सोशल मीडिया: क्या है क्षेत्रीय पार्टियों की रणनीति

  • 14 जून 2013

भारत में अगर बड़ी पार्टियों से इतर छोटे क्षेत्रीय दलों की बात करें तो कुछ पार्टियां सोशल मीडिया पर मौजूद नहीं हैं जबकि कुछ पार्टियों की वेबसाइट्स तो हैं लेकिन गतिविधि बहुत कम.

हालांकि कुछ पार्टियों ने अपनी वेबसाइट बनाई हैं और उस पर काफी जानकारी उपलब्ध कराई है लेकिन डिजिटल होते भारत में ये जानकारियां काफ़ी कम लगती है.

अगर डिजिटल और सोशल मीडिया पर सक्रिय छोटे राजनीतिक दलों की बात करें तो समाजवादी पार्टी, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम और तृणमूल कांग्रेस सबसे व्यवस्थित और संगठित दल के रुप में दिखते हैं .

द्रविड़ मुनेत्र कड़गम

द्रविड़ मुनेत्र कड़गम की न केवल अपनी वेबसाइट है बल्कि वो फेसबुक और ट्विटर पर भी काफ़ी सक्रिय है. दक्षिण का यह दल फिलहाल तो विपक्ष में है इसलिए सोशल मीडिया पर उसकी सक्रियता के कई मायने लगाए जा सकते हैं.

द्रमुक की वेबसाइट आकर्षक है. आधिकारिक वेबसाइट पर जाते ही ये ट्विटर और फेसबुक पर पार्टी के पन्नों तक आपको ले जाता है. पार्टी के फेसबुक पन्ने को आठ हज़ार से अधिक लाइक्स मिले हैं जबकि ट्विटर पर पार्टी @arivalayam नाम से अपने 1300 से अधिक फॉलोअर्स के लिए ट्वीट करती है. पार्टी की फेसबुक पर पोस्टिंग तमिल में हैं लेकिन काफी रेगुलर पोस्टिंग्स की जाती हैं.

तृणमूल कांग्रेस

पार्टी की नेता ममता बनर्जी को चुनाव के दौरान युवा लोगों से काफी समर्थन मिला था. पार्टी ने उसी समय टीवी चैनलों की ताकत को समझा था और अब सोशल मीडिया को भी समझती दिख रही है. पार्टी ने ट्विटर, फेसबुक और यूट्यूब पर उपस्थिति दर्ज कर रखी है.

फेसबुक पर पार्टी रेगुलर पोस्टिंग करती है और सरकार से जुड़े कार्यक्रमों की जानकारी देती है. सात हज़ार लाइक्स के साथ पार्टी का पन्ना बहुत लोकप्रिय तो नहीं दिखता लेकिन आने वाले समय में इसकी पहुंच बढ़ सकती है.

ट्विटर पर पार्टी के तीन हज़ार फॉलोअर हैं और पार्टी @aitmc के नाम से ट्वीट करती हैं जिसमें तस्वीरें, राज्य सरकार के फैसले और अन्य जानकारियां मुहैया कराई जाती है.

पार्टी का यूट्यूब चैनल भी है और हां तृणमूल कांग्रेस ऑरकुट पर भी मौजूद है. यानी कि डिजीटल फुटप्रिंट में तृणमूल दूसरों से आगे लगती है.

समाजवादी पार्टी

समाजवादी पार्टी की सोशल मीडिया में पहुंच को उसके युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से जोड़कर देखा जा सकता है.

तभी पार्टी के फेसबुक पन्ने पर तस्वीर भी मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की ही लगी हुई है. पार्टी के फेसबुक पन्ने पर 41 हज़ार से अधिक लाइक्स हैं. पार्टी ने पिछले दिनों लैपटॉप देने की जो स्कीम बनाई थी उसका जम कर प्रचार-प्रसार फेसबुक पर किया गया.

पार्टी के पन्ने पर न केवल सरकारी कार्यक्रमों बल्कि सरकारी नौकरियों की सूचनाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं. पार्टी की अपनी वेबसाइट भी है जिसमें पार्टी का संविधान और सांसदों के बारे में जानकारियां हैं. हालांकि पार्टी का कोई ट्विटर हैंडल अभी नहीं है.

भाकपा और माकपा

भारत के दो वामपंथी दल - भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की सोशल मीडिया और डिजिटल दुनिया में पहुंच अलग-अलग तरह की है. भाकपा और माकपा दोनों की अपनी-अपनी वेबसाइटें हैं जिस पर वो पार्टी से जुड़ी ताज़ा गतिविधियां रखते हैं. लेकिन सोशल मीडिया पर स्थिति काफी भिन्न है.

माकपा का फेसबुक पर कोई पन्ना नहीं है हालांकि पार्टी ने अपनी वेबसाइट पर एक लिंक दिया है फेसबुक का जो संघर्ष संदेश जत्थे का है. यह पन्ना आंदोलनों से जुड़ा है लेकिन यह पार्टी के बारे में बहुत अधिक जानकारी नहीं देता.

दूसरी तरफ भाकपा फेसबुक पर तो है ही उसकी वेबसाइट भी व्यवस्थित दिखती है किसी न्यूज़ वेबसाइट की तरह. पार्टी के फेसबुक पन्ने पर चार हज़ार से अधिक लाइक्स हैं और पार्टी राजनीति से इतर अन्य मुद्दों पर भी पोस्ट करती है. भूख, गरीबी और बेरोज़गारी से जुड़ी रिपोर्टें पार्टी शेयर भी करती है फेसबुक पर.

जनता दल यूनाइटेड

उत्तर भारत में ही अधिक सक्रिय जनता दल यूनाइटेड का अपना ऑनलाइन पन्ना तो है लेकिन फेसबुक पर आधिकारिक कोई पन्ना जनता दल यू के नाम से नहीं है. पार्टी की सरकार बिहार में है और बिहार के मुख्यमंत्री के नाम से भी एक वेबसाइट है.

फेसबुक पर नीतीश कुमार के समर्थन में कई पन्ने हैं लेकिन कोई भी पन्ना आधिकारिक नहीं है. बिहार के मुख्यमंत्री की वेबसाइट पर मूल रुप से प्रेस रिलीज़ और मुख्यमंत्री की घोषणाएं अपलोड की जा रही हैं.

नेशनल कांफ्रेंस

अगर जम्मू कश्मीर की नेशनल कांफ्रेंस की बात करें तो इस पार्टी की वेबसाइट तो है लेकिन फेसबुक-ट्विटर पर उपस्थिति नहीं है. हालांकि पार्टी के मुख्यमंत्री ट्विटर पर किसी स्टार से कम नहीं हैं. उमर अब्दुल्ला को फॉलो करने वालों की संख्या दो लाख 80 हज़ार से अधिक है.

@abdullah_omar के हैंडल से ट्वीट करने वाले उमर ट्विटर पर न केवल सरकारी कामकाज से जुड़ी बल्कि निजी टिप्पणियां भी करते हैं और लोगों के सवालों के जवाब भी देते हैं. इतना ही नहीं वो तस्वीरें और वीडियो भी लगातार अपलोड करते हैं.

इसके साथ ही सोशल मीडिया और राजनीतिक दलों की सीरिज़ यहीं समाप्त होती है. कांग्रेस पार्टी की रणनीति, आम आदमी पार्टी का सोशल मीडिया और बीजेपी की ज़बर्दस्त सोशल मीडिया पहुंच के बारे में पढें.

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