उत्तराखंड: मुआवज़े की प्रक्रिया से गुजरना बेहद तकलीफ़देह

  • 16 जुलाई 2013

उत्तराखंड में एक महीने पहले आई प्रलयंकारी आपदा के बाद 5748 लोग ऐसे हैं जिनका कोई पता नहीं चल पाया है.

बीबीसी से ख़ास बातचीत में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने उत्तराखंड आपदा को हिमालय सुनामी कहा.

मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने कहा कि, “चूंकि इनकी खबर अब तक नहीं हैं इसलिये उन्हें हम स्थाई रूप से लापता मानकर उनके परिजनों को मुआवज़ा तो दे देंगे लेकिन राज्य सरकार की तरफ से उनको खोजने का अभियान जारी रखा जाएगा.”

लापता लोगों के परिजनों द्वारा मुआवजा राशि हासिल करने की प्रक्रिया के बारे में बताते हुए विजय बहुगुणा ने कहा कि इसके लिए परिजनों को हलफ़नामा दायर करना होगा. चूंकि लोगों के शव नहीं मिले हैं इसलिए उन्हें मृत घोषित नहीं किया जा सकता.

पाँच लाख मुआवज़ा

मुख्यमंत्री ने कहा, “उत्तराखंड सरकार प्रति लापता व्यक्ति पाँच लाख का मुआवजा देगी, चाहे वो बच्चा हो या वयस्क. मगर लापता लोगों को मृत साबित करना परिजनों के लिए मुश्किल होगा.”

मुख्यमंत्री का कहना था कि अपने ही परिजनों के लिए इस तरह की प्रक्रिया से गुजरना बेहद तकलीफ़देह होगा. मगर उन्हें आशा है कि यह आंकड़ा घट जाएगा. उन्होंने कहा कि वे इस दुख और विपदा की घड़ी में आपदा पीड़ितों के साथ हैं.

मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा द्वारा जारी किए आंकड़ो के अनुसार उत्तर प्रदेश के सबसे अधिक 2098, मध्य प्रदेश के 1035 लोग इस आपदा के शिकार हुए, जिनका अब तक कोई पता नहीं चल पाया है. लापता लोगों में उत्तराखंड के केवल 924 लोग हैं.

उन्होंने बताया, “ ये आंकड़ें हमें अलग अलग राज्यों की सरकारों की ओर से मिले हैं. हमने इनका विश्लेषण किया है. इसलिए हमने लापता 5740 लोगों के परिजनों को आर्थिक राहत देने का निर्णय लिया है.”

क्या कभी पता चलेगा सही आंकड़ा

तस्वीरें: प्रभावितों के लिए दुआ

उत्तराखंड के भीतरी इलाकों में बसे या मुख्यधारा से कट चुके लोग अपनी ज़रूरतों और जीवन के लिए कड़ा संघर्ष कर रहे हैं.

मुख्यमंत्री नें भीतरी इलाकों में बसे या मुख्यधारा से कट चुके लोगों को सरकार की ओर से मदद मुहैया कराए जाने का आश्वासन दिया है.

केदारनाथ घाटी मुख्य मार्ग से पूरी तरह से कट चुकी है. गांव के गांव तबाह हुए हैं. अब भी 400 से ज्यादा गांव सड़क मार्ग से कटे हुए हैं.

जीवन की जद्दोजहद

मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार इस बात की पूरी कोशिश कर रही है कि उन्हें भोजन और जरूरत की चीजें पहुंचाई जाएं. उन्होंने बताया कि उन तक खाना और जरूरत की चीजें पहुंचाने के लिए हम खच्चरों का इस्तेमाल कर रहे हैं.

हेलिकॉप्टरों से ज़रूरत की चीज़ें भिजवाई जा रही है. मौसम बहुत खराब होने के कारण राहत कार्यों में अभी भी दिक्कतें आ रही है. सरकार और अर्द्धसैनिक बल जी जान से लगे हुए हैं.

मुख्यमंत्री के अनुसार राज्य के आधारभूत ढांचे को ज़बरदस्त नुकसान पहुंचा है. भारत सरकार की ओर से विशेष सहायता की जा रही है.

दीर्घकालीन रणनीति

विजय बहुगुणा ने बताया कि प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड की विशेष सहायता के लिए कैबिनेट की एक उपसमिति का गठन किया है. उन्होंने बताया कि वे भी इसके सदस्य हैं.

उनके अनुसार पर्यावरण और विकास के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए दीर्घकालिक रणनीति बनानी होगी.

मुख्यमंत्री के अनुसार पर्यटन उत्तराखंड अर्थव्यवस्था की रीढ़ है.

इस आपदा के दौरान और बाद में उत्तराखंड में संवेदनशील इलाकों में गैरकानूनी तरीके से निर्माण कार्य पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं. इन आरोपों के बारे में मुख्यमंत्री का कहना है कि भूकंप, बादलों का फटना, सूनामी जैसी आपदाएं प्राकृतिक हैं. इन्हें मानवनिर्मित आपदा नहीं कह सकते हैं.

मगर ऐसी आपदाओं में सरकार इसमें फंसे लोगों को बचाने और राहत पहुंचाने का इंतजाम कर सकती है. उनके जीवन और संपत्ति को नुकसान से बचाने की कोशिश कर सकती है.

भविष्य की चिंता

विजय बहुगुणा कहते हैं कि इसके लिए सही कदम उठाने होंगे. आधारभूत संरचना की नई रणनीति बनानी होगी. पर्यटन फिर से कैसे पटरी पर आए इसकी कोशिश करनी होगी. क्योंकि ये मशहूर और संवेदनशील तीर्थ स्थल भी माने जाते हैं.

हानि तो बहुत बड़ी है. मगर उम्मीद है कि उत्तराखंड फिर से तीर्थयात्रियों का स्वागत करने के लिए जल्द ही खड़ा हो जाएगें.

मुख्यमंत्री ने बताया कि बद्रीनाथ, यमुनोत्री और गंगोत्री के रास्ते तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के लिए 30 सितंबर से खुल जाएंगे. मगर जहां तक केदारनाथ का सवाल है उसमें अभी काफी वक्त लगेगा.

विजय बहुगुणा के अनुसार यहां अभी कई कई फीट गहरे मलबों में शव दबे हैं. हाइड्रोक्लोरिक मशीन से मलबों को हटाने का काम जारी है. प्रशासन इन कार्यों में मुस्तैदी से लगा हुआ है. जब तक यहां की स्थिति सामान्य नहीं हो जाती, इसे लोगों के लिए खोलना फिलहाल संभव नहीं है.

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