क्या आत्महत्या के क़ानून का हो रहा है दुरुपयोग?

सूरज पंचोली
Image caption जिया खान को ख़ुदकुशी के लिए उकसाने को आरोप मे सूरज पंचोली को गिरफ़्तार किया गया था

भारत में पिछले साल तेरह हजार से अधिक किसानों ने आत्महत्या की.

इनमें से अधिकांश भारी क़र्ज़ में डूबे हुए थे. उन्होंने फसल बर्बाद होने के बाद बैंकों, माइक्रो फाइनेंसिंग कंपनियों और साहूकारों से क़र्ज़ लिया था लेकिन वो उसे चुका नहीं पाए.

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साल 1995 से करीब तीन लाख किसान आत्महत्या कर चुके हैं. ये भारत के लिए एक शर्मनाक बात है, एक राष्ट्रीय त्रासदी है.

लेकिन सवाल ये है कि क्या ऐसे मामलों में साहूकारों के ख़िलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला बन सकता है?

देश के क़ानून की मानें तो ये संभव है. भारत का 153 साल पुराना क़ानून कहता है कि आत्महत्या के लिए उकसाने वाले को अपराध सिद्ध होने पर दस साल की जेल और जुर्माना हो सकता है.

मई में पश्चिम बंगाल के हजारों निवेशकों को चूना लगाने वाले व्यवसायी सुदीप्त सेन पर एक निवेशक को आत्महत्या के लिए उकसाने को आरोप लगाया गया.

जिया ख़ान मामला

सूरज पंचोली भी इसी तरह के आरोप का सामना कर रहे हैं. उन पर अपनी गर्लफ्रैंड और बॉलीवुड अभिनेत्री जिया ख़ान को ख़ुदकुशी के लिए उकसाने का आरोप है.

जिया ने पिछले महीने आत्महत्या कर ली थी जिसके बाद सूरज को गिरफ़्तार किया गया था. पुलिस ने कहा कि वो सूरज के ख़िलाफ़ आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप तय करने जा रही है और सूरज को कुछ दिन जेल में गुजारने पड़े थे.

सोमवार को उन्हें ज़मानत मिल गई. न्यायाधीश ने उनकी ज़मानत याचिका पर सुनवाई के बाद कहा कि उन्हें नहीं लगता है कि सूरज ने जिया को आत्महत्या के लिए उकसाया था.

मंगलवार को भी अख़बारों में ऐसी ही एक घटना का ज़िक्र था. मुंबई में एक महिला फ़िल्म एडिटर के कथित तौर पर आत्महत्या करने के मामले में पुलिस ने उनके पूर्व प्रेमी को गिरफ़्तार किया है और उन पर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया गया है.

रिपोर्ट के मुताबिक एडिटर ने अपने प्रेमी पर बलात्कार और शादी के वादे से मुकरने का आरोप लगाया था.

सज़ा

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने बार-बार ये व्यवस्था ही है कि किसी व्यक्ति को आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी साबित करने के लिए इस बात के पुख़्ता प्रमाण होने चाहिए कि उसने ख़ुदकुशी के लिए उकसाया था या इस अपराध को अंजाम देने के लिए उसकी मंशा स्पष्ट थी.

Image caption जिया ख़ान ने आत्महत्या कर ली थी

जाने माने वकील केटीएस तुलसी ने कहा, “इसे साबित करना आसान नहीं है. ये इस तरह है कि जैसे आप किसी को बंदूक या ज़हर दिखाएं और उससे कहें कि जाओ और मौत को गले लगा लो.”

तुलसी ने कहा कि आत्महत्या के लिए उकसाने के मामलों में महज एक से दो प्रतिशत लोगों को ही सज़ा हो पाती है. साल 2012 में 135,000 से अधिक लोगों ने ख़ुदकुशी की. इनमें पुरुषों की संख्या महिलाओं से ज़्यादा थी और ज़्यादातर विवाहित थे.

तुलसी ने पुलिस पर इस क़ानून के दुरुपयोग का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, “क़ानून में आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले की परिभाषा स्पष्ट है. लेकिन दुर्भाग्य से हमारी पुलिस इतनी पढ़ी लिखी नहीं है कि क़ानून की इस परिभाषा को समझ सके. यही वजह है कि लोगों को अनावश्यक परेशानी झेलनी पड़ती है.”

मामले

क़ानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि दहेज प्रताड़ना के कारण बड़ी संख्या में महिलाएं आत्महत्या करती हैं और इसे देखते हुए देश में क़ानून की ज़रूरत है. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड्स ब्यूरो के मुताबिक पिछले साल भारत में दहेज संबंधी मौतों के 800 से अधिक मामले सामने आए थे.

इन मामलों में एक तिहाई अभियुक्तों को सजा मिली. वकीलों का कहना है कि इनमें ज़्यादातर सज़ाएं दहेज से जुड़ी आत्महत्या से संबंधित मामलों में मिली थी और इनमें आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपों को साबित किया गया था.

शायद भारत को अंग्रेजी हुक़ूमत के ज़माने के क़ानून से छुटकारा पाने की ज़रूरत है जिसमें आत्महत्या करना गै़रक़ानूनी है. ये अपराध करने पर आपको एक साल जेल की सज़ा मिल सकती है.

इंग्लैंड 1961 में ऐसे ही क़ानून से छुटकारा पा चुका है लेकिन भारत में अब भी ये क़ानून बदस्तूर जारी है और कई लोगों का मानना है कि ये देश को उल्टी दिशा में ले जाना वाला क़ानून है.

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