अगले महीने तक शुरू हो पाएगी केदारनाथ में पूजा

केदारनाथ
Image caption केदारनाथ की जगह ऊखीमठ में पूजा को लेकर विवाद

हिंदुओं के पवित्र तीर्थस्थल केदारनाथ में एक तरफ़ आपदा में मारे गए लोगों का सामूहिक अंतिम संस्कार किया जा रहा है. वहीं दूसरी तरफ़ मंदिर परिसर से मलबा हटाने और जल्द पूजा शुरु करने की तैयारी की जा रही है.

मंदिर परिसर से मलबा हटाने और सफ़ाई करने के लिए एक टीम वहां भेज दी गई है. बद्री-केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने बताया कि, “वहां से मलबे की सफ़ाई और शवों को हटाने के बाद शुद्धीकरण किया जाएगा और तब पूजा की जाएगी.”

पूजा को लेकर हो रहा विवाद

केदारनाथ की पूजा को लेकर संत समाज और केदारनाथ के रावल के बीच विवाद फ़िलहाल थमता नज़र आ रहा है. पुरानी मान्यता है कि केदारनाथ और बद्रीनाथ की स्थापना आदि शँकराचार्य ने की थी और यहां की पूजा का दायित्व केरल के ब्राहम्णों को सौंपा था.

उस समय से यह धार्मिक परंपरा चली आ रही है. केदारनाथ मंदिर के उत्तर भारत में होने के बावजूद यहां पूजा अर्चना करनेवाले मुख्य पुजारी दक्षिण के ब्राह्मण ही होते हैं जिन्हें यहां रावल कहा जाता है .

केदारनाथ में आई आपदा के वक़्त केदारनाथ के मौजूदा रावल भीमाशंकर लिंग शिवाचार्य वहां नहीं थे. वे बंगलोर और महाराष्ट्र के दौरे पर गए हुए थे.

आपदा के बाद वो लौटकर उत्तराखंड आए और उन्होंने ऊखीमठ में केदारनाथ की पूजा शुरू कर दी. संत समाज ने इसपर आपत्ति जताई कि ये विधान के अनुकूल नहीं है .

Image caption उत्तराखंड में राहत और बचाव का काम अभी भी जारी है

ऊखीमठ में पूजा का विरोध

जब हर वर्ष सर्दियों में केदारनाथ के कपाट बंद किए जाते हैं तो ऊखीमठ में ही पूजा की जाती है. विरोधियों का तर्क है कि केदारनाथ में पूजा सिर्फ़ बाधित हुई है. वहां कपाट बंद नहीं हुए हैं.

इसलिए ऊखीमठ में पूजा अनुचित है. जबकि रावल का कहना है कि चूंकि केदारनाथ में पूजा नहीं की जा सकती इसलिए ऊखीमठ में पूजा की जानी चाहिए.

स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती ने इसपर धमकी दी थी कि ऊखीमठ में पूजा के विरोध में संतो का एक दल ख़ुद केदारनाथ जाएगा लेकिन मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप और मंदिर समिति के आश्वासन के बाद अब वो मान गए हैं .

मंदिर समिति के अध्यक्ष गणेश गोदियाल कहते हैं, “रावल ने जो पूजा ऊखीमठ में की उससे हमारा कोई लेना-देना नहीं है बल्कि हमारी कोशिश है कि कैसे हम केदारनाथ में पूजा शुरू कर सकें.”

रावल की इस बात के लिए भी आलोचना की जा रही है कि परंपरा के अनुसार केदारनाथ के कपाट जब एक बार खुल गए उसके बाद बंद होने तक रावल को वहीं रहना चाहिए था लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया और यात्रा पर निकल गए.

Image caption सैनिको को विदाई देते भारत के गृहमंत्री और थल सेनाध्यक्ष

लापता लोगों की तलाश

इस बीच उत्तराखंड में राहत और बचाव के दौरान हेलिकॉप्टर दुर्घटना में मारे गए जवानों के शवों को शुक्रवार को देहरादून में गार्ड ऑफ़ ऑनर के साथ अंतिम विदाई दी गई. इस अवसर पर केंद्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे और थल सेनाध्यक्ष जनरल विक्रम सिंह भी मौजूद थे.

पता चला है कि केदारनाथ इलाक़े में रामबाड़ा और त्रिजुगीनारायण के बीच कुछ लोग अभी भी फँसे हुए हैं और उन्हें निकालने के लिए नौसेना के कमांडो और प्रशिक्षित पर्वतारोहियों का दल भेजा रहा है.

अभी भी इस प्रलयकारी बाढ़ से हुए विनाश में कई लोग लापता बताए जा रहे हैं. सरकार ने इनकी पहचान और खोज के लिए एक विशेष सेल बनाया है.

इसके प्रभारी अजय प्रद्योत ने बीबीसी को बताया, “लापता लोगों की संख्या 350 से 3000 के बीच हो सकती है लेकिन सही संख्या का पता लगने में 2-3 दिन लग जाएंगे.”

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