अब तक के घटनाक्रम पर एक नज़र

Image caption उत्तराखंड में आई बाढ़ और भूस्खलन ने पिछले कई सालों का रिकार्ड तोड़ दिया है.

उत्तराखंड में सोमवार से शुरू हुई मूसलाधार बारिश के बाद आई बाढ़ और भूस्खलन में अब तक 130 से ज़्यादा लोगों की जान जा चुकी है.

सैकड़ों लोग लापता हैं और चार धाम की यात्रा का समय होने के कारण इस समय उत्तराखंड में मौजूद हज़ारों तीर्थयात्री अभी भी यहां फंसे हुए हैं.

बारिश से सबसे ज्यादा प्रभावित गढ़वाल मंडल हुआ है. गंगोत्री, यमुनोत्री, बद्रीनाथ और केदारनाथ के चार धाम यात्रा मार्ग जगह-जगह सड़क धंसने और मलबा आने के कारण बंद हो गए हैं. इस मार्ग के दोनों ओर हजारों की तादाद में यात्री फंसे हुए हैं.

वहां जरूरी सामान की किल्लत हो गई है और इसससे चार धाम की यात्रा स्थगित हो गई है.

तबाही

देहरादून, उत्तरकाशी, टिहरी, पौड़ी, रूद्रप्रयाग, चमोली, जोशीमठ और पुरोला में जगह- जगह सड़कों में पानी भर गया है, पुश्ते ढह गए हैं, मलबा आ रहा है और नदियां उफान पर हैं. देहरादून के कई इलाके में घरों में पानी और मलबा घुस गया है. बारिश के इस रौद्र रूप को देख लोग हैरान परेशान हैं.

ऐतिहासिक केदारनाथ मंदिर का मुख्य हिस्सा और सदियों पुराना गुंबद सुरक्षित है लेकिन मंदिर का प्रवेश द्वार और उसके आस-पास का इलाका पूरी तरह तबाह को चुका है.

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने कहा है, ''केदारनाथ में इन्फ्रास्ट्रक्चर पूरी तरह बर्बाद हो गया है. कम से कम एक साल तक केदारनाथ यात्रा शुरू नहीं हो पाएगी. यात्रा चालू होने में दो से तीन साल का वक्त भी लग सकता है.''

उत्तराखंड पुलिस, आईटीबीपी और सेना के करीब 5000 जवान इस आपदा में फंसे आम लोगों की मदद कर रहे है.

राहत सामग्री

वायुसेना के 18 हेलीकॉप्टर सुदूर इलाकों मे फंसे हुए तीर्थयात्रियों, पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों को निकालने में लगे हुए हैं.

पीड़ितों को खाद्य सामाग्री और दवाएँ इत्यादि वितरित की जा रहीं हैं. अब तक प्राप्त खबरों के अनुसार लगभग 45 जवान लापता हैं. राज्य सरकार बचाव कार्य के लिए निजी कंपनियों के हेलीकॉप्टरों की भी सेवाएं ले रही है.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और यूपीए अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने बुधवार को आपदा प्रभावित क्षेत्र का हवाई दौरा किया.

प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा से बात करके उन्हें हर तरह की सहायता का आश्वासन दिया.

केन्द्रीय गृह सचिव आरपीएन सिंह ने बताया कि उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के अंदरूनी इलाकों में भोजन, दवाएँ और कंबल गिराए गया है. केन्द्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने भी दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बात की. उत्तराखंड के सरकार आपदा के लिए हेल्पलाइन शुरू की है – 0135-2716201, 2710925

प्रधान मंत्री राहत फंड से मृतकों के परिवारों को दो-दो लाख रुपए का मुआवजा दिया जाएगा और घायलों को 50 हजार रुपए का मुआवजा मिलेगा. जिन लोगों के घरों को भारी नुकसान हुआ है उन्हें एक लाख और जिनके घरों को कम नुकसान हुआ है उन्हें 50 हजार रुपए की मदद मिलेगी.

प्रधानमंत्री ने बताया कि उत्तराखंड के लिए एक हजार करोड़ रुपए की राहत राशि दी जाएगी, जिसमें से 145 करोड़ रुपए तुरंत रिलीज कर दिए जाएंगे.

अन्य राज्यों में भी संकट

हिमाचल प्रदेश

उत्तराखंड के पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश में भी इस आपदा से कई लोगों की मृत्यु हुई है. राज्य के विभिन्न इलाकों में करीब 1,500 पर्यटक फंसे हुए हैं.

मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह 60 घंटे से ज़्यादा समय तक किन्नौर में फंसे रहे. उन्हें अन्य कई पर्यटकों के साथ आज सुबह हेलीकॉप्टर से निकाला गया. किन्नौर इलाके में पिछले 20 वर्षों की सबसे ज़्यादा वर्षा हुई है.

उत्तर प्रदेश

कई इलाक़ों में हुई भारी बारिश और कई बैराजों से भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण राज्य में चेतावनी जारी कर दी गई है. उत्तराखंड से सटे सहारनपुर ज़िले में अब तक 15 लोग मारे जा चुके हैं.

दिल्ली

उत्तर भारत के पहाड़ी राज्यों में आई बाढ़ का असर राजधानी दिल्ली पर भी देखा जा रहा है. यमुना का जलस्तर ख़तरे के निशान से काफ़ी ऊपर बढ़ गया है. पूर्वी दिल्ली के निचले इलाक़ों में रह रहे लोगों को राहत शिविरों में पहुंचाया जा रहा है.

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