अविरल गंगा के लिये आमरण अनशन

गंगा और उसकी सहायक नदियों पर बन रहे बांधों के विरोध में मशहूर पर्यावरणवादी जी डी अग्रवाल ने एक बार फिर आर-पार की लड़ाई छेड़ दी है.

जी डी अग्रवाल हरिद्वार के मातसदन आश्रम में आमरण अनशन पर हैं और उनकी मांग है कि गंगा, भागीरथी,मंदाकिनी और अलकनंदा पर सभी निर्माणाधीन और प्रस्तावित बांधों पर तत्काल रोक लगा दी जाए.

गौरतलब है कि कुछ वर्ष पहले अग्रवाल के विरोध के बाद ही उत्तरकाशी इलाके की तीन बड़ी परियोजनाओं पर सरकार ने पाबंदी लगा दी थी जिनपर 80 करोड़ रू खर्च हो चुके थे.

78 साल के प्रोफेसर अग्रवाल आईआईटी कानपुर में सिविल और पर्यावरण इंजीनियरिंग विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष रहे हैं.

देखिए: गंगा तोहार हाल कैसा

अविरल बहे गंगा

इन दिनों हरिद्वार के मातसदन आश्रम में आमरण अनशन पर बैठे जी डी अग्रवाल एक लंबे समय से उत्तराखंड में गंगा को अवरिल बहने देने की मांग करते रहे हैं.

ये वही आश्रम है जहां दो साल पहले स्वामी निगमानंद ने गंगा में अवैध खनन के विरोध में आमरण अनशन करते हुए अपनी जान दे दी थी.

जी डी अग्रवाल कहते हैं, "इस हिमालयी प्रदेश में गंगा का गला घोंटा जा रहा है.टिहरी में बांध बनाकर विनाशकारी गलती की जा चुकी है लेकिन उसके बाद भी सरकार सभी नदियों को बैराज बनाकर बांध रही है."

गौरतलब है कि उत्तराखंड की 14 नदी घाटियों में 220 से ज्यादा छोटी बड़ी परियोजनाएं बन रही हैं.इस वजह से नदियों को 10 से 15 किमी तक सुरंग में डाला जा रहा है.

नदिंयों का अस्तित्व संकट में

अग्रवाल कहते हैं कि इन बांधों के कारण नदियों की अविरलता पर खतरा मंढरा रहा है.इसके अलावा नदियों में लगातार खनन से भी नदियों के अस्तित्व पर संकट है.

गंगा यमुना की स्वच्छता और अवरिलता को लेकर विरोध और अनशन करने वाले जी डी अग्रवाल अकेले नहीं हैं बल्कि उमा भारती,स्वामी रामदेव और स्वामी शिवानंद और राजेंद्र सिंह जैसे पर्यावरणवादी भी उनका समर्थन करते रहे हैं.

मूल रूप से ये विरोध तीन बातों को लेकर है –बड़े पैमाने पर विस्थापन,पारिस्थितिकी पर संकट और धार्मिक आस्था.

लेकिन स्थानीय लोग और कई प्रगतिशील लोग भी इस मत के विरोध में हैं.पिछले वर्ष इसी विवाद की वजह से उत्तराखंड के श्रीनगर में जी डी अग्रवाल को काले झंडे दिखाए गये थे और उत्तरकाशी से भी उन्हें अपना आंदोलन समेटना पड़ा था.

ऊर्जा संकट का हल

उत्तरकाशी के मूल निवासी मशहूर लेखक लीलाधर जगूड़ी कहते हैं कि अगर बांध बनने से प्रदेश में ऊर्जा का संकट हल होगा और विकास का लाभ होगा तो गंगा यमुना सुरंग में बहे या अपने प्रवाह में उससे क्या फर्क पड़ता है.

गंगा सिर्फ कूड़ा और अस्थियां बहाने के लिये नहीं बल्कि मनुष्य के उद्धार के लिये ही धरती पर आई है.

जी डी अग्रवाल के अनशन पर अभी तक सरकार की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है .

ये मामला स्थानीय सरकार के साथ साथ केंद्र सरकार का भी है क्योंकि केंद्र में इसीलिए गंगा प्राधिकरण बनाया गया है और सुप्रीम कोर्ट में भी जनहित याचिका पर सुनवाई चल रही है.

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