उत्तराखंड में बारिश: 30 की मौत, कई लापता

उत्तराखंड में बारिश
Image caption बीबीसी के एक पाठक की भेजी इस तस्वीर में भयंकर बारिश का दृश्य स्पष्ट दिख रहा है

उत्तराखंड में तीन दिनों से जारी मूसलाधार बारिश से अब तक तीस लोगों की मौत हो चुकी है और कई लापता हैं.

चार धाम यात्रा के रास्ते बंद हो जाने से क़रीब 30 हज़ार से अधिक यात्री जगह-जगह फँसे हुए हैं.

केदारनाथ के रामबाण इलाक़े में छह लाशें बरामद हुई हैं और 40 के क़रीब लोग लापता हैं. देहरादून में तीन लोग मलबे में दब गए हैं, उत्तरकाशी में कई मकान और पुल ढह गए हैं.

उधर अल्मोड़ा में भारी बरसात के बीच एक बस खाई में गिर गई है जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई है. रुड़की में भी तीन लोगों के बह जाने की ख़बर है.

चार धाम

मुख्यमंत्री सचिवालय में आपदा प्रबंधन पर नज़र रख रहे अमित नेगी ने बीबीसी को बताया कि विभिन्न हादसों में मारे जाने वालों की संख्या 30 तक पहुंच गई है. इनमें से पांच लोग कुमाऊँ और 25 गढ़वाल मंडल में मारे गए हैं.

आपदा की स्थिति में कार्रवाई पर नज़र रखने वाले विभाग के निदेशक पीयूष रौतेला ने बीबीसी को बताया कि केदारनाथ जाने वाले पैदल रास्ते के इलाक़े में हालात बेहद गंभीर हैं. कई जगहों से संपर्क पूरी तरह कटा हुआ है और कोई सूचना नहीं मिल रही है. आशंका है कि वहां मरने वालों की संख्या काफी बढ़ सकती है.

गढ़वाल मंडल में गंगोत्री, यमुनोत्री, बद्रीनाथ और केदारनाथ जाने वाले सभी रास्ते कई जगहों से कट गए हैं और आवाजाही पूरी तरह से ठप हो गई है.

Image caption उत्तराखंड में भयानक बारिश के बाद अर्द्धसैनिक बलों को राहत कार्यों में लगाया गया है

पहाड़ में जगह-जगह भूस्खलन हो रहा है और मकान और सड़कों पर मलबा आ रहा है. प्रशासन ने लोगों से इस मौसम में उत्तराखंड न आने की अपील की है.

क्रिकेट खिलाड़ी हरभजन सिंह भी अपने परिवार के साथ जोशीमठ में फँसे हुए हैं. उन्हें हेमकुंट साहिब जाना था लेकिन रास्ता बंद होने और पुल टूट जाने के कारण वो नहीं जा पाए हैं.

पर्वतीय इलाकों में गंगा, भागीरथी, अलकनंदा नदियां उफान पर हैं और हरिद्वार और ऋषिकेश में गंगा ख़तरे के निशान से एक-एक मीटर ऊपर बह रही है.

उत्तरकाशी में स्थितियां पिछले साल की आपदा की तरह ही नज़र आ रही हैं.

जलस्तर

स्थानीय पत्रकार बलबीर परमार के अनुसार असी गंगा और भागीरथी का जलस्तर काफी बढ़ गया है, जिसके चलते तटों की सुरक्षा में लगी मशीनें और अन्य उपकरण के साथ दर्जन भर मकान बाढ़ मे समा गए हैं.

कई पुलों का नदी ने कटान करना शुरू कर दिया है वहीं कई स्थानों पर सुरक्षा दीवार बह गई है. गंगोत्री राजमार्ग कई जगह से धंस गया है.

धनारी और मातली बन्दरकोट में कई गांवों का संपर्क टूट गया है. प्रशासन की ओर से संवेदनशील स्थानों को खाली करने के निर्देश दिए गए हैं.

जनजीवन

आँकड़े बताते हैं कि पहाड़ के साथ-साथ देहरादून में भी असाधारण बारिश का ऐसा मंज़र पहले कभी देखने को नहीं मिला है. उत्तराखंड के मौसम केंद्र के निदेशक आनन्द शर्मा के अनुसार पिछले चार दिनों में यहाँ इतनी बारिश हो गई है जितनी दिल्ली और पूना को मिलाकर पूरे साल में मिलती है.

एक तरह से पूरे राज्य में जनजीवन पूरी तरह ठप हो गया है और लोग हैरान-परेशान और आशंकित हैं.

Image caption कई जगहों से संपर्क पूरी तरह कटा हुआ है

संकट ये है कि हालात जल्द सुधरने के आसार कम नजर आ रहे हैं क्योंकि अगले 24 घंटे में भी मौसम विभाग ने भारी बरसात की चेतावनी दी है.

आपदा प्रबंधन मंत्री यशपाल आर्य के अनुसार सरकार राहत और बचाव कार्य के लिये 130 करोड़ रुपए जारी कर चुकी है. भारत-तिब्बत सीमा पुलिस यानी (आईटीबीपी) और सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की मदद से सड़कों को खोलने और फँसे हुए लोगों को निकालने का काम युद्धस्तर पर चल रहा है.

वाहन बहे

गोपेश्वर में स्थानीय पत्रकार नन्दन बिष्ट ने बीबीसी को बताया कि बद्रीनाथ के रास्ते में गोविंदघाट इलाके में 200 से अधिक वाहन बह गए हैं और एक निजी कंपनी का हेलीकॉप्टर भी अलकनंदा नदी में समा गया है.

बाढ़ और भूस्खलन की इस आपदा के सामने प्रशासन लाचार नजर आ रहा है और आपदा विभाग भी असमंजस, आशंका और अंदाजे से काम कर रहा है.

आईटीबीपी, बीआरओ और सेना की मदद ली जा रही है लेकिन कई इलाकों से संपर्क और सूचनाएं मिल ही नहीं मिल पा रही हैं. लिहाजा जान-माल की सही क्षति का अंदाजा लगाना मुश्किल हो रहा है.

अधिकारियों और मंत्रियों का कहना है कि मौसम खुलने के बाद ही इसका सही जायज़ा लिया जा सकेगा और इस बारे में कुछ पुष्ट तौर पर कहा जा सकेगा.

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