मोदी के सिपहसालार का भाग्य पेन ड्राइव में क़ैद?

  • 17 जुलाई 2013
Image caption अमित शाह गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी माने जाते है और आनेवाले चुनाव के लिए उन्हे बढ़ी ज़िम्मेदारी दी गई है.

क्या गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के क़रीबी और उनकी सरकार में गृह राज्य मंत्री रहे अमित शाह का भाग्य एक पेन ड्राइव में क़ैद है?

इशरत जहां मामले की जांच कर रही सीबीआई को आईपीएस अधिकारी और इस मामले में अभियुक्त जीएल सिंघल ने दो पेन ड्राइव दी हैं.

सिंघल ने सीबीआई से कहा है कि एक पेन ड्राइव में उनके और गुजरात के पूर्व गृह राज्य मंत्री अमित शाह के बीच हुई टेलीफ़ोन बातचीत की रिकॉर्डिंग है.

सिंघल का कहना है कि रिकॉर्ड बातचीत में शाह अवैध गतिविधियों के लिए पुलिस के दुरुपयोग की बात कह रहे हैं.

दूसरे पेन ड्राइव में गुजरात के वरिष्ठ अधिकारियों की एक बैठक की गुप्त रिकॉर्डिंग है. ये बैठक कथित तौर पर इशरत जहां मुठभेड़ मामले की जांच में बाधा पहुंचाने पर चर्चा के लिए बुलाई गई थी.

ये पेन ड़्राइव इशरत जहां कथित फ़र्ज़ी मुठभेड़ मामले में मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके दाहिने हाथ समझे जाने वाले अमित शाह के लिए आने वाले दिनों में बड़ी समस्याएं खड़ी कर सकते हैं.

मुंबई की कॉलेज छात्रा इशरत जहां, उनके मित्र जावेद शेख उर्फ प्राणेश पिल्लई और दो पाकिस्तानी नागरिक अमजद अली राणा और जीशान जौहर 15 जून 2004 को कथित फर्जी मुठभेड़ में मारे गए थे. यह मुठभेड़ गुजरात पुलिस और खुफ़िया ब्यूरो का संयुक्त अभियान था.

सीबीआई का आरोपपत्र

इस मामले में सीबीआई ने अहमदाबाद की अदालत में 4 जुलाई को अपना पहला आरोपपत्र दाख़िल किया था. बीबीसी के पास 2,500 पन्नों के इस आरोपपत्र की एक प्रति है.

आईपीएस अधिकारी जीएल सिंघल ने सीबीआई से कहा है कि इशरत जहां मुठभेड़ मामले की जांच को पटरी से उतारने के लिए गुजरात के वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों की एक बैठक 21 नवंबर, 2011 को हुई थी.

Image caption इशरत जहां की मां और बहन का कहना है कि इशरत एक आम लड़की थी, चरमपंथी नहीं.

सिंघल ने सीबीआई को बताया कि वह उस बैठक में उपस्थित थे, जो महाधिवक्ता कमल त्रिवेदी के निजी कक्ष में हुई थी.

त्रिवेदी ने सीबीआई को एक पेन ड्राइव दिया है जिसमें इस बैठक की एक गुप्त रिकॉर्डिंग है. यही रिकॉर्डिंग सिंघल के पास भी है.

सिंघल ने सीबीआई से कहा है कि त्रिवेदी के अलावा इस बैठक में उस समय मुख्यमंत्री के सचिव गिरीश चंद्र मुर्मू, तत्कालीन आईजी पुलिस (गांधीनगर रेंज) अरुण कुमार शर्मा, तत्कालीन गृह राज्य मंत्री प्रफुल्ल पटेल, तत्कालीन कानून राज्य मंत्री प्रदीप सिंह जडेजा, पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह चुडासमा, वकील रोहित वर्मा और इशरत मामले में आरोपी पुलिस निरीक्षक तरुण बारोट उपस्थित थे.

बातचीत की रिकॉर्डिंग

सिंघल ने सीबीआई को जो दूसरी पेन ड्राइव दी है, उसमें उनकी और अमित शाह की अगस्त 2009 और सितंबर 2009 के बीच हुई टेलीफ़ोन बातचीत की रिकॉर्डिंग है.

सिंघल ने सीबीआई से कहा है कि टेलीफ़ोन बातचीत में शाह अतिरिक्त कानूनी प्रयोजनों के लिए पुलिस के दुरुपयोग की बात कर रहे हैं.

सीबीआई के आरोपपत्र में दो पुलिस अधिकारियों का बयान है कि तत्कालीन अहमदाबाद क्राइम ब्रांच के डीसीपी डीजी वंजारा ने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और तत्कालीन गृह राज्य मंत्री अमित शाह से इशरत जहां और उनके दोस्तों को मारने की अनुमति ले ली है.

एक अन्य बयान में रिटायर्ड डिप्टी एसपी डीएच गोस्वामी ने सीबीआई को बताया कि मुठभेड़ के बाद दर्ज होने वाली एफ़आईआर का मसौदा पहले से ही तैयार कर लिया गया था और इस पर चर्चा भी की गई थी.

गोस्वामी ने सीबीआई से कहा, "वंजारा ने मुठभेड़ से एक दिन पहले ये मसौदा सिंघल को दिखाया जिसमें कुछ लश्कर आतंकवादियों को मारे जाने की बात थी. लेकिन सिंघल इशरत जहां को मारने और मसौदे में बताए गए इन आतंकवादियों के गुजरात मे आने के मकसद पर सहमत नही थे. वंजारा ने सिंघल से कहा की राज्य के मुख्यमंत्री और गृह मंत्री ने इसकी मंजूरी दी है.”

गोस्वामी ने अपनी गवाही में कहा, “13 जून, 2004 की शाम साढ़े सात और आठ बजे के बीच अपने वाहन में जीएल सिंघल के साथ मैं शाहीबाग रोड़ के डफ़नाला में बंगला नंबर 15 पर गया था. आईबी अधिकारी राजिंदर कुमार, अपराध शाखा के तत्कालीन संयुक्त आयुक्त पीपी पांडे और डीजी वंजारा वहाँ मौजूद थे. ये तीन अधिकारी योजना बना रहे थे और मुठभेड़ की एफआईआर के विवरण पर चर्चा कर रहे थे."

वह आगे कहते है, "मुझे याद है कि राजिंदर कुमार वंजारा को बता रहे थे कि इसके बारे में मुख्यमंत्री से बात करनी चाहिए, जिसके जवाब में वंजारा ने कहा कि वह 'सफ़ेद दाढ़ी’ और ‘काली दाढ़ी' से बात करेंगे, जो मोदी और शाह के लोकप्रिय उपनाम है.”

सिंघल और वंजारा के बीच 'मतभेद'

Image caption इशरत जहां और उनके तीन साथियों की 15 जून 2004 को कथित फर्जी मुठभेड़ में हत्या कर दी गई थी

गोस्वामी ने सीबीआई से कहा, "14 जून की दोपहर 3 बजे के आसपास सिंघल ने मुझे उनके साथ डीजी वंजारा के कक्ष में जाने का आदेश दिया. हम दोनों ने वंजारा से मुलाक़ात की. वंजारा ने सिंघल को अपने हाथ से लिखा गया एफ़आईआर का मसौदा दिखाया. मैं भी इसे जिज्ञासा से देख रहा था. इसमें उल्लेख किया गया है कि लश्कर-ए-तैयबा के कुछ चरमपंथी गुजरात के मुख्यमंत्री को मारने की योजना के साथ अहमदाबाद आए हैं."

साल 2009 में उप पुलिस महानिरीक्षक के रूप में रिटायर हुए केएम वाघेला ने सीबीआई से कहा, "चौदह जून, 2004 को मैंने वंजारा से बंगला नंबर 15 में मुलाक़ात की थी. सिंघल और गोस्वामी भी वहाँ थे. सिंघल और वंजारा के बीच इस ऑपरेशन की रूपरेखा पर मतभेद थे, लेकिन वंजारा ने उसे अनसुना कर दिया. सिंघल इस बारे में काफ़ी परेशान थे.''

वघेला ने सीबीआई को बताया, "वंजारा ने कहा है कि 'काली दाढ़ी' और 'सफ़ेद दाढ़ी' से सभी मुद्दों पर हरी झंडी मिल गई है."

सीबीआई ने अदालत को बताया है कि आईबी अधिकारी राजिंदर कुमार, पी मित्तल, एमके सिन्हा और राजीव वानखेड़े के ख़िलाफ़ जांच की जाएगी. इस मामले में अगली सुनवाई 23 जुलाई को होगी.

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