उत्तराखंड में बारिश: 'मौत के डर से कांपते हुए 14 घंटे कार में...'

उत्तराखंड में भारी बारिश और तबाही

उत्तराखंड में चौतरफा तबाही उन 40 हजार तीर्थयात्रियों पर भी कहर ढा रही है जो देश के कोने कोने से गंगोत्री,यमुनोत्री, बद्रीनाथ और केदारनाथ जैसे धर्मस्थलों की यात्रा करने आए थे.

रास्ते बंद हो जाने के कारण ये श्रद्धालु जगह जगह फँस गये हैं.

इन यात्रियों को चार धाम की पूजा अर्चना के बाद अच्छी यादों के साथ घर लौटना था. लेकिन अब उनकी सिर्फ़ यही प्रार्थना है कि वो किसी भी तरह जल्दी से जल्दी सही सलामत घर लौट जाएं.

हमने जोशीमठ के विवेक गेस्ट हाउस में ठहरे कुछ ऐसे ही तीर्थयात्रियों से उनकी आपबीती जानने की कोशिश की.

भारी बारिश के बीच

दिल्ली से आईं 42 साल की आशा महाजन चिंतित स्वर में कहती हैं, "16 जून की शाम से पूरी रात हमने कार में ही बिताई. ऊपर पहाड़ टूट रहे थे और नीचे गहरी खाई और नदी उफन रही थी. रास्ते में जाम लग गया. न आगे जा सकते थे और न पीछे. कभी भी कुछ भी हो सकता था. डर लगता था कि भारी बारिश के बीच कहीं पहाड़ से कोई पत्थर या मलबा न गिर जाए. भगवान की कृपा थी कि हम लोग सलामत हैं."

उन्होंने बताया, "हम लोग जोशीमठ से गोविंदघाट तक पहुंच गए थे लेकिन अचानक पता चला कि भूस्खलन से आगे का रास्ता बंद हो गया है. अब दिल्ली वापस आना चाह रहे हैं लेकिन कैसे लौटें. मेरी चार साल की बेटी की तबियत भी खराब हो गई है."

बद्रीनाथ के दर्शन

बरसात और भूस्खलन के बीच जोशीमठ में फंसे गुजरात के वडेला जिले के कडेन तालुका के 65 वर्षीय रमन भाई भी हैं.

आपबीती सुनाते हुए वह कहते हैं, "हम बद्रीनाथ के दर्शनों के लिए निकले थे. दर्शन की आस थी लेकिन अचानक बद्रीनाथ के रास्ते में तेज बरसात होने लगी और हमें बताया गया कि आगे रास्ता बंद है. हमें वापस लौटना पड़ा. दो दिन से हम जोशीमठ में हैं लेकिन अब यहीं फँस गए हैं. अब हम बद्रीनाथ के दर्शन नहीं कर पाएंगें. हम रास्ता खुलने का इंतजार कर रहे हैं."

वह कहते हैं, "हम लोगों के समूह में दस भाई बहन हैं. घर वालों से एक बार फोन पर बात हो गई थी. वे चिंतित हैं. हम भी परेशान हैं. कब रास्ता खुलेगा तो निकलेंगे."

'गोविंदघाट का बुरा हाल'

गुजरात के भरूच जिले से आए 55 साल के दिनेश भाई किशन भाई पटेल भी भारी बारिश और बाढ़ से हैरान परेशान हैं.

वह कहते हैं, "पहली बार पहाड़ों की यात्रा पर निकला हूँ लेकिन जोशीमठ में फँस गया हूँ. सोच-सोचकर दुख होता है कि बद्रीनाथ इतने पास है लेकिन जाने को मना किया गया है. पर क्या करें. जान रहेगी तो फिर आएंगे."

मुंबई से पत्नी और 17 साल की बेटी के साथ हेमकुंट आए सरदार त्रिलोचन सिंह ने बताया, "हम 14 लोग हैं. हमारे साथ बच्चे भी हैं. बहुत परेशानी हुई, जोशीमठ में दो दिन पहले आ गए थे. जैसे ही रास्ता थोड़ा सा खुला हम निकल आए. अब सुना पूरा रास्ता ही टूट गया. गोविंदघाट का तो बुरा हाल है. गाड़ियाँ बह गई थीं. दुकानें बह गई थीं. हमारे तो रोंगटे ही खड़े हो गए. किसी तरह बच गए हैं."

वह कहते हैं, "हां... सेना काफी मदद कर रही है और जगह-जगह लंगर लगाए गए हैं. देखिए, लोग कह रहे हैं कि शायद कल तक रास्ते खुल जाएंगे."

ये आपबीती उन यात्रियों की है जो किसी सुरक्षित ठिकाने पर पंहुचने में सफल रहे हैं लेकिन उन यात्रियों की दुर्दशा की कल्पना ही की जा सकती है जो बीच रास्ते में ही फँसे हुए होंगे.

उन्हें राहत पहुँचाना और सुरक्षित निकालना प्रशासन के लिये सबसे बड़ी चुनौती है.

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