बढ़ सकती हैं वरुण गाँधी की मुश्किलें

वरुण गाँधी
Image caption वरुण गाँधी ने ख़ुद पर लगे आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया था.

वरुण गाँधी को भड़काऊ भाषण के दो मामलों में बरी कर दिए जाने के निचली अदालत के फ़ैसले को उत्तर प्रदेश सरकार ने चुनौती दी है.

उत्तर प्रदेश सरकार के अलावा मानवधिकार कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ से जुड़े अवामी काउंसिल फॉर डेमोक्रेसी एंड पीस के महासचिव असद हयात ने भी इसी मामले में अदालत में अपील दायर की है.

उत्तर प्रदेश सरकार की अपील को अदालत ने स्वीकार कर लिया गया है, लेकिन असद हयात की अपील पर सरकार 11 जून को फ़ैसला सुनाएगी.

अपील दायर किए जाने के कारण पर असद हयात ने बीबीसी से बातचीत में वरुण गाँधी और उत्तर प्रदेश के बीच सांठगांठ का आरोप लगाया और कहा कि इसी कारण उन्होंने ये अपील दायर की.

मामला

वरुण गांधी पर 2009 में चुनाव प्रचार के दौरान एक ख़ास समुदाय के खिलाफ़ भड़काऊ भाषण देने का आरोप था लेकिन पीलीभीत की एक निचली अदालत ने उन्हें दोनो मामलों में बरी कर दिया था.

उनके खिलाफ़ पहली एफ़आईआर 17 मार्च, 2009 को बारखेड़ा पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई. इसमें वरुण गांधी पर आठ मार्च, 2009 को एक जनसभा में भड़काऊ भाषण देने का आरोप लगाया गया था.

दूसरी एफ़आईआर 18 मार्च, 2009 को सदर कोतवाली में दर्ज कराई गई. इसमे दालचंद इलाके में कथित रूप से सांप्रदायिक द्वेष भड़काने वाले भाषण देने का आरोप लगाया गया.

वरुण गांधी अपने ऊपर लगे आरोपों का खंडन करते रहे हैं. उन्होंने कहा कि पहले वाले मामले में वो अपराधी तत्वों की बात कर रहे थे.

वरुण गांधी के अनुसार दूसरे मामले में टेपों से छेड़छाड़ की गई थी. बाद में चुनाव आयोग के निर्देश पर उन पर केस दर्ज किए गए थे.

वरुण गांधी ने बाद में कोर्ट के सामने समर्पण कर दिया था और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था.

एनएसए

Image caption अपने कथित भाषण के कारण वरुण गाँधी को कुछ दिन जेल में भी बिताने पड़े थे

बहुजन समाज पार्टी की तत्कालीन सरकार ने वरुण गांधी पर एनएसए (राष्ट्रीय सुरक्षा ऐक्ट) लगा दिया था और उन्हें एटा जेल भेज दिया गया था.

मई 2009 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एनएसए हटा लिया गया था और जेल में 19 दिन रहने के बाद उन्हें ज़मानत मिल गई.

वरुण गांधी ने पीलीभीत संसदीय सीट का चुनाव भी जीत लिया था.

अभियोजन पक्ष ने इस मामले में 51 गवाह पेश किए लेकिन वरुण गांधी के ख़िलाफ़ कोई बयान या सबूत पेश नहीं किया जा सका.

इस मामले की जांच उत्तर प्रदेश पुलिस कर रही थी.

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