विंबलडन में सिक्का उछालेंगी यूपी की पिंकी

ऑस्कर विजेता डॉक्यूमेंटरी 'स्माइल पिंकी' से चर्चा में आई पिंकी सोनकर को विंबलडन पुरूष एकल प्रतियोगिता के फ़ाइनल मुकाबले में सिक्का उछालने के लिए चुना गया है.

ग्यारह साल की पिंकी सोनकर के होठ और तालू जन्म से ही कटे थे, जिसका साल 2007 में सर्जरी से इलाज किया गया था.

पिंकी पर ही आधारित कर बनाई गई डॉक्यूमेंटरी 'स्माइल पिंकी' को साल 2009 में ऑस्कर पुरस्कार दिया गया.

मिर्ज़ापुर के डबई गांव में रहने वाली पिंकी अब क्लास-3 में पढ़ती हैं और लंदन में होने वाली विबंलडन प्रतियोगिता में 'स्माइल ट्रेन' संस्था का प्रतिनिधित्व करेंगी. गैरसरकारी संस्था 'स्माइल ट्रेन' कटे होठ और तालू से जूझ रहे बच्चों के उपचार में मदद करती है.

पिंकी के पिता राजेंद्र सोनकर ने कहा कि पिंकी इसे सुनकर काफ़ी उत्साहित है.

बीबीसी से बातचीत में पिंकी के पिता ने कहा, ''हम लोग ये जानकर बहुत खुश हैं कि पिंकी को विदेश जाने का मौका मिल रहा है. गांव के लोग भी बहुत खुश है.''

ऑस्कर में गई थी पिंकी

गरीब परिवार से ताल्लुख़ रखने वाली पिंकी की ये दूसरी विदेश यात्रा होगी. इससे पहले वो साल 2009 में ऑस्कर समारोह में भाग लेने लॉस एंजिलिस गईं थी.

पिंकी के साथ उनके पिता और उनका इलाज करने वाले डॉक्टर सुबोध कुमार सिंह भी लंदन जाएंगे.

पिंकी का केस याद करते हुए डॉक्टर सुबोध सिंह ने बीबीसी को बताया, ''पिंकी उस घर में एक भाग्यशाली लड़की है. लेकिन एक समय ऐसा था कि उसे भाग्यहीन समझा जाता था, लोग उसे हिकारत की दृष्टि से देखते थे, उसे कोई अपने साथ खिलाता नहीं था. मगर अब उसी गांव में वो किस्मत की धनी मानी जाती है और लोग उसकी तरफ़ उम्मीद के साथ देखते हैं.''

पिंकी टेनिस के बारे में ज्यादा नहीं जानती है, लेकिन उनको सिक्का उछालने का जो काम सौपा गया है उसके लिए वो जमकर अभ्यास कर रही हैं.

पिंकी की लंदन यात्रा

विंबलडन से पहले उन्हें ब्रिटेन के मैंचेस्टर में स्थित एक जानी मानी चॉकलेट फैक्टरी में भी जाना है, जहां वो ‘स्माइल ट्रेन’ नाम से बनी चॉकलेट का उद्घाटन करेंगी.

Image caption पिंकी के होठ और तालू बचपन से ही कटे थे जिसे साल 2007 में सर्जरी से ठीक किया गया.

'स्माइल ट्रेन' के दक्षिण एशिया क्षेत्र के निदेशक, सतीश कालरा ने बीबीसी को बताया, ''पिंकी विंबलडन पुरूष एकल के फाइनल में कॉइन टॉस करेंगी. टेनिस को जानने वाले लोग जानते हैं कि सर्विस टॉस कितना अहम होता है. इसका सीधा असर हार जीत पर भी पड़ सकता है.''

भारत के कई इलाकों में कटे होठ और तालू की समस्या आम है. इसके उपचार का एकमात्र रास्ता सर्जरी ही है जिसमें 10,000 से 20,000 रूपयों तक का खर्च आता है.

ऐसे में गरीब लोगों के पास सर्जरी के लिए धन जुटाने या फिर मदद का इंतज़ार करने का ही रास्ता बचता है.

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