फिर से लौटेगी पटरी पर ज़िंदगी?

उत्तराखंड के केदारनाथ और बद्रीनाथ में भयावह मंज़र देखकर वापस लौटे लोगों की आंखों में अब भी ख़ौफ़ की परछांई साफ़ देखी जा सकती है. मगर हादसे का सामना कर रहे लोगों ने उम्मीद का दामन नहीं छोड़ा है.

सेना बचाव का काम पूरी ताक़त से जारी रखे हुए है और उधर मौसम एक बार फिर बेरहम होने के कगार पर है.

कुदरत का क़हर झेलते हुए किसी तरह ज़िंदगी बचाने में कामयाब रहे तीर्थयात्रियों को भारतीय वायुसेना के जवान उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के जॉलीग्रांट हवाईअड्डे तक पहुंचा रहे हैं. बचावकर्मियों ने अब तक बाढ़ प्रभावित इलाक़ों से हज़ारों की तादाद में फंसे लोगों को निकालने में मदद की है.

समाचार एजेंसी एएफ़पी की भेजी कुछ तस्वीरें.

मुश्किल हालात से बचकर निकल पाए कई ऐसे ख़ुशक़िस्मत भी हैं, जो एक बार फिर अपने परिवारों और रिश्तेदारों से मिलकर बेहद ख़ुश हैं क्योंकि उन्होंने ऐसे पल की उम्मीदें तक छोड़ दी थीं.

उत्तराखंड के प्रभावित क्षेत्रों में मॉनसून की बारिश की वजह से बाढ़ और भूस्खलन के आसार अब भी बने हुए हैं.

प्राकृतिक आपदा का सबसे ज़्यादा असर हुआ है बुज़ुर्गों और महिलाओं पर. आपदा राहत बचावकर्मी बीमार लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने की भरसक कोशिश में जुटे हैं. ऐसे आसार हैं कि मृतकों की संख्या और भी बढ़ सकती है.

भारतीय सेना के जवान उत्तराखंड में फंसे लोगों को निकालने के साथ ही राहत-सामग्री पहुंचाने में भी जुटे हुए हैं. सेना के जवान उत्तराखंड के गौरीकुंड में राहत-सामग्री ले जा रहे हैं जहां केदारनाथ के बाद सबसे ज़्यादा तबाही मची है.

कई ऐसे लोग भी हैं जिनके रिश्तेदारों का कहीं अता-पता नहीं लग रहा है. लापता लोगों की जानकारी लेने या किसी भी तरह की पूछताछ के लिए उत्तराखंड राज्य सरकार ने हेल्पलाइन सेवाएं भी शुरू की हैं.

बाढ़ प्रभावित इलाक़ों में अब भी कई लोग फंसे हुए हैं, जो विमान के ज़रिए सुरक्षित जगह पर पहुंचने के लिए अपनी बारी का इंतज़ार कर रहे हैं.

उत्तराखंड में चारों धाम की यात्रा पर देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु इसी महीने के दौरान पहुंचते हैं. स्थानीय लोगों का कारोबार तीर्थयात्रियों के आने की वजह से ही चलता है.

एक बार फिर मौसम बिगड़ने की चेतावनी दी गई है. मगर लोगों को उम्मीद है कि वे वक़्त रहते सुरक्षित जगहों पर पहुंच जाएंगे. बचावकर्मी भी मौसम ख़राब होने से पहले तीर्थयात्रियों को प्रभावित इलाक़ों से निकालने की कोशिश में हैं.

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