चिटफंड स्कैम ने जिनकी नींद उड़ा दी है....

Image caption चिटफंड घोटाले का शिकार हुए प्रामाणिकपुरा गांव के लोग.

पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले का एक गाँव प्रमाणिक पाड़ा अपने अमन और सुकून के लिए जाना जाता रहा है.

कोलकता के शोर शराबे और इसकी पसीना बहा देने वाली गर्मी के बाद इस गांव की खामोशी और ताज़ी हवा किसी के भी दिल को छू सकती है.

लेकिन इन दिनों इस सुंदर और हरे भरे गाँव के हर चेहरे पर उदासी सी छाई हुई है.

शारदा चिट फंड घोटाले ने इस गाँव के लोगों के सारे सपने तोड़ दिए हैं और इनके चेहरों की ख़ुशी छीन ली है.

इस बारे में सुमित्रो प्रमाणिक का ही उदाहरण लिया जा सकता है. उन्होंने अपनी बहन की शादी में ख़र्च करने के लिए शारदा चिट फंड में अपनी सारी कमाई निवेश कर रखी थी.

वह कहते हैं, "मैंने चार साल तक पैसे जमा कराए. मुझे कहा गया की मेरी जमा पूँजी 20 हज़ार रुपए के बदले पांच साल पूरे होने पर मुझे ढाई गुना अधिक यानी 50 हज़ार रुपए मिलेंगे. लेकिन मेरे सारे पैसे डूब गए."

आत्महत्या की धमकी

Image caption सुमित्रो प्रामाणिक चिटफंड घोटाले के पीड़ितों में से एक है.

चिइस गाँव की बोनोस्पति मंडल ने भी इसी कंपनी में अपने घर की मरम्मत के लिए पांच हज़ार रुपए निवेश किए थे.

वह कहती हैं, "मुझ से कहा गया था कि पांच साल बाद 12 हज़ार पांच सौ रुपए वापस मिलेंगे. लेकिन अब हमारे पैसे कौन देगा?"

सुमित्रो प्रमाणिक मायूसी के इस आलम में कई बार आत्महत्या की धमकी भी दे चुके हैं.

सुमित्रो ने बहुत जोर देकर कहा, "अगर मेरे पैसे नहीं मिले तो मैं या तो आत्महत्या कर लूँगा या फिर एजेंट की जम कर पिटाई करूंगा."

उनका परिवार उन पर कड़ी नज़र रख रहा है और उनकी धमकी को गंभीरता से ले रहा है.

इसकी वजह भी है. सुमित्रो के ही पडोसी और दोस्त रणजीत प्रमाणिक ने निवेश किए गए तीन हज़ार रुपए गंवाने पर बार-बार आत्महत्या की धमकी दी और फिर दो मई को इस पर अमल भी कर डाला.

प्रमाणिक पाड़ा की कहानी पश्चिम बंगाल के कई घरों की कहानी है. चिट फंड घोटाले के बाद अब तक राज्य भर में 11 किसानों और चिट फंड कंपनी के एजेंट ने आत्महत्या की है.

हज़ारों करोड़ की मालिक

Image caption चिटफंड एजेंट ब्यूटी दत्त का कहना है कि कंपनी ने खुद उन्हें भी ठगा है.

ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लाखों ग़रीब लोगों को ज़बरदस्त आर्थिक चोट पहुंची है.

शारदा की स्थापना जुलाई 2008 में की गई थी. देखते ही देखते ये कंपनी हजारों करोड़ की मालिक बन गई.

इस कंपनी के मालिक सुदिप्तो सेन ने 'सियासी प्रतिष्ठा और ताक़त' हासिल करने के लिए मीडिया में खूब पैसे लगाए और हर पार्टी के नेताओं से जान पहचान बढ़ाई.

कुछ ही सालों में वे अरबपति हो गए. शारदा ग्रुप के खिलाफ पहला मुक़दमा 16 अप्रैल को दर्ज किया गया और आत्महत्या का पहला कांड इसके चार दिन बाद हुआ.

शारदा के सुदिप्तो सेन फरार हो गए. बाद में उन्हें कश्मीर से गिरफ्तार किया गया. उनके गिरफ्तार होते ही कंपनी ठप पड़ गई. राज्य सरकार ने एक जांच समिति बनाई है जिसने कंपनी के सारे दफ्तर बंद कर दिए है.

सेन ने सीबीआई को एक चिट्ठी लिखी है जिसमें उन्होंने दावा किया है कि उन्हें पैसे कमाने की धुन के कारण ये करना पड़ा लेकिन उन्होंने अपने कुछ करीबी लोगों को भी इसका ज़िम्मेदार ठहराया है.

चिट फंड का व्यापार

लेकिन लालच की हवस से शारदा ग्रुप ही ठप हुआ है बल्कि 70 चिट फंड कंपनियां भी डूबी हैं.

सरकारी रिपोर्ट के अनुसार केवल दक्षिण 24 परगना में 120 कंपनियां लोगों से पैसे ऐंठने का काम कर रही थीं .

चिट फंड कंपनियों ने आम लोगों को बड़े-बड़े सपने दिखाए और बड़े-बड़े वायदे किए लेकिन ये आँखों में धूल झोंकने की तरह ही था.

दक्षिण 24 परगना जिले के तमल सरकार की चिट फंड के इस व्यापार पर गहरी नज़र है.

वो कहते हैं कि चिट फंड का व्यापार वायदों पर ही चलता है. इसके इलावा कंपनी के खाते में पैसों का आते रहना ज़रूरी है.

वो कहते हैं, "इस धंधे में होता ये है कि कंपनी के एक एजेंट दो लोगों से पैसा लेते हैं फिर अगले साल उन्हें उनके पैसे वापस करने के लिए वो तीन और लोगों से पैसे लेते हैं और उन्हें वापस करने के लिए दस और लोगों से पैसे लेते हैं और इस तरह से ये सिलसिला चलता रहता है. लेकिन अगर नकारात्मक प्रचार हुआ तो निवेशक पैसे निवेश करना बंद कर देते हैं और कंपनी बैठ जाती है. शारदा के साथ भी यही हुआ."

अब ग्रामीण इलाकों में तनाव का माहौल है. आम निवेशकों ने जीवन भर की अपनी कमाई निवेश कर रखी थी. वो अब अपने पैसे वापस करवाने के लिए एजेंट पर दबाव डाल रहे हैं.

लेकिन शारदा ग्रुप के एक एजेंट मानिक चक्रवर्ती कहते हैं, "हमें खुद भी धोखा हुआ है. शारदा ने हमें भी धोखा दिया. निवेशक हमें धमकी दे रहे है. हमारा कुसूर नहीं है. हम खुद भी इस घोटाले का शिकार हुए हैं."

ब्यूटी दत्त भी इसी कंपनी की एक एजेंट हैं.

वो कहती हैं, "हमें पांच महीने पहले शक हुआ था कि कुछ गड़बड़ है. हमारे अफसरों ने हमसे कहा कि सभी एजेंटों को अब टारगेट से अधिक पैसे कंपनी के खाते में जमा करने होंगे हमने इसका ये कह कर विरोध किया कि निवेशकों के पैसे कैसे लौटाएँगे उस पर अफसरों ने कहा ये ऊपर से हुक्म आया है."

निवेशकों को भरोसा

Image caption बोनोस्पती मंडल अपने चिटफंड के कागज दिखाती हुईं.

अब निवेशकों और एजेंटों की निगाहें सरकार पर लगी है.

ममता बनर्जी प्रशासन ने 500 करोड़ रुपए का एक फंड बनाया है जिसके द्वारा निवेशकों और एजेंटों के पैसे लौटने का कार्य शुरू होगा. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने छोटे निवेशकों को भरोसा दिलाया है कि उनके पैसे सरकार लौटाएगी.

लेकिन सुमित्रो प्रमाणिक और बोनोस्पति मंडल जैसे छोटे निवेशकों को उनके पैसे शायद ही वापस किए जा सकें, क्योंकि उन्होंने तो पुलिस को शिकायत तक दर्ज नहीं कराई है और ऐसे लोगों की संख्या बहुत है.

तमल सरकार कहते हैं जब से राज्य सरकार ने फंड बनाया है एजेंट निवेशकों से कहते फिर रहे हैं कि घबराइए मत सरकार से आपको पैसे मिल जाएंगे.

प्रमाणिक पाड़ा के निवेशक अब मायूस हो चुके है. सरकार से उन्हें उम्मीद नहीं है और एजेंट के वादों पर भी उन्हें भरोसा नहीं है.

कुछ लोगों के विचार में चिट फंड कंपनियां भले ही वामपंथी मोर्चे के शासनकाल में खुली थीं लेकिन ऐसा संभव है इसका खामियाज़ा ममता बनर्जी सरकार को भुगतना पड़े. इसका अंदाज़ा जून में होने वाले पंचायती चुनाव में हो सकता है.

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