एजेंसियों में तालमेल में कोई कमी नहीं: बहुगुणा

  • 22 जून 2013

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने केंद्रीय गृह मंत्री के बयान पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि लोग उसे ग़लत संदर्भ में देखने की कोशिश कर रहे हैं.

शनिवार शाम को देहरादून में पत्रकारों से बात करते हुए बहुगुणा ने कहा कि केंद्र सरकार और राज्य सरकार के बीच तालमेल में कोई कमी नहीं है.

बहुगुणा का कहना था, ''गृह मंत्री और गृह सचिव किस लिए यहां आए. देखने के लिए कि यहां जो काम हो रहा है, वो कैसा हो रहा है. उन्होने कहा कि सराहनीय कार्य हो रहा है. अब जो चुनौतियां हैं वो बिल्कुल अलग हैं. अर्धसैनिक बलों के बीच समन्वय की ज़्यादा ज़रूरत है. इसके लिए उन्होंने एनडीआरएफ़ के निदेशक को यहां तैनात किया है.''

ग़ौरतलब है कि केंद्र सरकार ने उत्तराखंड में आई आपदा के लगभग एक सप्ताह के बाद कहा है कि युद्ध स्तर पर काम किए बग़ैर राहत और बचाव मुमकिन नहीं है और राहत एजेंसियों में तालमेल की कमी से बाधा आ रही है.

केदारनाथ पहले और बाद में

केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने शनिवार सुबह को देहरादून में उत्तराखंड की आपदा से उपजे हालात की समीक्षा करने के लिए मख्यमंत्री विजय बहुगुणा के साथ बैठक की.

शिंदे ने इसे राष्ट्रीय संकट क़रार दिया और कहा कि तालमेल न होने से ठीक से राहत का काम नहीं हो पा रहा है. उनका कहना था कि समन्वय की कमी दूर करने के लिए केंद्र सरकार की तरफ़ से पूर्व गृह सचिव वीके दुग्गल को नियुक्त किया गया है और अब वही कमान संभालेंगे.

इस बीच मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. शनिवार तक राज्य सरकार ने 557 लोगों के मारे जाने की पुष्टि की थी, लेकिन शनिवार शाम को पत्रकारों से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि निश्चित तौर पर मरने वालों की संख्या साढ़े पांच सौ से कहीं ज़्यादा है और ये हज़ार तक हो सकती है.

वीआईपी दौरों से दिक़्क़त

इस बीच 55 के क़रीब हेलिकॉप्टर लगातार उड़ानें भर रहे हैं और क़रीब 12,000 जवान फंसे हुए लोगों को निकालने में मुस्तैदी से जुटे हैं. मगर फंसे हुए यात्रियों की संख्या इतनी अधिक है कि सभी यात्री एकबारगी नहीं निकाले जा सकते हैं.

इस वजह से उनके परिजनों में गहरा आक्रोश है और कई तरह की शिकायतें सामने आ रही हैं.

लोगों की बचाने की कोशिश- तस्वीरों में

हालांकि आपदा विभाग के निदेशक पीयूष रौतेला ने कहा है, "सभी के लिए समान ढंग से राहत और बचाव चल रहा है.''

अभी भी सैकड़ों लोग लापता हैं और उनके परिजन उन्हें तलाश रहे हैं.

लेकिन सरकार जिस तरह लाचारी दिखा रही है और विभीषिका जितनी बड़ी है, उससे ज़ाहिर है कि इस वक़्त सभी को संतुष्ट करना आसान नहीं है.

इस बीच नेताओं के दौरे से भी दिक़्क़तों की ख़बरें आ रही हैं और आरोप है कि वीआईपी लोगों के दौरे भी बाधा पंहुचा रहे हैं. शिकायत ये भी है कि वीआईपी लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है.

गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी भी देहरादून पंहुचे हैं, लेकिन उनका प्रभावित इलाक़ों का दौरा फ़िलहाल टल गया है क्योंकि सरकार ने उन्हें किसी हैलिपैड का उपयोग करने की इजाज़त नहीं दी है. सरकार का कहना है कि हैलिपैड का इस्तेमाल फ़िलहाल राहत कार्यों में लगे हेलिकॉप्टर के इस्तेमाल के लिए हो रहा है.

बाद में मोदी ने प्रभावित इलाक़ों का हवाई सर्वेक्षण किया.

उत्तराखंड बाढ़ पर विशेष

'मौसम बिगड़ने की आशंका'

इस बीच उत्तराखण्ड के मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में राज्य में मौसम फिर बिगड़ सकता है. अगले 24 घंटे में राज्य में कई जगह बारिश और बौछारें पड़ने की आशंका है.

अगले कुछ दिनों में फिर मौसम ख़राब होने की चेतावनी जारी की गई है.

मौसम विभाग के अनुसार इसका असर ख़ासतौर पर पिथौरागढ़ और लोहाघाट इलाक़े में हो सकता है.

इसके अलावा कई जगह सघन बादल और धुंध होने की संभावना है. इस वजह से हेलिकॉप्टर की उड़ानों के लिए अनुकूल स्थितियां नहीं बन पाएंगी.

मौसम विभाग के निदेशक आनन्द शर्मा के अनुसार 24 से 27 जून के बीच कुमांऊ और गढ़वाल दोनों ही मंडलों में कई स्थानों पर अच्छी-ख़ासी बारिश हो सकती है.

चुनौती ये है कि इसके पहले सभी यात्रियों को सुरक्षित निकाल लिया जाए.

राज्य आपदा प्रबंधन केंद्र के अनुसार रूद्रप्रयाग के जंगलचट्टी, गरूड़चट्टी और जंगलों में अभी भी 2000-2500 लोग और चमोली में 12040 यात्री फंसे हुए हैं.

कुल मिलाकर गढ़वाल मंडल के विभिन्न इलाक़ों में 40 हज़ार से अधिक यात्री अभी भी फंसे हुए बताए जा रहे हैं. इन्हें हवाई और सड़क मार्ग से निकाला जाना है.

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