जल्द आ रहा है बिल्डरों पर लगाम कसने वाला क़ानून

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने रीयल एस्टेट (रेगुलेशन और डेवलेपमेंट) विधेयक 2013 का प्रस्ताव मंजूरी कर लिया है. अब इसे संसद के मानसून सत्र में पेश किया जाएगा. अगर ये क़ानून बना तो बिल्डिंग प्रोजेक्ट के विज्ञापन से लेकर फ्लैट की चाभी आपको सौंपे जाने तक सरकार सभी चरणों पर नज़र रखेगी.

अगर संसद इसे मौजूदा स्वरूप में मंज़ूरी दे देती है तो इसके बाद आशियाना पाने की जद्दोजहद में जुटे लाखों लोगों को बिल्डरों की मनमानी से निजात मिल जाएगी.

विज्ञापन में ग़लत जानकारी देने वाले बिल्डरों के लिए क़ानून में सज़ा का प्रावधान किया गया है.

किसी बिल्डर को अपने प्रोजेक्ट से संबंधित विज्ञापन में ग़लत जानकारी देने पर प्रोजक्ट की कुल क़ीमत का क़रीब दस फ़ीसदी तक जुर्माना वसूला जा सकता है. अगर बिल्डर ऐसा बार-बार करता है, तो उसे तीन साल तक जेल की सज़ा हो सकती है.

पूरी करें औपचारिकता

क़ानून के मुताबिक अब किसी बिल्डर को किसी परियोजना पर काम शुरू करने की इजाजत तभी मिलेगी, जब वो सभी औपचारिकताएं पूरी कर लेगा. उसे परियोजना से जुड़े काग़ज़ात भी सक्षम अधिकारी के पास जमा कराने होंगे.

बिल्डर को बताना होगा कि उसकी परियोजना कब शुरू होगी और कब पूरी होगी. इसके अलावा उसे प्रमोटरों के परिचय पत्र, लेआउट प्लान, ज़मीन की स्थिति, कारपेट एरिया और बुक हुए अपार्टमेंट की तादाद जैसी बातें भी बतानी होंगी.

प्रोजेक्ट को एक बार मंज़ूरी मिलने के बाद बिल्डर उसमें कोई बदलाव नहीं कर पाएगा. देरी होने पर बिल्डर को फ्लैट के खरीदार को जुर्माना देना होगा. अगर खरीदार चाहे तो वह बिल्डर से अपना पैसा वापस भी मांग सकता है.

काम शुरू करने से पहले बिल्डर को ये सूचनाएं अपनी वेबसाइट पर डालनी होंगी.

इसके अलावा बिल्डरों के लिए यह ज़रूरी होगा कि वो कारपेट एरिया की घोषणा करें. अब तक बिल्डर सुपर एरिया के आधार पर ही उपभोक्ता से क़ीमत वसूला करते थे. सरकार का मानना है कि ये क़ानून अमल में आने के बाद घर खरीदने वालों को फ़ायदा होगा.

अलग बैंक ख़ाता

Image caption रीयल एस्टेट (रेगुलेशन और डेवलेपमेंट) बिल 2013 को संसद के मानसून सत्र में पेश किया जा सकता है

बिल्डरों के लिए यह प्रावधान भी है कि वो किसी प्रोजक्ट के लिए मिले धन का 70 फीसदी हिस्सा एक अलग बैंक खाते में रखेंगे. ऐसा इसलिए किया गया है, ताकि बिल्डर किसी प्रोजक्ट के लिए मिला पैसा किसी और प्रोजक्ट पर खर्च न कर पाएं.

इसके अलावा विधेयक में एजेंटों को भी रेगुलेटरी अथॉरिटी के पास रजिस्ट्रेशन कराने के लिए कहने का प्रावधान है.

इस क़ानून के पालन के लिए राज्यों में संयुक्त सचिव के स्तर के अफसर की तैनाती की जाएगी और उसे अथॉरिटी की तरफ से नियुक्त किया जाएगा.

इस विधेयक में रीयल एस्टेट अपील ट्रिब्यूनल के गठन का भी प्रावधान है. यह ट्रिब्यूनल रेगुलेटरी अथॉरिटी या फैसला देने वाले अफसरों के आदेशों, फ़ैसलों या निर्देशों पर सुनवाई केरगा.

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