युद्ध से ज़्यादा आत्महत्या से मरे ब्रितानी सैनिक

सेना को पता चला कि अफगानिस्तान से लौटने के बाद कॉलिंस पीटीएसडी से ग्रसित हैं.
Image caption सेना को पता चला कि अफगानिस्तान से लौटने के बाद कॉलिंस पीटीएसडी से ग्रसित हैं.

साल 2012 में अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के साथ लड़ते हुए जितने ब्रितानी सैनिक मारे गए उतने ही समय में उससे ज़्यादा ब्रितानी सैनिकों ने आत्महत्या की.

बीबीसी के कार्यक्रम 'पैनोरमा' को मिली जानकारी के अनुसार पिछले साल नौकरी कर रहे 21 ब्रितानी सैनिक और 29 सेवानिवृत्त सैनिकों ने आत्महत्या कर ली थी.

उसी अवधि में यानी कि साल 2012 में अफ़ग़ानिस्तान में 44 ब्रितानी सैनिक मारे गए जिसमे से 40 की मौत लड़ते हुए हुई थी.

मारे गए सैनिकों के परिजनों का कहना है कि उन्हें सरकार से उतनी मदद नहीं मिली थी. लेकिन ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय का कहना है कि हर आत्महत्या एक 'दुखद घटना' है.

बीबीसी ने सूचना के अधिकार के तहत रक्षा मंत्रालय से ये जानकारी हासिल की है.

रक्षा मंत्रालय का कहना है कि आम नागरिकों की तुलना में सेना में आत्महत्या और मानसिक आघात के बाद तनाव (पीटीएसडी) की दर कम है.

पिछले साल सात सेवाधीन सैनिकों की आत्महत्या की पुष्टि हुई थी. ऐसा माना जा रहा है कि बाक़ी 14 की मौत भी आत्महत्या करने से हुई थी.

ब्रितानी सरकार अमरीका की तरह सेवानिवृत्त सैनिकों की आत्महत्याओं की कोई जानकारी नहीं रखती है.

पैनोरमा ने स्वतंत्र रूप से यह पता लगाया कि वर्ष 2012 में कम से कम 29 सेवानिवृत्त सैनिकों ने आत्महत्या की.

"धरती पर नर्क"

Image caption कॉलिंस की माँ : मेरा बेटा युद्ध पीड़ित है.

लेफ्टिनेंट सार्जेंट डैन कॉलिंस भी आत्महत्या करने वाले सेवाधीन सैनिकों में से एक हैं. उन्होंने 2009 की गर्मियों में अफ़ग़ानिस्तान के हेलमंद प्रांत में एक अभियान में हिस्सा हिस्सा लिया था.

कॉलिंस की माँ डिएना उन्हें याद करते हुए कहती हैं, "मैंने कॉलिंस में बदलाव देखे थे. एक बार अफ़ग़ानिस्तान से फ़ोन पर उसने मुझसे कहा था, माँ ये जगह नर्क है मैं यहाँ से बाहर निकलना चाहता हूँ"

छह महीने बाद कॉलिंस ब्रिटेन वापस लौट गए थे.

उनकी गर्लफ़्रेंड विकी रोएश बताती हैं, " ज़ाहिर है कि मैंने कुछ चीज़ों पर ध्यान देना शुरू किया था. ख़ास तौर पर उन्हें डरावने सपने आते थे. यह साफ़ था कि वह अफ़ग़ानिस्तान में हुई घटनाओं को अपने सपनों में देखा करते थे.''

काम पर लौटो

सेना को पता चला कि कॉलिंस पीटीएसडी से ग्रसित हैं.

10 महीने के इलाज के बाद सेना ने कॉलिंस से कहा कि अब वह स्वस्थ हैं और उन्हें जल्दी ही काम पर लौटने को तैयार रहना होगा.

अगले तीन महीनों में कॉलिंस ने दो बार आत्महत्या की कोशिश की.

वह डॉक्टर के पास भी नहीं जाते थे और उन्होंने अपनी गर्लफ्रेंड को बताया कि अतीत की बातों का उनके सपनों में आना और भी बढ़ता जा रहा है.

विकी रोएश ने कहा, " मैं उनकी मदद करना चाहती थी लेकिन मुझे पता नहीं था कि क्या करना चाहिए. इस वजह से हमारे रिश्ते भी ख़राब हो रहे थे और मैंने उन्हें चले जाने को कहा."

2011 में नए साल की पूर्वसंध्या पर लेफ्टिनेंट सार्जेंट कॉलिंस ने विकी रोएश का घर छोड़ दिया. अपनी सेना की वर्दी पहनी और पेमब्रोकशायर के प्रेसली पहाड़ों पर चले गए.

फ़ोन पर अपना वीडियो रिकार्ड किया और फाँसी लगा ली. वह 29 साल के थे. इनकी मौत की जाँच होनी अभी बाक़ी है.

एक प्राकृतिक प्रतिक्रिया

मनोवैज्ञानिक डॉक्टर क्लॉडिया हर्बर्ट कहती हैं कि तनाव वाली घटनाओं के कारण पीटीएसडी शरीर की एक प्राकृतिक प्रतिक्रिया है.

इसे सामने आने में सालों लग सकते हैं लेकिन अगर समय रहते पता चल जाए तो इसका इलाज किया जा सकता है. इसके लक्षणों में अतीत की बातें दिखाई देना, अधिक घबराहट और अवसाद शामिल हैं.

रक्षा मंत्रालय का कहना है कि सेवाधीन सैनिकों में से 2.9 प्रतिशत को पीटीएसडी हो जाता है. यह आम नागरिकों की तुलना में कम है.

Image caption स्टेफोर्डशायर के राष्ट्रीय स्मारक उद्यान में कॉलिंस का नाम नहीं लिखा हुआ.

बीबीसी को मिली जानकारी के अनुसार अफ़ग़ानिस्तान में काम कर चुके सैनिकों में पिछले तीन साल में पीटीएसडी से ग्रसित सैनिकों की सँख्या दोगुने से ज़्यादा हो गई है.

"युद्ध पीड़ित"

रक्षा मंत्रालय ने कहा कि वह हर मामले के बारे में बात करने को तैयार नहीं है लेकिन उसने मानसिक स्वास्थ्य चिकित्सा के ज़रूरतमंदों के लिए 74 लाख यूरो की सहायता देने का वायदा किया है.

उसका कहना है कि 2001 से अब तक ब्रिटेन ने अफ़ग़ानिस्तान में एक लाख 34 हज़ार 780 सैनिक तैनात किए हैं.

स्टैफ़र्डशायर के राष्ट्रीय स्मारक उद्यान में दूसरे विश्वयुद्ध से अब तक मारे गए सैनिकों को सम्मानित किया जाता है.

यहाँ की दीवारों पर अफ़ग़ानिस्तान में मारे गए सैनिकों का नाम लिखा हुआ है लेकिन वहाँ से लौटने के बाद आत्महत्या करने वाले सैनिकों का नाम यहाँ नहीं लिखा जाता.

लेफ्टिनेंट सार्जेंट डेन कॉलिंस की माँ कहती हैं, " यह हृदयविदारक है क्योंकि डेनिअल अपना नाम कहीं भी लिखा देखकर बहुत खुश होता."

पीटीएसडी से पीड़ित सैनिक भी युद्ध में मारे गए सैनिक हैं लेकिन उनके साथ युद्ध में मारे गए सैनिकों जैसा व्यवहार नहीं होता.

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