बोधगया: 'चारों तरफ शीशे बिखरे पड़े थे'

mahabodhi temple bodhgaya
Image caption बोधगया मंदिर परिसर में पहला धमाका बोधि वृक्ष के पास हुआ और दूसरा बटर लैंपहाउस में हुआ.

सुबह पूजा शुरू ही हुई थी, और हमेशा की तरह वहां क़रीब 100 से 200 लोग के आसपास मौजूद थे कि तभी बोधि वृक्ष के बगल से धमाके की आवाज़ आई.

ये तक़रीबन साढ़े पांच बजे भोर का समय था.

'जैसे ही धमाका हुआ भगदड़ मच गई. दूसरा धमाका मंदिर परिसर में मौजूद बटर लैंप हाउस में हुआ. इसके बाद तीसरा धमाका मां तारा के मंदिर में हुआ. यह मंदिर अपेक्षाकृत छोटा है लेकिन इसकी लोगों में काफ़ी मान्यता है. इसके बाद चौथा धमाका एंबुलेंस के पास हुआ.'

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बिहार के बोधगया मंदिर में धमाकों के आधा घंटे बाद महाबोधि मंदिर समिति के सदस्य अरविंद सिंह मंदिर परिसर पहुंचे थे. बीबीसी से बातचीत में उन्होंने मौके का आंखों देखा हाल साझा किया.

अरविंद सिंह के मुताबिक वारदात के वक्त सुबह मंदिर में ज़्यादा लोग नहीं थे. लोग सुबह मॉर्निंग वॉक के लिए और दर्शन के लिए मंदिर परिसर में आते हैं आते हैं.

Image caption धमाकों के कुछ ही देर बाद बिहार पुलिस और सुरक्षाबलों ने मंदिर परिसर की नाकाबंदी कर दी थी.

उन्होंने बताया कि मंदिर में पहले धमाके के बाद आसपास धुआं छा गया, एक तेज़ आवाज भी हुई, जिससे वहां मौजूद लोगों में भगदड़ मच गई.

अरविंद सिंह ने बताया, 'चार धमाकों के बाद पूरे मंदिर में भगदड़ मच गई. इसके पांच मिनट के बाद बिहार पुलिस ने पूरे मंदिर की नाकेबंदी कर दी और उसे अपने सुरक्षा घेरे में ले लिया.'

अरविंद सिंह के मुताबिक तब तक पूरा मंदिर परिसर छावनी में तब्दील हो चुका था. चारों तरफ पुलिस जांच कर रही थी. चारों तरफ शीशे के टुकड़े बिखरे पड़े थे, जिन्हें जांच टीमें इकट्ठा कर रही थीं. इसी के साथ घटनास्थल पर लोगों की आवाजाही रोक दी गई थी.

बिहार के बोधगया में रविवार सुबह एक के बाद एक हुए नौ धमाकों में दो लोग ज़ख़्मी हो गए. भारत सरकार ने इन धमाकों को चरमपंथी हमला क़रार दिया है. राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी की टीम जांच के लिए बोधगया पहुंच गई है.

शाम के वक्त हमेशा की तरह मंदिर में पूजा हुई.

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