सोशल मीडिया पर कहाँ है बीजेपी का निशाना

  • 12 जून 2013

भारतीय जनता पार्टी को हमेशा से टेक्नोलॉजी के प्रति सजग पार्टी के रुप में जाना जाता रहा है. ज़ाहिर है कि पार्टी ने इंटरनेट और सोशल मीडिया पर अपनी उपस्थिति को चिन्हित भी किया है.

पार्टी का अपना आईटी सेल है यानी सूचना प्रौद्योगिकी इकाई. जो पार्टी का डिजिटल काम देखती है.

फ़ेसबुक पर पार्टी का पन्ना है जिस पर इस समय (ख़बर लिखे जाने तक) नौ लाख 62 हज़ार से अधिक लाइक्स हैं. ट्विटर पर पार्टी सक्रिय है और फॉलोअर्स की संख्या 31 हज़ार से ऊपर है.

फ़ेसबुक पर पार्टी न केवल विभिन्न मुद्दों पर लोगों की राय आमंत्रित करती है बल्कि पार्टी से जुड़ी जानकारी भी देती है. क्विज़ आयोजित करती है और पार्टी का सदस्य बनने के लिए लोगों को प्रेरित भी करती है.

पार्टी ने पूर्व में खुदरा क्षेत्र में विदेशी निवेश जैसे मुद्दों पर फ़ेसबुक पर लाइव चैट्स भी आयोजित किए हैं और टाउन हॉल बैठकों की जानकारी भी मुहैया कराई है.

पार्टी के आला नेता ट्विटर पर सक्रिय हैं. चाहे वो सुषमा स्वराज़ हों या नरेंद्र मोदी. ट्विटर पर पार्टी के राज्यवार हैंडल्स भी हैं.

उधर वसुंधरा राजे और नरेंद्र मोदी जैसे नेताओं के पास मोबाइल पर लोगों को आकर्षित करने के लिए अपने निजी ऐप्स भी हैं जहां उनके कार्यक्रमों, सभाओं के बारे में पूरी जानकारी भी दी जाती है.

रणनीति

तो आखिर पार्टी की रणनीति क्या है सोशल मीडिया के लिए.

पार्टी की डिजिटल इकाई के प्रमुख अरविंद गुप्ता कहते हैं, ‘‘भारत का युवा वर्ग इंटरनेट पर है. जो आँकड़े हैं वो कहते हैं कि भारत के लोग इंटरनेट पर लंबा समय बिता रहे हैं. पार्टी की रणनीति सिर्फ सोशल मीडिया की नहीं बल्कि समग्रता में है. हमें अपनी बात, विचारधारा और नीतियों को जनता तक पहुंचाना है.’’

लेकिन वो तो नेता पहुंचाते ही हैं मीडिया के ज़रिए. अरविंद स्पष्ट करते हैं, ‘‘ कई बार कुछ प्रेस कांफ्रेंस अगर मीडिया नहीं भी दिखाती है तो उसे हम यूट्यूब, फ़ेसबुक और वेबसाइट पर डालते हैं. बीजेपी एस्पिरेशन की पार्टी है. राजनीतिक बहस बढ़ाते हैं हम अपने सोशल मीडिया पर.’’

पार्टी के सोशल मीडिया का काम देखते हैं नवरंग एसबी. नवरंग सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री में काम कर चुके हैं लेकिन राजनीति में रुचि पार्टी में खींच लाई.

नवरंग अपने मोबाइल पर फ़ेसबुक चेक करते हुए बताते हैं, ‘‘कई बार लोग टिप्पणियां करते हैं. शिकायतें भी करते हैं सुझाव देते हैं. हम कई बार उनका जवाब देते है. कई बार नहीं देते जवाब लेकिन जो कहा जाता है फ़ेसबुक पर या ट्विटर पर हम उस पर कड़ी नज़र रखते हैं. इससे एक तबके के बारे में पता चलता है कि वो पार्टी से क्या चाहता है.’’

लेकिन लोगों को कैसे जोड़ती है पार्टी?

नवरंग का मंत्र साफ है.‘‘ जब तक ऑनलाइन को ऑफलाइन से नहीं जोड़ा जाएगा ये संभव नहीं हो सकता है. हमने ऑनलाइन मेंबरशिप शुरू किया था. ताकि लोग वहीं पैसा दे सकें. हमने ऑनलाइन डोनेशन की व्यवस्था की है. फ़ेसबुक पर हम क्विज़ आयोजित करते हैं. सवाल पूछते हैं पार्टी से जुड़ा. सही जवाब देने वालों को पार्टी कार्यालय में बुला कर सम्मानित करते हैं.’’

हालांकि चुनाव पर सोशल मीडिया के असर को लेकर पार्टी की राय यही है कि इसे वैकल्पिक मीडिया के साथ जोड़कर देखा जाना चाहिए क्योंकि युवा वर्ग को अगर जोड़ा जा सकता है तो उसके लिए सोशल मीडिया सबसे बड़ा माध्यम है.

कांग्रेस और छोटे दलों की तुलना में बीजेपी का सोशल मीडिया काफी व्यवस्थित है लेकिन कांग्रेस जैसे दल अनौपचारिक पन्नों के ज़रिए बीजेपी के सोशल मीडिया प्रचार का सामना कर रहे हैं. साथ ही आम आदमी पार्टी (आप) जैसा दल सोशल मीडिया का इस्तेमाल बहुत अलग तरीके से कर रहा है. ऐसे में बीजेपी के सामने चुनौती होगी कि वो आप और कांग्रेस की रणनीति का सामना कैसे करता है?

आपने मंगलवार को पढ़ा था कांग्रेस की सोशल मीडिया रणनीति के बारे में. आप कल यानी गुरुवार को आम आदमी पार्टी के सोशल मीडिया के बारे में पढ़ सकते हैं.

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