उत्तराखंड: कहीं ज़िंदा बचने की ख़ुशी तो कहीं संघर्ष जारी

  • 23 जून 2013
उत्तराखंड

उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदा आए क़रीब एक हफ़्ता होने वाला है. भारतीय सेना और वायु सेना के जवान चार धाम की यात्रा करने आए तीर्थयात्रियों को बचाने की कोशिश में जुटे हुए हैं. कई जगह तो ऐसी हैं, जहां अलकनंदा नदी के इस पार से उस पार तक जाने का कोई ज़रिया ही नहीं बचा है. सेना के जवान रस्सियों के सहारे बाढ़ के पानी से उफ़न रही नदी के ऊपर से लोगों को दूसरी तरफ़ भेजने की कोशिश कर रहे हैं.

रास्ते में चढ़ाई करते वक्त कई श्रद्धालुओं की तबीयत नासाज़ हो रही है. कई बार उनकी हिम्मत जवाब देने लगती है, लेकिन सेना के जवान उनकी हौसला-अफ़ज़ाई में कोई कसर नहीं छोड़ रहे.

कई लोग उत्तराखंड के बाढ़ प्रभावित इलाके से निकलकर सुरक्षित अपने-अपने राज्यों में पहुंच चुके हैं. घर वालों से मिलकर और मौत के मुंह से सकुशल बच आने के बावजूद उन्हें यक़ीन नहीं हो रहा है.

लंबे इंतज़ार के बाद कई लोग अपने लापता परिवार वालों और रिश्तेदारों से मिल पाए हैं. एक बार फिर अपनों को अपने बीच पाकर उन्हें बेहद ख़ुशी हो रही है. ऐसे भावुक क्षणों में आंखें नम होना लाज़िमी ही है.

राज्य के गोविंदघाट में राहत और बचाव कार्य के दौरान सैनिक अलकनंदा नदी पर बने एक अस्थायी पुल की मरम्मत करने की कोशिश कर रहे हैं. ये पुल भयावह बाढ़ और भूस्खलन के बाद बर्बाद हो गया है.

जिस इलाके में लोगों पर आपदा आई, वो पहाड़ी रास्ते बेहद दुर्गम और चढ़ाई वाले हैं. सेना की कोशिश है कि तीर्थयात्रियों को जल्द से जल्द इस इलाके से निकाला जाए और उन्हें सुरक्षित जगहों तक पहुंचाया जाए.

उत्तराखंड की चार-धाम यात्रा में विदेशी पर्यटकों की भी दिलचस्पी रहती है. प्राकृतिक आपदा की चपेट में ऐसे कई विदेशी भी फंसे हैं जो उत्तराखंड गए थे. ऐसे ही एक विदेशी जोड़े को सेना का जवान निकालने की कोशिश कर रहा है.

राज्य के मुख्यमंत्री का कहना है कि आपदा में मृतकों की तादाद एक हज़ार से ज़्यादा हो सकती है. अब भी कई लोग प्रभावित इलाकों में फंसे हैं. ख़राब मौसम के आसार के चलते इन तीर्थयात्रियों को निकालना भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)