क्यों हो रही है मिस्र में बार-बार 'क्रांति'?

  • 4 जुलाई 2013
राष्ट्रपति को अपदस्थ किये जाने के बाद ख़ुशी मना रहे लोग
Image caption राष्ट्रपति को अपदस्थ किये जाने के बाद ख़ुशी मना रहे लोग

मिस्र में सेना ने देश के पहले लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी को अपदस्थ कर दिया है. सेना का कहना है कि एक अंतरिम सरकार बनाई जाएगी और संविधान को स्थगित कर दिया गया है.

क्या हुआ?

Image caption जनरल अब्दुल फतह अल-सीसी ने कहा है कि ये व्यवस्था राष्ट्रपति चुनाव होने तक है

मिस्र के सेनाध्यक्ष, जनरल अब्दुल फतह अल-सीसी ने टेलीविज़न पर संबोधन में संविधान को स्थगित किए जाने की घोषणा की. उन्होंने कहा कि प्रभावी रूप से राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी की शक्तियां सर्वोच्च संवैधानिक अदालत के मुख्य न्यायाधीश को दी जा रही हैं.

जनरल अल-सीसी ने कहा कि मुख्य न्यायाधीश अदली मंसूर दोबारा राष्ट्रपति और संसद के चुनाव होने तक अंतरिम सरकार चलाएँगे. जनरल के संबोधन के बाद देश के सबसे बड़े इमाम और अल-अज़हर विश्वविद्यालय के प्रमुख, कॉप्टिक चर्च के प्रमुख पादरी और साथ ही सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता मोहम्मद अल बारदेई ने भी अपनी मंज़ूरी देते हुए लोगों को संबोधित किया.

राष्ट्रपति कार्यालय के ट्विटर अकाउंट पर जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया कि मोहम्मद मुर्सी ने सेना की इस घोषणा को सेना का षड्यंत्र बताते हुए इसकी निंदा की है. उन्होंने कहा कि इसे हमारे देश के स्वतंत्र लोग पूरी तरह से ख़ारिज करते हैं.

इससे पहले हथियारबंद वाहनों के साथ सेना के दस्तों ने राजधानी काहिरा के प्रमुख स्थानों पर कब्ज़ा कर लिया. कई हज़ार विपक्षी प्रदर्शनकारी और मोहम्मद मुर्सी के समर्थक सड़कों पर उतर आए.

राष्ट्रपति के अधिकार क्यों छीने गए?

Image caption तहरीर चौक पर प्रदर्शनकारियों ने ख़ुशी में आतिशबाजी की

देश में लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए पहले राष्ट्रपति मुर्सी के खिलाफ नवंबर 2012 से ही जनता में असंतोष पनप रहा था. यह सुनिश्चित करने के लिए कि उनके इस्लामी सहयोगियों के बहुमत वाली संविधान सभा देश के नए संविधान का मसौदा तैयार कर पाए, मोहम्मद मुर्सी ने एक अंतरिम संविधान जारी किया था. इसमें राष्ट्रपति को अपार शक्तियां दी गई थीं.

कई दिनों के विरोध प्रदर्शन के बाद वह अपनी शक्तियों को सीमित करने पर राज़ी भी हो गए थे लेकिन पिछले महीने के आखिरी में संविधान सभा ने जल्दबाजी में तैयार किए गए संविधान के मसौदे को मंज़ूरी दे दी. इसके बाद और प्रदर्शन हुए. संविधान के मसौदे को मंज़ूरी देने के लिए हुई बैठक का उदारवादी लोगों के साथ ही धर्मनिरपेक्ष और कॉप्टिक चर्च के लोगों ने भी बहिष्कार किया था.

Image caption सेना को श्रेय दे रहे हैं लोग

जैसे-जैसे उनका विरोध बढ़ता गया, राष्ट्रपति मुर्सी ने सेना को एक आदेश जारी किया. इस आदेश के अनुसार संविधान के मसौदे पर 15 दिसम्बर 2012 को हुए जनमत संग्रह तक सेना को सभी राष्ट्रीय संस्थाओं और चुनाव स्थलों की सुरक्षा का अधिकार दे दिया गया. आलोचकों ने इसे एक तरह से 'मार्शल लॉ' की संज्ञा दी.

अधिकार पत्र को मंजूरी मिल जाने के बाद सेना बैरकों में लौट गई लेकिन कुछ हफ़्तों में ही मोहम्मद मुर्सी के समर्थकों और विरोधियों के बीच झड़पों को रोकने के लिए स्वेज़ नहर के आस-पास के शहरों में सेना को तैनात करना पड़ा. इन झड़पों में 50 लोग मारे गए. जनरल सीसी ने 29 जनवरी 2013 को चेतावनी देते हुए कहा कि राजनीतिक संकट "सरकार भंग होने कि तरफ बढ़ सकता है".

अप्रैल के अंत में विपक्षी कार्यकर्ताओं ने तमरोद (क्रांति) नाम से एक विरोध का आंदोलन शुरू किया. इसका उद्देश्य मोहम्मद मुर्सी के खिलाफ एक पत्र पर हस्ताक्षर करवाना था. इस पत्र में मोहम्मद मुर्सी पर देश में सुरक्षा बहाल करने और अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने में विफल रहने का आरोप लगाया गया था. इस पत्र में नए राष्ट्रपति चुनाव की भी मांग थी. 30 जून 2013 को राष्ट्रपति मुर्सी के कार्यकाल का एक साल पूरा होने पर इस आंदोलन के तहत बड़े विरोध प्रदर्शन का भी आयोजन किया गया.

इन प्रदर्शनों को देखते हुए सेना ने राष्ट्रपति मुर्सी को एक जुलाई को चेतावनी दी कि अगर वह अगले 48 घंटों में लोगों की माँगें पूरी करने और राजनीतिक संकट समाप्त करने में सफल नहीं हुए तो वह हस्तक्षेप करके अपना 'रोडमैप' लागू करेगी.

समय सीमा ख़त्म होने पर राष्ट्रपति इस बात पर अड़े रहे कि वही देश के वैधानिक नेता हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि उनको हटाने का कोई भी प्रयास देश में अव्यवस्था पैदा कर सकता है. उन्होंने कहा, "लोगों ने मुझे अधिकार दिए हैं, उन्होंने मुझे स्वतंत्र और ईमानदारी से हुए चुनाव में चुना है. वैधानिक ढंग से चुनी गई वो सरकार ही इस देश को बचाने और ख़ून-ख़राबा रोकने तथा अगले चरण में जाने का एक मात्र रास्ता है."

सेना ने अब क्यों कार्रवाई की ?

तीन जुलाई को राजनीतिक, धार्मिक और युवा नेताओं के साथ बैठक के बाद जनरल सीसी से कहा की मिस्र के लोग "मदद माँग रहे हैं" और "सेना चुप नहीं बैठ सकती". उन्होंने यह भी कहा कि सेना ने 'स्थिति पर नियंत्रण करने' और 'राष्ट्रीय सुलह' के लिए कड़े प्रयास किए हैं लेकिन राष्ट्रपति ने 'जनता की मांगें' नहीं मानीं.

जनरल ने घोषणा की कि "बैठक में उपस्थित लोगों ने भविष्य के लिए एक कार्ययोजना तैयार की है. इसमें एक ऐसा मजबूत मिस्र का समाज बनाने के शुरुआती उपाय शामिल हैं, जो एकजुट हो और कोई भी किसी भी वर्ग से पीछे ना रह जाए. इस कार्ययोजना में देश को विभाजन से बचाने और राजनीतिक संकट ख़त्म करने के भी उपाय हैं".

कार्य योजना क्या है ?

जरल सीसी ने कहा कि चारों तरफ आलोचना का शिकार हुआ 2012 में बना संविधान कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया गया है. विशेषज्ञों और सभी राजनीतिक दलों के नेताओं का एक समूह इसमें संशोधन पर विचार करेगा. उन्होंने यह नहीं बताया कि क्या किसी भी फेरबदल की मंजूरी के जिए जनमत संग्रह किया जाएगा या नहीं.

Image caption अंदली मंसूर सर्वोच्च संवैधानिक अदालत के मुख्य न्यायाधीश हैं

जब तक नई सरकार नहीं बन जाती तब तक सर्वोच्च संवैधानिक अदालत के मुख्य न्यायाधीश अदली मंसूर सरकार संभालेंगे.

जनरल ने इस अंतरिम सरकार की समय सीमा भी नहीं बताई. सेना की भूमिका भी स्पष्ट नहीं की गई. जनरल सीसी ने देश के युवाओं को सशक्त बनाने और उन्हें सरकारी संस्थाओं में शामिल करने के उपाय करने की भी ज़रूरत बताई.

उन्होंने सर्वोच्च संवैधानिक अदालत से हाल ही में भंग हुए संसद के निचले सदन में चुनाव कराने का क़ानून जल्द से जल्द बनाने की अपील की. उन्होंने कहा कि मीडिया के लिए भी नए दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे.

मोहम्मद मुर्सी का क्या हुआ ?

Image caption मुर्सी के ख़िलाफ़ पिछले साल से ही प्रदर्शन हो रहे थे

अपदस्थ राष्ट्रपति और उनके सहयोगी सेना की क़ैद में हैं. मोहम्मद मुर्सी, जनरल गाइड मोहम्मद बदी सहित उनके दल मुस्लिम ब्रदरहुड के वरिष्ठ नेताओं पर यात्रा न करने के प्रतिबंध लगा दिए गए हैं.

राष्ट्रपति कार्यालय के ट्विटर अकाउंट पर राष्ट्रपति के हवाले से कहा गया कि "लोकतंत्र के लिए संघर्ष करने वाले सभी स्वतंत्र लोग सेना की घोषणा को नामंजूर करते हैं". उन्होंने नागरिकों और सेना के लोगों से "क़ानून और लोकतंत्र बहाल करने और मिस्र को पीछे ले जाने वाले षड्यंत्र को न मानने" की अपील की. मोहम्मद मुर्सी ने कहा कि सभी को शांति से रहना चाहिए और खून खराबे से बचना चाहिए.

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