लम्हें 'शूट' कर लें या चाहें तो 'फ़्रेम' बना लें

अपराध की दुनिया में इन शब्दों का इस्तेमाल जिन अर्थों में होता है उससे बिल्कुल उलट यहां इन शब्दों का ज़िक्र हो रहा है बेहद कलात्मक अर्थ में.

एक ऐसा पेशा जिसमें 'फ़्रेम' और 'शूट' रंग भरते हैं किसी की लिखी कहानी में और इन्हें भरने वाला कलाकार है कैमरापर्सन.

दिल्ली के आदेश शर्मा पिछले दो दशक से भी ज़्यादा समय से कैमरे के पीछे रह कर काम करते आ रहे हैं

अब तक ढेरों टीवी सीरियल, लाइफ़ स्टाइल सीरीज़, लघु फ़िल्मो, विज्ञापनों और समाचार चैनल के लिए काम किया है.

प्रशिक्षण

ख़ुद दिल्ली के एक संस्थान से प्रशिक्षण हासिल करने वाले आदेश मानते हैं कि ट्रेनिंग की ज़रूरत पड़ती है तकनीकी जानकारी के लिए.

आदेश कहते हैं, "ख़ूबसूरती वाक़ई आपके देखने के नज़रिए पर निर्भर करती है लेकिन कैमरा के साथ काम करने के लिए तकनीकी बातें जानना समझना ज़रूरी है क्योंकि जब आप सेट पर होते हैं तो उसी भाषा का इस्तेमाल होता है."

उन्होंने कहा, "अब आपको पता ही ना हो कि क्लोज़ अप और मिड क्लोज़ में कैमरा कहां होगा तो काम कैसे करेंगे. सीखना ज़रूरी है भले ही इंडस्ट्री से या किसी संस्थान से."

चुनौतियां

एक कैमरा पर्सन के तौर पर सबसे बड़ी चुनौती की बात करते हुए आदेश कहते हैं, ''किसी भी प्रोजेक्ट में जब आप एक निर्देशक के साथ काम करते हैं तो उसका अपना नज़रिया और सोच होती है."

वह आगे बताते हैं, "एक कैमरापर्सन के तौर पर आपकी अपनी सीमाएं होती हैं जिन्हे समझाना कई बार मुश्किल हो जाता है. दूसरी बात मैं कहूंगा कि अपने काम में आप कितनी ज़्यादा कलात्मकता दिखा सकते हैं."

Image caption आदेश कहते हैं कि एक कैमरापर्सन की कलात्मकता ही उसकी सबसे बड़ी ताक़त है.

आदेश के अनुसार, "वो बड़ी बात है. लाइटिंग एक बहुत बड़ी चुनौती के तौर पर आती है जब हमें ख़ूबसूरत फ्रेम निकालने हों क्योंकि रोशनी आपके दृश्य की पूरी सूरत बदल कर रख देती है.''

संभावनाएं

कैमरा उठाने वाले किसी भी शख़्स के लिए क्या काम की संभावनाएं मौजूद हैं

इस सवाल के जवाब में आदेश कहते हैं, ''कुछ बातें आपके अंदर पहले से मौजूद होती हैं औऱ कुछ सीखी जा सकती हैं. काम कितना मिलेगा और कितना कर पाएंगे ये आपकी अपनी क्षमता पर है."

उन्होंने कहा, "ये कोई नौ से पांच की नौकरी तो है नहीं. कोई आपको सिफ़ारिश से कहीं पहुंचा भी दे लेकिन कैमरा तो आपको ही चलाना है. अच्छे से काम आता हो तो धीरे-धीरे काम आने लगता है.

वह बताते हैं, "अब तो इतने माध्यम हैं- समाचार चैनल, विज्ञापन एजेंसी, प्रोडक्शन हाउस, मीडिया कंपनियां.काम की कोई कमी नहीं बस लगे रहने के लिए तैयार रहिए.''

आदेश शर्मा फिलहाल दिल्ली में अपनी प्रोडक्शन कंपनी चलाते हैं और डिरेक्टर ऑफ़ फ़ोटोग्रफ़ी के तौर पर काम कर रहे हैं.

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