आख़िर भारी पड़ी मौसम की चेतावनी की अनदेखी

उत्तराखंड

उत्तराखंड में मौसम विभाग ने हाल में हुई तबाही से पहले ही राज्य में भारी बारिश का पूर्वानुमान जारी किया था लेकिन इसकी घोर अनदेखी की गई.

सूत्रों के अनुसार उत्तराखंड के राज्यपाल ने मौसम विभाग से इस बारे में रिपोर्ट मांगी है कि आपदा से पहले किस तरह के अनुमान दिए गए थे और किसी तरह की चेतावनी दी गई थी या नहीं.

बीबीसी को मिले दस्तावेजों के अनुसार बद्रीनाथ, केदारनाथ तथा आसपास के इलाक़ों में लगातार खराब मौसम, तेज से भारी बारिश और उसके संभावित नतीजों के बारे में आगाह कर दिया गया था.

मौसम विभाग के दस्तावेजों में साफतौर पर केदारनाथ और रुद्रप्रयाग के इलाके में भारी बारिश और भूस्खलन की आशंका जाहिर की गई है. साथ ही सुझाव दिया गया है कि यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रुके रहना चाहिए और पहाड़ों पर ज्यादा ऊपर जाने से बचें.

राज्य आपदा प्रबंधन विभाग के निदेशक पीयूष रौतेला ने इन चेतावनियों के बावजूद कार्रवाई न किए जाने पर लाचारी जताई है.

पूर्वानुमान

विभाग द्वारा 15 जून को केदारनाथ, बद्रीनाथ और आसपास के इलाक़ों में अगले 72 घंटे के दौरान सामान्य से अधिक बारिश होने और बिजली कड़कने के साथ भारी बारिश की चेतावनी दी थी.

चेतावनी में साफ कहा गया था, "अगले 72 घंटे के दौरान खासकर 16 जून की रात से भारी बारिश और भूस्खलन हो सकता है."

मौसम विभाग ने साथ ही यात्रियों को एडवाइजरी जारी करते हुए कहा था, "यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं."

विभाग ने अगले दिन यानी 16 जून को भी बद्रीनाथ, केदारनाथ तथा आसपास के इलाक़ों में अगले 72 घंटे के दौरान सामान्य से भारी बारिश होने का पूर्वानुमान जताया था.

सलाह

मौसम विभाग ने एक बार फिर यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी थी.

सर्वाधिक प्रभावित रुद्रप्रयाग के जिला प्रशासन को भी फैक्स और ईमेल के जरिए इसके बारे में सूचना दे दी गई थी.

मौसम विभाग के निदेशक आनन्द शर्मा कहते हैं, “मैंने टेलीफोन करके आपदा प्रबंधन विभाग के निदेशक और पुलिस के खुफिया विभाग के अधिकारियों को भी इसके बारे में सचेत कर दिया था. उनसे बाद में पूछा भी था कि क्या कदम उठाए गए हैं तो इस पर यही जवाब मिला कि इसे देखा जा रहा है और उचित कदम उठाए जा रहे हैं.”

उन्होंने कहा, “मुझे मालूम नहीं है कि इस पर कोई कार्रवाई की भी गई या नहीं.”

पूर्वानुमान

यहां तक कि किसानों को भी सुझाव दिया गया था कि वो भारी वर्षा की संभावना को देखते हुए खेतों से जल निकासी का प्रबंध कर लें.

उत्तराखंड में आपदा से हुई तबाही के बाद राज्य सरकार और प्रशासन में बेचैनी है कि इसके लिए किसे जिम्मेदार माना जाए.

रौतेला कहते हैं, “चेतावनी उतनी स्पष्ट और स्पेसिफिक नहीं थी. एक जनरल फोरकास्ट दिया गया था. हमें ये नहीं बताया गया था कि केदार घाटी में क्या होगा गौरीकुंड में क्या होने वाला है.”

उन्होंने कहा, “उस वक्त हम चाहकर भी क्या कर सकते थे.यात्री पहाड़ों पर पहुँचे चुके थे, रास्तों पर थे और हमारी सुनता भी कौन.लोगों की अपनी परेशानियां होती हैं,प्लानिंग होती है बुकिंग होती है.”

रौतेला ने कहा, “वैसे भी ये वक्त इस तरह के विवाद का नहीं है.”

सिफारिश

ये भी एक सच्चाई है कि उत्तराखंड के पास मौसम की तत्काल चेतावनी देने वाला एक भी रडार नहीं है. उत्तराखंड का मौसम विभाग कई वर्षों से चार धाम और प्रमुख पर्यटक स्थलों पर मौसम केंद्र स्थापित करने की सिफारिश कर रहा है और दो जगहों नैनीताल और मसूरी में रडार स्थापित करने के लिये राज्य सरकार के चक्कर काट रहा है लेकिन रडार के लिए उसे जमीन तक नहीं मुहैया कराई गई है.

आनन्द शर्मा कहते हैं, “ये एक बेहद संवेदनशील इलाका है और यहां के जटिल भूगोल और मौसम में अचानक आने वाले बदलावों को समझना और अनुमान लगाना बेहद जरूरी है.”

उन्होंने कहा, “हमारे पास रडार नहीं है और न ही मौसम का हाल प्रभावित इलाकों में पहुँचने के लिये कोई संचार नेटवर्क है. नहीं तो कम से कम सामुदायिक रेडियो प्रणाली तो स्थापित की ही जा सकती है.”

सवाल ये है कि क्या इस प्रलयंकारी आपदा से अब भी कोई सबक लिया जाएगा या पहाड़ और पहाड़ के लोग ऐसे ही रहने के लिये अभिशप्त रहेंगे.

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