बिहार: नीतीश को मिला कांग्रेस का सहारा

बिहार विधानसभा
Image caption भाजपा से गठबंधन टूटने के बाद जेडीयू सरकार ने विधानसभा में विश्वास मत हासिल कर लिया है.

बिहार में नीतीश कुमार ने विश्वास मत हासिल कर लिया है. उन्हें 126 विधायकों का समर्थन मिला. विश्वास मत के ख़िलाफ़ सिर्फ 24 मत पड़े क्योंकि 91 सदस्यों वाली भाजपा ने मुख्यमंत्री पर विश्वासघात का आरोप लगाते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया.

243 सदस्यों वाली बिहार विधानसभा में जद-यू को सरकार बचाने के लिए 122 सदस्यों की ज़रूरत थी. जद-यू के 117 विधायकों के साथ ही कांग्रेस के 4 विधायकों ने भी जद-यू के पक्ष में मतदान किया.

कांग्रेस के अलावा 4 निर्दलीय विधायकों और एक सीपीआई विधायक के समर्थन से नीतीश कुमार सदन में विश्वासमत हासिल करने में सफल रहे.

जद-यू से जुड़े विधानसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी ने मत विभाजन में हिस्सा नहीं लिया.

भाजपा विधायकों ने विश्वासमत प्रस्ताव का बहिष्कार किया. सदन में लोजपा के एक मात्र विधायक ज़ाकिर हुसैन ख़ान ने भी विश्वासमत प्रस्ताव के दौरान सदन का बहिष्कार किया.

नरेंद्र मोदी को भारतीय जनता पार्टी की चुनाव प्रचार समिति का प्रमुख बनाए जाने के बाद जनता दल यूनाइटेड ने एनडीए गठबंधन से अलग होने का फ़ैसला किया था.

छाया रहा 'नमोनिया'

बिहार विधानसभा अध्यक्ष की तरफ़ से सुबह सदन की कार्यवाही शुरू होने के साथ ही भाजपा विधायक नरेन्द्र मोदी ज़िन्दाबाद का नारा लगाने लगे.

भाजपा विधायकों की नारेबाजी पर पलटवार करते हुए नीतीश कुमार ने सदन में कहा, "आज इन लोगों ने अपनी मंशा नारे के रूप में साफ कर दी. इसी मंशा के कारण हमें गठबंधन से अलग होने को विवश होना पड़ा."

Image caption विधानसभा में नीतीश कुमार ने बहुमत हासिल कर लिया है.

नीतीश ने कहा कि "हमारा यही दर्द था कि बाहरी तत्व अब हम पर हावी हो रहा है. आरएसएस ने भी ज़ाहिर कर दिया है कि भाजपा हिन्दुत्व की राह पर ही चलेगी. यही हमारी चिंताएं थीं, जिनका निवारण सार्वजनिक रूप से नहीं करने पर अड़ी भाजपा का साथ हमें छोड़ना पड़ा."

नरेन्द्र मोदी पर अप्रत्यक्ष रूप से हमला करते हुए नीतीश ने भाजपा पर अधिनायकवाद थोपने का आरोप लगाया. नीतीश ने कहा, "हमारे ऊपर अधिनायकवाद थोपने की कोशिश की जा रही थी, जबकि विभाजनकारी धारा हमें क़तई मंज़ूर नहीं थी."

'..हमसे मगर हो न सका सौदा ज़मीर का'

नीतीश ने इशारों-इशारों में यह भी साफ कर दिया कि भाजपा चाहती थी कि जद-यू गठबंधन में रहे.

भाजपा पर शायराना कटाक्ष करते हुए नीतीश बोले, "आया तो बार-बार संदेशा अमीर का, हमसे मगर हो न सका सौदा ज़मीर का"

अपने भाषण में नीतीश ने दोनों दलों के बीच बढ़े वैमनस्य के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराया. नीतीश ने कहा कि वो अलग होने के तरीके पर भाजपा नेताओं से विचार-विमर्श करना चाहते थे, लेकिन भाजपा नेता उनसे मिलने नहीं आए.

मंगलवार को भाजपा के बिहार बंद के दौरान भाजपा और जद-यू के कार्यकर्ताओं के बीच झड़प की ज़िम्मेदारी भी नीतीश ने भाजपा के सिर डाल दी.

नीतीश ने कहा कि "शुरुआत उनकी (भाजपा) तरफ से हुई थी...हम राजनीतिक बातों का राजनीतिक उत्तर देंगे. कोई वैमनस्य नहीं रखेंगे."

नीतीश ने भाजपा के बिहार बंद के दिन भाजपा नेता नंदकिशोर यादव के बेटे के कार शोरूम के खुले होने पर चुटकी लेते हुए कहा, "नंद किशोर जी यहाँ होते तो मैं उनसे पूछता कि अपनी दुकान तो खुली रही, दूसरों की दुकान बंद कराने के लिए लाठी-डंडा चला रहे हैं."

नंदकिशोर यादव बने प्रतिपक्ष के नेता

भाजपा नेता नंदकिशोर यादव को आज राजद के अब्दुल बारी सिद्दकी की जगह सदन में प्रतिपक्ष का नेता चुन लिया गया. नंदकिशोर यादव ने बखिया उधेड़ने के अंदाज में नीतीश कुमार पर आक्षेपों की झड़ी लगा दी.

उन्होंने कहा कि "नीतीश जी ने दोहरे चरित्र के अवसरवादी और विश्वासघाती व्यक्ति की तरह उसी सहयोगी दल को छला है, जिस दल ने उन्हें केन्द्र में मंत्री और राज्य में मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुँचाया."

नंदकिशोर ने कहा कि "नीतीश कुमार को कांग्रेस से गठजोड़ महँगा पड़ेगा क्योंकि भ्रष्टाचार और महँगाई रूपी पाप जो कांग्रेस से जुड़ गया है, उस पाप का बोझ नीतीश को ले डूबेगा."

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