भारत का विकास दर एक दशक में सबसे नीचे

अर्थव्यवस्था
Image caption पिछले सालों में चीन और भारत की अर्थव्यवस्थाएं विश्व की सबसे मज़बूत अर्थव्यवस्थाएं बताई गई हैं.

भारत के सांख्यिकी एवं योजना कार्यान्वयन मंत्रालय के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक़ वित्त वर्ष 2012-13 में अर्थव्यवस्था में पांच प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है.

ये पिछले लगभग दशक भर में हुई सबसे कम बढ़ोतरी है.

साल की अंतिम तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद में इज़ाफे की दर और घट कर 4.8 फ़ीसदी पर पहुँच गई.

समाचार एजेंसी एएफ़पी का कहना है विकास दर में आई कमी 'लो बिज़नेस कांफ़िडेंस' या निम्न कारोबारी भरोसा, निवेश में कमी, महंगाई और पश्चिमी मुल्कों से निर्यात की घटी मांग की वजह से है.

भारत में पिछले साल तक विकास की दर नौ के आसपास रही थी, लेकिन पिछले कुछ माह में इसमें तेज़ी से गिरावट दर्ज की गई.

हालांकि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उम्मीद जताई है कि हालात बेहतर होंगे.

सर्वेक्षण

समाचार एजेंसी रॉयटर्स का कहना है कि ये आंकड़े उसके ज़रिए कराए गए सर्वे से मेल खाते हैं. सर्वे में विशेषज्ञों ने इसी के आसपास के आंकड़ो की बात कही थी.

औद्योगिक उत्पादन के क्षेत्र में बढ़ोतरी की दर और ख़राब रही. इस क्षेत्र में पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 2.6 फ़ीसदी का इजा़फ़ा हुआ था. जबकि कृषि में ये आंकड़ा 1.4 फ़ीसदी था.

अर्थव्यवस्था में आए धीमेपन की वजह कृषि, औद्योगिक उत्पादन और खनन के क्षेत्र में हुई कम या नकारामत्मक विकास बताए जा रहे हैं.

खनन क्षेत्र पिछले दो सालों के भीतर ढेर सारे विवादों में घिरा रहा है और आबंटन में हुए घोटालों, पर्यावरण और पुनर्वासन की समस्याओं को लेकर कई बड़े प्रोजेक्ट या तो बंद हो गए हैं या शुरू ही नहीं हो पाए हैं.

कोशिश

Image caption बढ़ी मंहगाई दर भी मांग में कमी की वजह बताई जाती है जिसका असर विकास दर पर हुआ है.

हालांकि पिछले दिनों सरकार ने अर्थव्यवस्था को लेकर कई सकारात्मक संकेत देने की कोशिश की है लेकिन कई अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इसका असर मांग पर नहीं पड़ेगा.

रेटिंग एजेंसी स्टैंडर्स एंड पुअर्स ने हाल में ही कहा है कि भारत की रेटिंग कम हो सकती है.

इसका असर सरकार की क़र्ज़ लेने की क्षमता पर पडे़गा यानी कर्ज़ महंगा हो जाएगा.

पिछले दिनों रिजर्व बैंक ने हालांकि ब्याज दरों में कमी की है लेकिन गवर्नर सुब्बा राव ने कह दिया है कि अब इसकी और गुंजाइश नहीं है.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस बात को स्वीकार किया. अपने विदेश दौरे के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा है कि देश की मौद्रिक नीति रिजर्व बैंक तय करता है और वे इसका सम्मान करते हैं.

उन्होंने उम्मीद जताई, "आने वाले महीनों में महंगाई पर काबू पा लिया जाएगा और फिर विकास को प्रोत्साहन देने वाली नीतियाँ आगे बढ़ पाएँगी."

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