आंध्र का 'सीईओ' तीसरे मोर्चे के कोऑपरेटिव में जुटा

  • 27 मई 2013

आंध्र प्रदेश के पूर्वमुख्यमंत्रीऔर तेलुगुदेसम के अध्यक्ष नारा चंद्रबाबू नायडू को उनके सत्ताकाल में 'सीईओ' या प्रदेश का मुख्य कार्यकारी अधिकारी कहा जाता था. तब वो भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए की मज़बूती का आधार भी थे. उन्हें तब यह भाता भी था.

दस साल सत्ता से दूर रहने के बाद नायडू को अब दोनों ही बातों से परहेज है.

पूरे 18000 किलोमीटर की पदयात्रा कर चुकने के बाद वो अब केवल कार्यकर्ताओं और आम लोगों के बीच ही दिखने की कोशिश करते हैं.

नायडू ने बीबीसी के साथ एक विषेश बातचीत में माना कि तेदेपा ने 1999 में भाजपा के साथ गठबंधन किया था और उसकी सरकार का बाहर से समर्थन दिया था लेकिन उससे उनकी पार्टी को बहुत नुकसान पहुंचा इसलिए अब वो भाजपा को समर्थन ना देंगे ना लेंगे.

तीसरा मोर्चा

तीसरे मोर्चे की पिछली सरकार का नेतृत्व देवेगौड़ा और गुजराल ने किया था.

साथ ही आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री नायडू ने कहा है कि उन्होंने केंद्र में एक गैर कांग्रेसी और गैर भाजपाई विकल्प के तौर पर तीसरे मोर्चे के गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी है.

इसके लिए वह कई राज्य स्तरीय दलों के नेताओं के साथ बातचीत कर रहे हैं. लेकिन चंद्रबाबू ने उन नेताओं और दलों के नाम बताने से इनकार कर दिया.

सोमवार से शुरू होने वाले तेलुगुदेसम पार्टी के वार्षिक सम्मलेन से एक दिन पहले चंद्रबाबू ने बीबीसी से एक बातचीत में कहा कि वह एक मज़बूत तीसरे विकल्प के गठन की कोशिश कर रहे हैं.

उन्होंने कहा कि देश हित में केंद्र में एक ऐसी सरकार बनाई जाए जो साफ़ सुथरी हो और आर्थिक विकास की गति को तेज़ कर सके और एक सुशासन दे सके.

1996 का संयुक्त मोर्चा

इस पहले नायडू 1996 में तत्कालीन संयुक्त मोर्चा की सरकार के गठन में एक अहम भूमिका निभा चुके हैं.

चंद्रबाबू ने कहा, "2014 के चुनाव का नतीजा भी 1996 जैसा ही होगा. और सरकार तीसरा मोर्चा बनाएगा."

उनका कहना था, "अनेक घोटालों और भ्रष्टाचार के कारण कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार जनता का भरोसा खो चुकी है और कमज़ोर पड़ गई है. दूसरी ओर बीजेपी भी उसका लाभ उठाने की स्थिति में नहीं है. ऐसे में तीसरे मोर्चे के लिए यह एक अच्छा अवसर हैं. मुझे विश्वास है की हम 1996 से भी ज्यादा बेहतर सरकार दे सकेंगे."

नायडू ने भाजपा के साथ किसी गठबंधन या उसे समर्थन देने की सम्भावना को खारिज करते हुए कहा कि तेलुगुदेसम हमेशा से ही एक सेकुलर पार्टी रही है.

पीएम का उम्मीदवार

पीएम पद के लिए मोदी की उम्मीदवारी पर अटकलों का दौर जारी है.

यह पूछे जाने पर कि अगर भाजपा ने नरेंद्र मोदी को और कांग्रेस ने किसी और व्यक्ति को प्रधानमंत्री पद के लिए अपने उम्मीदवार के तौर पर पेश किया तो क्या तीसरा मोर्चा भी कोई उमीदवार जनता के सामने पेश करेगा.

इस पर नायडू ने कहा, "ऐसा करना संभव नहीं होगा. मौजूदा हालात में हम ऐसा नहीं कर सकते. लेकिन हम कोशिश करेंगे कि चुनाव से पहले ही कोई मोर्चा बन जाए नहीं तो फिर चुनाव के बाद हम गठबंधन करेंगे और किसी उचित नेता को चुनेंगे. यह काम सर्वसम्मति से होगा और इसके लिए कोशिश शुरू कर दी गई है."

लेकिन नायडू ने यह स्पष्ट कर दिया की वो प्रधानमंत्री पद की दौड़ में शामिल नहीं होंगे.

उन्होंने कहा, "मेरी ऐसे कोई महत्वाकांक्षा नहीं है. अगर मैं उम्मीदवार बन जाता हूँ तो फिर मैं सर्वसम्मति बनाने का काम नहीं कर सकता. मैं कभी भी प्रधानमंत्री बनने का इच्छुक नहीं रहा और न रहूँगा."

चंद्रबाबू नायडू ने हाल ही में पूरे आंध्र प्रदेश में 1800 किलोमीटर से भी लम्बी पदयात्रा तय की थी और भरोसा जताया था कि लगभग दस साल तक विपक्ष में रहने के बाद तेदेपा सत्ता में लौट आएगी क्योंकि आंध्र प्रदेश की जनता कांग्रेस की भ्रष्ट सरकार से बेजार हो गए हैं और वो तेदेपा को सत्ता में वापस लाना चाहते हैं.

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