'भगवान' का फैसला करेगी 12 गांव की पंचायत

केंद्र सरकार और स्थानीय आदिवासियों के कड़े विरोध के बावजूद ओडिशा सरकार ने शुक्रवार को नियमगिरी पर्वत में बॉक्साइट के खनन के बारे में निर्णय लेने के लिए 12 ग्राम सभाओं की बैठक की तिथियों की घोषणा कर दी.

18 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने इस पर्वत में खनन के बारे में अंतिम निर्णय स्थानीय ग्राम सभाओं पर छोड़ दिया था और तीन महीनों के अन्दर खुदाई से प्रभावित होने वाले सभी गावों में ग्राम सभा की बैठक बुलाकर इस मुद्दे पर उनकी राय लेने का आदेश दिया था.

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डोंगरिया कंध आदिवासी इस पर्वत को पवित्र मानते हैं. नियमगिरि पर्वत और इसके आसपास 100 से भी अधिक गाँव हैं और केंद्र आदिवासी मंत्रालय और स्थानीय आदिवासी, दोनों ने राज्य सरकार से आग्रह किया था कि इन सभी गावों में ग्राम सभा बुलाई जाए.

लेकिन सभी आपत्तियों के बावजूद केवल 12 गावों में ग्राम सभा की घोषणा से अब यह स्पष्ट हो गया है कि राज्य सरकार ने इस बारे में केंद्रीय आदिवासी मंत्रालय की आपत्तियों को नज़रंदाज़ करने करने का मन बना लिया है.

'वेदांता की तरफदारी'

आदिवासी कल्याण मंत्री लालबिहारी हिम्रिका की घोषणा के अनुसार रायगडा जिले में सात और कालाहांडी जिले में पांच गावों में ही ग्राम सभा की बैठक बुलाई जाएगी. रायगडा जिले के सात गाँव में ग्राम सभा 18 जुलाई से 19 अगस्त के बीच होगी जबकि कालाहांडी जिले के पांच गाँव में ग्राम सभा 23 जुलाई से 30 जुलाई के बीच होगी.

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नियमगिरि में बॉक्साइट खनन का विरोध करने वालों ने राज्य सरकार के इस निर्णय की कड़ी निंदा की है.

2004 में इस पर्वत में खुदाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने वाले जाने माने पर्यावरणविद् बिस्वजीत मोहंती ने सरकार के इस फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए बीबीसी से कहा, "इससे यह स्पष्ट हो गया की ओडिशा सरकार पर्यावरण और आदिवासी अधिकार से जुड़े सभी कानूनों और संविधानिक विधि व्यवस्था को ताक पर रखते हुए वेदांता कंपनी की तरफदारी करने पर तुली हुई है."

हालांकि आदिवासी विकास मंत्री हिम्रिका ने इस आरोप का खंडन किया है. उन्होंने कहा, " वेदांता से सरकार का कोई लेना देना नहीं है. हमने ग्राम सभा के आयोजन के बारे में विधि विभाग और अधिवक्ता जनरल दोनों की राय ली और दोनों ने कहा कि हमारा फैसला सही है."

राज्यपाल से गुहार

2003 में राज्य सरकार के ओडिशा खान निगम यानी ओएमसी और वेदांता कंपनी के बीच हुए समझौते के तहत सरकार ने वेदांता को अगले 30 वर्ष में लगभग 15 करोड़ टन बॉक्साइट खनन की अनुमति दी थी.

लेकिन नियमगिरि को देवता के रूप में पूजने वाले स्थानीय डोंगरिया कंध आदिवासी और ‘सर्वाइवल इंटरनेशनल’ तथा ‘एक्शन ऐड’ जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों के कड़े विरोध और सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मामलों के कारण यहाँ खुदाई शुरू नहीं हो पाई है. इसके परिणाम स्वरुप पहाड़ के ठीक नीचे लान्जिगढ़ में वेदांता द्वारा लगाई गई 10 लाख टन की रिफाइनरी पिछले दिसम्बर से बंद पड़ी है .

ग्राम सभाओं की संख्या 12 में सीमित रखने के राज्य सरकार के निर्णय के बारे में नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए केंद्रीय आदिवासी मंत्रालय ने पिछले महीने ओडिशा सरकार को दो पत्र लिखे. 7 जून को विभागीय सचिव विभा पूरी दास ने राज्य के तत्कालीन मुख्य सचिव बिजय कुमार पटनायक के पास लिखे गए अपने पत्र में कहा की राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की राय का गलत मतलब निकाला है.

इसके कुछ ही दिन बाद विभागीय मंत्री वी किशोर चन्द्रदेओ ने सीधे राज्यपाल एससी जमीर को ख़त लिखा और उनसे इस मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया.

अपने पत्र में देओ ने राज्य सरकार पर वेदांता एल्युमीनियम कंपनी की तरफदारी करने का सीधा आरोप लगाते हुए राज्यपाल से अपील की कि वे अपने संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल कर यह निश्चित करें कि नियमगिरि पहाड़ के इर्दगिर्द उन सभी गाँव में ग्राम सभा हो, जिनके लोग बॉक्साइट के खनन से प्रभावित होंगे.

इसके पहले स्थानीय डोंगरिया कंध आदिवासियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने भी राज्यपाल से मिलकर नियमगिरि के पास स्थित सभी 104 गाँव में ग्राम सभा कराने का आग्रह किया.

'नहीं करने देंगे खुदाई'

नियमगिरि में खुदाई का विरोध कर रहे संगठनों का कहना है राज्य सरकार केवल खानापूर्ति कर रही है और लोगों की राय जानने में उसे कोई दिलचस्पी नहीं है.

उनका आरोप है कि 12 गाँव ऐसे चुने गए हैं कि वहां सरकार अपनी मंशा के अनुरूप परिणाम निकलवा सके. इस बारे में वो इस बात का उल्लेख करते हैं कि कालाहांडी में जिन पांच गावों को चुना गया है, उनमें से एक इज्रुपा नाम के गांव में केवल एक ही परिवार रहता है जबकि अन्य गाँव में 10 या 12 परिवार ही बसते हैं.

नियमगिरि के आसपास रहने वाले सभी आदिवासी इस पर्वत को 'नियम राजा' कहते हैं और उसकी पूजा करते हैं. डोंगरिया कंध आदिवासियों के नेता कुमुटी माझी ने कहा, "सरकार चाहे कुछ भी कर ले. लेकिन हम मरते दम तक नियमगिरी पहाड़ में खुदाई करने नहीं देंगे."

नियमगिरि इलाके से मिल रही खबरों के अनुसार कम से कम चार सरपंचों ने अपने बल बूते पर ग्राम सभा आयोजित करने का निर्णय लिया है. इनमें से तीन पंचायत रायगडा जिले में हैं और एक कालाहांडी में. इन चार पंचायतों के अन्दर लगभग 60 गाँव आते हैं.

रायगडा जिले के मुनिखोल पंचायत के सरपंच मालती काद्राका कहती हैं, "संविधान ने हमें ग्राम सभा की बैठक बुलाने का अधिकार दिया है और इसका इस्तेमाल कर हम बैठक बुलाएंगे और ग्राम सभा के निर्णय सीधे केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को भेजेंगे."

समाजसेवी की मुहिम

स्थानीय प्रशासन ने स्थानीय लोगों से कहा है की वे जंगल अधिकार कानून के तहत अपने अपने दावे 14 जुलाई तक अपने अपने सरपंच के पास पेश करें. लेकिन यह सूचना इस दुर्गम इलाके में रहनेवाले अधिकांश लोगों के पास अभी तक नहीं पहुचं पाई है.

वेदांता विरोधियों का कहना है कि सरकार केवल ओडिया अखबारों में इस बारे में विज्ञापन निकाल कर चुप बैठ गई है, जबकि यहाँ के ज्यादातर आदिवासी न अखबार पढ़ते हैं और न ही ओडिया पढ़ पाते हैं.

सरकार की उदासीनता को देख एक स्थानीय पत्रकार और समाजसेवी मुहम्मद असलम ने विज्ञापन के मज़मून मोबाइल फ़ोन के जरिए लोगों तक उनकी अपनी भाषा यानी कुई में पहुँचाने का बीड़ा उठाया है.

लेकिन इस इलाके में मोबाइल फ़ोन इस्तेमाल करने वालों की संख्या इतनी कम है और मोबाइल नेटवर्क इतना ख़राब है कि यह सूचना 14 जुलाई तक बहुत लोगों तक पहुँच पाएगी, ऐसी उम्मीद नहीं की जा सकती.

18 अप्रैल को सुप्रीमे कोर्ट ने नियमगिरि में बॉक्साइट खनन के बारे में अंतिम निर्णय स्थानीय ग्राम सभाओं पर छोड़ दिया था और तीन महीने के अन्दर यह प्रक्रिया पूरी करने का आदेश दिया था.

कोर्ट ने केंद्रीय आदिवासी मंत्रालय को इस प्रक्रिया की देखरेख की जिम्मेदारी सौपते हुए उसे यह निश्चित करने के लिए कहा था की ग्राम सभा के जरिए उन सभी की राय ली जाये, जिनका नियमगिरि पहाड़ से धार्मिक और भावनात्मक संबंध है.

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