उत्तराखंडः 'भूखे-प्यासे कैसे ज़िंदा रहेंगे'

उत्तराखंड सरकार का दावा है कि अब तक आपदा प्रभावित इलाक़ों से 95,000 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है और बद्रीनाथ में अब सिर्फ 4,000 लोग ही फँसे हुए हैं.

इनके अलावा कुछ और इलाकों में लोगों के फंसे होने की सूचना है, जिन्हें सुरक्षित निकालने की कोशिश की जा रही है और इसके लिए सघन तलाशी अभियान चलाया जा रहा है.

उत्तराखंड के मुख्य सचिव सुभाष कुमार ने ये जानकारी दी है.

उत्तराखंड में कितनी मौतें हुईं, कितने लापता हुए और कितने लोग सुरक्षित निकाले गए- इस पर कोई भी बात अब बेमानी लग रही है क्योंकि पिछले नौ दिनों मे कोई समन्वय नज़र नहीं आया है, कोई एक सूची नहीं है.

लेकिन इतना तय है कि ये त्रासदी इतनी बड़ी है कि इसके शिकार हुए लोगों का पता लगाना ही अपने आप में एक चुनौती बनी हुई है.

ऐसे कैसे ज़िंदा रहेंगे

राहत और बचाव कार्य सोमवार को बाधित रहा क्योंकि पौड़ी, चमोली और देहरादून के कई इलाकों में तेज बारिश और धुंध छाई रहने के कारण हेलिकॉप्टर उड़ान नहीं भर पाए. कुछ ने उड़ान भरी तो उन्हें आधे रास्ते से लौटना पड़ा.

हवाई मार्ग से सिर्फ 172 लोगों को ही निकाला जा सका और 750 लोग पैदल मार्ग से निकाले गए.

कह सकते हैं कि ये एक तरह से 'रेस अगेन्स्ट टाइम' है क्योंकि मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों तक कुमांऊ और गढ़वाल दोनों ही इलाकों में भारी बारिश के अनुमान दिए हैं.

संकट ये है कि रूद्रप्रयाग और चमोली में कई जगहों पर रास्ते और पहाड़ अब भी दरक रहे हैं, धंस रहे हैं. इस तरह हवा और जमीन दोनों पर स्थितियां बिगड़ती ज रही हैं.

सेना के जवान खतरे पर खेलकर जोखिम भरे रास्तों में खराब मौसम के बीच लगातार जुटे हुए हैं.

सेना ने कहा है कि उसे राहत और बचाव का काम पूरा करने के लिए साफ मौसम के तीन से चार और घंटे चाहिए.

देश के अब तक के सबसे बड़े राहत और बचाव अभियान- ऑपरेशन सूर्या होप के तीसरे चरण में अब सड़क मार्ग से, अस्थायी पुल, पगडंडियां और वैकल्पिक कच्चे मार्ग बनाकार लोगों को निकालने की कोशिश चल रही है.

इस बीच प्रभावित इलाकों में अब महामारी का खतरा पैदा हो गया है और लोगों की मौत बीमारी, सदमे और भूख–प्यास से भी हो रही है.

न केवल यात्री बल्कि स्थानीय लोग भी इस संकट से जूझ रहे हैं. प्रभावित इलाकों से सुरक्षित निकलकर आए लोगों के विवरण तो इस बात की पुष्टि कर रहे हैं.

दूरदराज के पर्वतीय इलाके में रहने वाले लोग भी ऐसे मार्मिक संदेश भेज रहे हैं कि हमारे पास खाना खत्म हो गया है, पानी की लाइनें खराब हो गई है और हम गंदा पानी पी रहे हैं, बीमार हैं …ऐसे हम कैसे जिंदा रह पाएंगे.

इस बीच नरेंद्र मोदी के बाद राहुल गांधी ने भी उत्तराखंड के प्रभावित इलाकों का दौरा किया है.

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