उत्तराखंड: अब बद्रीनाथ के ऊपर बन रही है खतरे की झील

जलप्रलय और तबाही के बाद अब बद्रीनाथ के पास अलकनंदा नदी में एक ऐसी झील बन गई है जो खतरे की घंटी साबित हो सकती है.

उपग्रह से मिले चित्र के अनुसार हाल में हुई बारिश और भूस्खलन से बद्रीनाथ से करीब 8 किमी दूर भागीरथी-खरक और सतोपंथ ग्लेशियर के पास माणा इलाके में, अलकनंदा में एक विशाल झील बन गई है.

भूस्खलन से भग्याणू ग्लेशियर से काफी अधिक मलबा बहकर अलकनंदा में आया है, जिससे एक हिस्से में उसका प्रवाह रुक गया है और वहां झील बन गई है.

झील का दायरा लगभग 2553 वर्ग मीटर है.

माणा इस इलाके में भारत-चीन सीमा से पहले आखिरी गांव है और हाल में आई आपदा में भी यहां नुकसान हुआ है.

क्या है ख़तरा?

उत्तराखंड अंतरिक्ष ऐप्लीकेशन केंद्र यानि यूसैक के निदेशक डॉ एमएस किमोठी ने बताया, “चूंकि झील से पानी रिस रहा है और अलकनंदा का प्रवाह पूरी तरह बाधित नहीं हुआ है इसलिये फिलहाल बड़े खतरे की बात नहीं है. लेकिन हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशीलता और नाजुक पारिस्थिति को ध्यान में रखते हुए इस झील पर लगातार निगरानी रखना जरूरी है.”

उन्होंने कहा कि, “आज भी इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन यानि इसरो से मिलनेवाले चित्रों और नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर हैदराबाद के वैज्ञानिकों से इस बारे में विमर्श किया जाएगा कि झील का पानी घट रहा है या बढ़ रहा है.”

यूसैक द्वारा जारी किए गए चित्र में साफ नजर आ रहा है कि मई में अलकनंदा का निर्बाध प्रवाह था और जुलाई में झील बनने के बाद अलकनंदा का प्रवाह अब वहां कुछ ठहरा हुआ है.

अलर्ट प्रशासन

झील बनने और उसके टूटने की आशंका ने अलकनंदा के किनारे रहने वाले हजारों लोगों को दहशत से भर दिया है.

अलकनंदा के किनारे बद्रीनाथ, चमोली, श्रीनगर, रूद्रप्रयाग, देवप्रयाग जैसे बड़े पहाड़ी शहर हैं और उसका पानी ऋषिकेश और हरिद्वार तक जलस्तर बढ़ा सकता है. इसके अलावा अलकनंदा पर कई बिजली परियोजनाएं भी है.

अलकनंदा को हिमालयी क्षेत्र में उग्र स्वभाव की नदी माना जाता है और पहले भी इस तरह की झील बनने और टूटने से इसके किनारों पर व्यापक बाढ़ और तबाही की घटनाएं हो चुकी हैं. इनमें 1894 और 1930 की प्रलंयकारी बाढ़ को लोग आज भी याद करते हैं.

इस बीच प्रशासन ने एहतियात बरतते हुए शुक्रवार की शाम तक लोगों को नदी किनारे के इलाके छोड़कर सुरक्षित जगहों पर जाने के लिये कह दिया है.

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