उत्तराखंडः नदी किनारे निर्माण पर पाबंदी के लिए क़ानून

प्रलयंकारी बारिश और भूस्खलन से हुए विनाश की विभीषिका झेल रहे उत्तराखंड में अब नदी किनारे कोई निर्माण नहीं होने दिया जाएगा और इसे अवैध माना जाएगा.

प्रदेश के मुख्य सचिव सुभाष कुमार ने कहा है कि जल्द ही इसके लिये क़ानून बनाया जाएगा. मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा इस बाबत कह चुके हैं कि अगर कोई ऐसा निर्माण पाया गया तो इसके लिये संबंधित अधिकारी को ही दंडित किया जाएगा.

आपदा से सबक लेते हुए सरकार ने इस तरह के क़ानून की मंशा तो जाहिर कर दी है लेकिन अभी ये स्पष्ट नहीं हैं कि नदी किनारे जो मौजूदा निर्माण हैं क्या उनको तोड़ा जाएगा या ये क़ानून सिर्फ भविष्य के लिये होगा.

दरअसल ऐसे क़ानून की ज़रूरत इसलिये समझी जा रही है क्योंकि माना जा रहा है कि उत्तराखंड में बारिश तो कुदरती थी लेकिन इससे हुई तबाही को पहाड़ में खुद ही न्योता दिया गया था क्योंकि नदियों के किनारे और उनके प्रवाह क्षेत्र में बड़े पैमाने पर बसावट और निर्माण करके नदियों का रास्ता ही रोक दिया गया था.

तीर्थयात्रियों का पंजीकरण

इसी क्रम में उत्तराखंड के मानवाधिकार आयोग ने भी राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि अब जो भी तीर्थयात्रीउत्तराखंड आएं उनका पंजीकरण ज़रूर किया जाए क्योंकि उनकी तादाद का अंदाज़ा नहीं हो पाता.

उत्तराखंड मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस बिजेंद्र जैन ने कहा कि, “सरकार ने आपदा में मारे गये उन लोगों की फोटो और डीएनए सैंपल का विवरण भी आयोग को दिया है जिनका अंतिम संस्कार किया जा चुका है.”उनके अनुसार अब तक 131 ऐसे शवों का संस्कार किया जा चुका है.

इस बीच, लापता लोगों की तलाश और उनकी सूची बनाने का काम जोर-शोर से चल रहा है क्योंकि सरकार के पास 15 जुलाई तक का समय है. उसके बाद मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार उन लापता लोगों को मृतक घोषित कर दिया जाएगा जिनका कोई पता नहीं चल पाएगा.

लापता के आंकड़ों पर संशय

लापता लोगों की संख्या को लेकर अभी भी संशय कायम है. विभिन्न स्त्रोतों से अलग-अलग आंकड़े सामने आ रहे हैं लेकिन सरकार का कहना है कि ये संख्या 3068 के करीब ही है.

तर्क ये दिया जा रहा है कि लापता लोगों की गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखाने में दोहराव हो सकता है और मुमकिन है कि एक ही व्यक्ति की रिपोर्ट एक से अधिक जगह लिखाई गई हो.

राहत और बचाव के लिये केंद्र से नियुक्त नोडल अधिकारी वी के दुग्गल कहते हैं, “कई स्तरों पर सूचनाएं जुटाई जा रही हैं, लोगों से आखिरी बार कब बात हुई,आखिरी बार किसने और कहां देखा,फेसबुक और ईमेल की भी मदद ली जा रही है.लापता लोग सिर्फ यात्री और तीर्थयात्री ही नहीं हैं बल्कि स्थानीय लोग,खच्चर और घोडे़वाले और दुकानदार भी इसमें शामिल हैं.”

इस बीच, मौसम विभाग ने रविवार की सुबह तक उत्तराखंड के कई इलाकों में भारी बारिश की आशंका जताई है.

खास तौर पर दक्षिणी इलाके इससे ज्यादा प्रभावित रहने के आसार हैं. इस भविष्वाणी में कुछ राहत की बात ये है कि आपदा से प्रभावित इलाकों में मध्यम बारिश की संभावना है . हालांकि इन इलाकों में बारिश का हल्का ज़ोर ही राहत और बचाव के काम को काफी मुश्किल कर देगा.

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