नहीं जान सकेंगे मृतकों की सही संख्या: बहुगुणा

  • 1 जुलाई 2013
उत्तराखंड में अब भी हजारों लापता
Image caption हरिशंकर कई दिनों से अपने परिजनों को तलाश रहे हैं लेकिन कुछ पता नहीं चला

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने कहा है कि आपदा में मारे गए या गायब हुए लोगों का सही आंकड़ा शायद कभी नहीं मिल पाएगा. उनका कहना है कि बाढ़ में बहे या मलबे में दबे लोगों की संख्या का अंदाज़ा लगा पाना कठिन है.

सरकार का कहना है कि प्रभावित इलाकों में बचाव कार्य लगभग खत्म हो चुका है और अब लापता लोगों की तलाश के लिए एक सघन तलाशी अभियान चलाया जाएगा. इसमें नौसेना के कमांडो और कुशल पर्वतारोहियों की भी मदद ली जा रही है.

राज्य के पहाड़ी इलाकों में आई प्रलयंकारी बारिश और बाढ से 5 लाख लोग प्रभावित हुए हैं और अब भी 3000 लोग लापता बताए जा रहे हैं.

सरकार ने जान-माल की क्षति के जो आंकड़े जारी किये हैं उसके अनुसार 580 लोगों की मौत हुई जिसमें हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मारे गये 20 लोग भी शामिल हैं.

3119 लोग घायल हैं और 400 के करीब तीर्थयात्री और सैलानी ही वहां फंसे हुए हैं जिन्हें जल्दी ही निकाल लिया जाएगा.

रविवार को 1370 लोग निकाले गये लेकिन पिथौरागढ़ में खराब मौसम के कारण राहत और बचाव नही हो पाया.

बचाव अभियान का अंतिम पड़ाव

अब तक प्रभावित इलाकों से कुल 1 लाख 8253 लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थानों में पंहुचा दिया गया है और सरकार का कहना है कि जो कुछ लोग बचे हुए हैं उनमें से कई अपनी वजहों से भी रूके हुए हैं और संभवत धामों के कपाट बंद होने के बाद ही वो वहां से लौटेंगे.

Image caption समय से पहले ही हुई भारी बारिश से आई बाढ़ ने उत्तराखंड में भारी तबाही मचाई

तो एक तरह से सरकार ने अपनी तरफ से फंसे लोगों को निकालने का अभियान खत्म कर दिया है हांलाकि इसकी बाकायदा घोषणा नहीं की गई है. अब राहत और बचाव के काम में दूसरा कदम फंसे लोगों की तलाशी पर है.

मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने माना है कि लापता लोगों की संख्या 3000 तक है. उनका कहना था कि, “गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराने के एक महीने के बाद भी अगर किसी का पता नहीं चलता है तो उनके परिजन हलफनामा दायर करके मुआवजा ले सकेंगे और सरकार उनकी मौत का प्रमाणपत्र जारी करेगी.”

“अन्य राज्यों से आए और लापता हुए लोगों की सूची संबंधित राज्यों के प्रशासन से मंगाई जा रही है और उनका मुआवजा उन्ही राज्यों के मुख्य सचिव के जरिये दिया जाएगा साथ ही जिला कार्यालयों में मुआवजा बांटने का काम शुरू कर दिया गया है.”

स्थानीय लोगों तक पहुंचने की चुनौती

दूसरी सबसे बड़ी चुनौती स्थानीय लोगों को राहत पंहुचाने की है. सरकार के अनुसार 4200 गांवों में इस आपदा से तबाही हुई है.

200 गांवों का संपर्क अभी भी कटा हुआ है .890 मकान पूरी तरह से धराशायी हो गये हैं. 1467 मकान आंशिक रूप से ध्वस्त हुए हैं,1860 सड़कें बह गई हैं और पानी की 968 स्कीमें नष्ट हो गई हैं.

मुख्य सचिव सुभाष कुमार का दावा है कि कई जगहों में 10 जुलाई तक पानी-बिजली की बुनियादी सेवाओं को बहाल कर दिया जाएगा लेकिन कुछ जगहों में शायद सितंबर के पहले ये काम नहीं हो पाएगा क्योंकि बिजली के कई स्टेशन और सब स्टेशन आपदा की चपेट में आ गये हैं.

इस बीच आपदा में मारे गये लोगों के शवों को निकालने और उनकी अंत्येष्टि का काम जारी है और पुलिस मुख्यालय के अनुसार अब तक 94 शवों का दाह संस्कार किया जा चुका है.

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