पर आधारित

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