उत्तराखंड: वो न ख़त्म होने वाला सफ़र और पत्थरों की बारिश

रुद्रप्रयाग में फंसे यात्री

पिछले हफ़्ते हुई भयंकर बारिश और उसकी वजह से आए सैलाब और भूस्खलन की वजह से उत्तराखंड के कई प्रमुख इलाके आज भी कटे हुए हैं. आपदा प्रभावित इलाकों तक राहत पहुंचाने के काम इससे बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है.

राज्य के ऊपरी इलाकों तक पहुँच पाना आज भी लगभग नामुमकिन बना हुआ है.

जगह जगह पर पहाड़ों से गिरते हुए मलबे और पत्थरों की वजह से वाहनों का आवागमन घंटों प्रभावित रहता है. ऋषिकेश से रुद्रप्रयाग के रास्ते पर भी जाम लगा हुआ है. गाड़ियों की लम्बी कतारें हैं.

मुझे बताया गया कि ये जाम दो घंटों से लगा है. पहाड़ों पर से लगातार मलबा गिर रहा है जिसमें पत्थरों के बड़े टुकड़े और मिट्टी के ढेर शामिल हैं.

जब मलबा गिरकर सड़क पर जमा हो जाता है तो सीमा सड़क संगठन या बीआरओ के कर्मी उसे हटाने का काम करते हैं. इस काम में उन्हें वक़्त लगता है.

मुश्किल रास्ते

क्योंकि ये सडकें काफी ऊँचाई पर हैं इस लिए ये काम काफी मुश्किल है. सड़क के एक तरफ बड़े पहाड़ और दूसरी तरफ खाई. यहाँ से पीछे मुड़ने का भी कोई रास्ता नहीं. बस इंतज़ार ही नियति है.

दो घंटे पहले से लगा जाम मेरे पहुँचने के दो घंटों बाद तक बना रहा. एक एक कर गाड़ियों को निकालना काफी मुश्किलों भरा काम है. वो भी तब जब सड़क संकीर्ण हो और लगातार पत्थर बरस रहे हों.

जाम में खड़ी गाड़ियों के चालकों नें बताया कि अमूमन बरसात के दिनों में मलबा गिरता ही है. मगर पंद्रह दिनों पहले आई प्रलयकारी बारिश के बाद हालात और बिगड़ गए हैं.

अब पहाड़ों की मिटटी कमज़ोर हो गई है. पेड़ों के काटने से मिटटी की पकड़ ढीली होती जा रही है.

अब रह रहकर पहाड़ की बड़ी बड़ी परतें खिसकने लगी हैं. प्रकृति की इस मार नें लोगों की जिंदगी असुरक्षित कर दी है.

इसी जाम में फंसे सत्येंद्र उनियाल नें कहा कि बड़े बड़े बांधो को बनाने में पहाड़ों में विस्फोट किए गए जिस वजह से पहाड़ कमज़ोर हो गए हैं और अब बारिश की वजह से पहाड़ के पहाड़ खिसकने लगे हैं.

विस्फोटों से हिली नींव

वो कहते हैं,"लगातार किए जा रहे विस्फोटों नें पहाड़ों की नींव को ही हिलाकर रख दिया है. हज़ारों हजारों टन बारूद का इस्तेमाल किया गया. आज हम इसका खमियाजा भुगत रहे हैं."

एक एक कर गाड़ियों का निकलना शुरू हो गया है. अब हमारी गाड़ी का भी नंबर आ गया. मगर सामने चल रही गाड़ी मलबे नुमा कीचड़ में जा फँसी है.

इसके पहिये घूम-घूम कर रह जाते हैं और गाड़ी आगे नहीं बढ़ पा रही है.

बड़ी मशक्कतों के बाद कुछ लोगों के सहयोग से ये गाड़ी कीचड़ से निकल तो गई लेकिन कुछ ही गज़ आगे पहाड़ों से फिर मलबा गिरना शुरू हो गया.

हम रुद्रप्रयाग से सिर्फ नौ किलोमीटर ही दूर हैं मगर ऐसा लग रहा है कि आगे बढ़ना मुश्किल हो जाएगा.

यहाँ घंटों जाम में फंसे लोगों को शिकायत है कि ऐसी स्थिति में मदद करने वाला कोई नहीं. न इन सड़कों पर पानी मिलता है और न खाने का कोई सामान.

अब मौसम विभाग की चेतावनी सबकी चिंता का कारण है क्योंकि कहा जा रहा है कि आने वाले कुछ घंटों के दौरान एक बार फिर से प्रलयकारी बारिश हो सकती है.

(बीबीसी हिंदी का एंड्रॉयड मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए क्लिक करें. आप ख़बरें पढ़ने और अपनी राय देने के लिए हमारे फ़ेसबुक पन्ने पर भी आ सकते हैं और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार