उत्तराखंड: भूस्खलन में सात लोगों की मौत

उत्तराखंड भूस्खलन

उत्तराखंड में चमोली ज़िले के पोखरी गाँव में भूस्खलन में सात लोग ज़िंदा दफ़न हो गए हैं.

इस तरह उत्तराखंड में बारिश और भूस्खलन से हुई भीषण तबाही के 25 दिनों बाद भी ये सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. पोखरी गाँव में मारे गए लोगों में दो महिलाएँ, दो पुरुष और तीन लड़कियाँ हैं.

चमोली ज़िले के ही उर्गम गांव में भी 7 मकानों के गिरने की ख़बर है. वहां जनहानि नहीं हुई क्योंकि लोग पहले से ही घरों से बाहर आ गए थे.

गोपेश्वर में आपदा कंट्रोल रूम से प्रभा गौड़ ने बीबीसी को फोन पर बताया कि लोगों में बारिश का इतना डर हो गया है कि वे रात-रात भर जाग कर काट रहे हैं.

उन्होंने बताया कि जैसे ही बारिश शुरू होती है लोग अपने-अपने घरों से इस डर से बाहर आ जाते हैं कि न जाने कब मलबा आ जाए.

अब भी फंसे हैं लोग

इस बीच केदारनाथ में 7 दिनों से फंसे राहत दल के 55 लोगों को वहां से सुरक्षित निकाल लिया गया है.

पुलिस और एनडीआरएफ के जवानों, डॉक्टर और डीएनए विशेषज्ञों की ये टीम पिछले 7 दिनों से केदारनाथ के कैंप में बिजली, पानी और राशन के अभाव में किसी तरह स्थिति संभाल रही थी.

भारी बारिश और खराब मौसम के कारण हेलीकॉप्टर उड़ नहीं पा रहे थे और सड़क मार्ग ध्वस्त होने के कारण इन्हें न तो निकाला जा सकता था और न ही राहत पहुंचाई जा सकती थी.

इनमें से कई लोग बीमार पड़ गए हैं.

उत्तराखंड पुलिस में महानिरीक्षक राम सिंह मीणा केदारनाथ के अभियान की कमान संभाल रहे हैं.

उन्होंने बीबीसी को बताया कि बुधवार को दूसरी टीम वहां भेजने की कोशिश जारी है, हालांकि हेलीकॉप्टर को आधे रास्ते से ही लौटना पड़ा.

मीणा के अनुसार शवों को निकालने का काम भी शुरू नहीं हो पाया है क्योंकि इसके लिए मशीनें चाहिए और मशीनें वहाँ तक जा नहीं पा रही हैं.

उन्होंने बताया कि एमआई-17 हेलीकॉप्टर से एनडीआरएफ की टीम कुछ मशीनों के साथ जाने वाली हैं.

लापता की संख्या कितनी?

लापता लोगों की अंतिम सूची जारी करने के लिए अब सरकार के पास सिर्फ 5 दिनों का समय बचा है.

मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार 15 जुलाई के बाद लापता बताए जा रहे लोगों को मृत मान लिया जाएगा और उनके परिजनों को मुआवज़ा देने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी.

आपदा प्रबंधन विभाग के निदेशक पीयूष रौतेला ने बीबीसी को बताया, “इतने कम समय में लापता लोगों की अंतिम सूची जारी करना असंभव लग रहा है क्योंकि लापता लोगों की सूचनाएं तो काफी हैं लेकिन उनका प्रमाणीकरण अब तक नहीं हो पाया है.”

लेकिन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा अपने राजनीतिक तेवर में कह चुके हैं कि अंतिम सूची लगभग बना ली गई है और 4,045 लोग इस आपदा में लापता हुए हैं.

दूसरी ओर आपदा प्रबंधन विभाग की स्टेटस रिपोर्ट में सिर्फ़ दूसरे राज्यों के लापता लोगों की ही संख्या 4,560 है और उत्तराखंड मूल के लापता लोगों की संख्या 800 बताई गई है.

इन आँकड़ों को जोड़ा जाए, तो लापता लोगों की कुल संख्या 5,360 हो जाती है.

इस विरोधाभास पर आपदा प्रबंधन विभाग के निदेशक का कहना है कि ये सारे आँकड़े अंतरिम हैं और अंतिम तौर पर कुछ कहना अभी जल्दबाज़ी होगी.

विडंबना ये है कि हादसों और मुश्किलों के बीच पुलिस के पास आपदा के नाम पर मुआवज़ा मांगने वाले कुछ फ़र्ज़ी लोगों की रिपोर्ट भी आई हैं जो परिजनों के मरने और लापता होने की झूठी सूचना देकर मुआवजा हड़पने की कोशिश कर रहे हैं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार