उत्तराखंड: शवों का सामूहिक अंतिम संस्कार

  • 27 जून 2013
अंतिम संस्कार के लिए हेलीकॉप्टर में लकड़ी लादते लोग
Image caption अंतिम संस्कार के लिए सूखी लकड़ियाँ भी नहीं मिल रही हैं

उत्तराखंड की प्रलयंकारी बाढ़ में मारे गए लोगों का अंतिम संस्कार शुरू हो गया है. प्रशासन कोशिश कर रहा है कि जल्द से जल्द यह काम पूरा कर लिया जाए. क्योंकि इन शवों से कई तरह की संक्रामक बीमारियां फैलने का ख़तरा पैदा हो गया है.

पहले केदारनाथ में बरामद हुए शवों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है. उसके बाद रामबाड़ा और गौरीकुंड में मिली लाशों का दाह संस्कार किया जाएगा.

पुलिस महानिरीक्षक आरएस मीणा ने बीबीसी को बताया कि बुधवार देर शाम 18 शवों का दाह संस्कार कर दिया गया. अंतिम संस्कार के पहले शवों की तस्वीर और उनका डीएनए सैंपल लिया जा रहा है .

भयावह स्थिति

केदारनाथ से विधायक शैलारानी रावत ने गुप्तकाशी से बीबीसी को फोन पर बताया कि गुरुवार को होने वाले अंतिम संस्कार की तैयारी कर ली गई है. मौसम साफ रहेगा तो शवों सामूहिक अंतिम संस्कार शुरू किया जाएगा.

उन्होंने कहा कि यहां बहुत ही भयावह स्थिति है और चाहकर भी प्रभावित इलाकों में खाद्य और अन्य राहत सामग्री नहीं पहुंच पा रही है, क्योंकि सड़कों की हालत बहुत ख़राब है. सभी संपर्क मार्ग कट गए हैं.

सरकार के आपदा प्रंबंधन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार अब तक एक लाख दो हजार छह सौ लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पंहुचा दिया गया है.

विभाग के मुताबिक़ मौसम ने साथ दिया तो शुक्रवार तक फंसे हुए लोगों को निकालने का काम पूरा हो सकता है.

उत्तराखंड में आई भयावह बाढ़ में केदारनाथ मंदिर परिसर में सैकड़ों लोगों के मारे जाने की आशंका जताई जा रही है.

वहीं बहुत से शवों के मलबे में भी दबे होने की आशंका है. सेना के जवान मलबों में शवों की तलाश कर रहे हैं.

ख़राब मौसम

केदरानाथ के पुरोहित दिनेश बगवाड़ी ने बीबीसी संवाददाता राजेश जोशी को बताया कि बुधवार को भी सामूहिक अंतिम संस्कार करवाने के लिए केदारनाथ जाने की कोशिश की गई थी लेकिन ख़राब मौसम की वजह से हेलीकॉप्टर उड़ान नहीं भर पाया था.

उत्तराखंड की इस बाढ़ में सरकार ने अब तक आठ सौ से अधिक लोगों के मारे जाने की पुष्टि की है. अब भी बहुत से लोग राज्य के अलग-अलग हिस्सों में फंसे हुए हैं.

सेना, अर्धसैनिक बलों और एनडीआरएफ के जवानों ने राहत और बचाव कार्य करते हुए हजारों लोगों को प्रभावित इलाकों से निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है.

राज्य में अब तक के सबसे बड़े राहत और बचाव कार्य में वायुसेना के विमान और हेलीकॉप्टर भी लगाए गए हैं.

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