'तेज़ाब बिक्री पर पाबंदी ज़रूरी है'

एसिड अटैक, लक्ष्मी
Image caption लक्ष्मी पर जब एसिड अटैक हुआ तो वो नाबालिग थीं.

एसिड अटैक की पीड़िता लक्ष्मी का मानना है कि जिस तरह तीर्थ स्थानों में मांसाहार बंद है उसी तरह एसिड की बिक्री पर भी पाबंदी लगनी चाहिए. इससे किसी की ज़िन्दगी जुड़ी होती है.

जिस तरह दुकान खोलने के लिए रजिस्ट्रेशन की ज़रूरत होती है उसी तरह एसिड बेचने के लिए भी रजिस्ट्रेशन ज़रूरी किया जाना चाहिए.

जो एसिड ख़रीद रहा है उसके पास पहचान पत्र होना चाहिए और उसे यह भी बताना चाहिए कि वह एसिड क्यों ख़रीद रहा है.

एसिड बेचने वाले दुकानदारों के पास भी पहचान पत्र होना चाहिए. एसिड बेचने वाली दुकान में सीसी टीवी कैमरे लगे होने चाहिए.

लक्ष्मी को भरोसा है कि इस तरह के एहतियात से हम एसिड अटैक के बहुत से हादसों को रोक सकते हैं.

घटना

लक्ष्मी बताती हैं कि मेरे संग यह हादसा 22 अप्रैल, 2005 में हुआ था. मैं एक किताब की दुकान में नौकरी करती थी. मुझे नौकरी शुरू करते हुए पन्द्रह दिन भी नहीं हुए थे.

वो लड़का मेरे पीछे पड़ा था. उसने मुझे शादी का प्रस्ताव दिया. मैंने उसका प्रस्ताव ठुकरा दिया था. क्योंकि वो 32 साल का था और मैं केवल 15 साल की थी.

मेरे मना करने के बाद उसने मेरे ऊपर एसिड फेंक दिया.

पुलिस ने की मदद

Image caption तेजाब बेचने और खरीदने के लिए पहचान पत्र मामले पर सुप्रीम कोर्ट आज फैसला देगा.

लक्ष्मी पुलिस की भूमिका से पूरी तरह संतुष्ट हैं. घटना के बारे में याद करते हुए लक्ष्मी कहती हैं, मुझे तुरंत अस्पताल ले जाया गया. मेरा ठीक ढंग से इलाज हुआ. पुलिस ने भी मेरी बहुत मदद की और मुजरिम को चार दिन के अंदर ही हिरासत में ले लिया.

लेकिन एक महीने बाद ही उसको जमानत मिल गई. उसके बाद वो एक साल जेल से बाहर रहा. उसकी शादी भी हो गई. उसके दो बच्चे भी हैं.

मुझे अभी भी बहुत ज्यादा फिजिकल प्राब्लम है. मेरा चेहरा और हाथ खराब हो चुके हैं. अब तक मेरे सात ऑपरेशन हो चुके हैं.. मेरे पैर और पीठ से मांस निकाला गया था. मेरा आखिरी ऑपरेशन 2009 में हुआ था. मेरा स्वास्थ्य सुधर नहीं पाता.

सुप्रीम कोर्ट ने मुझे उम्मीद दिलाई है. मुझे उस पर पूरा भरोसा है.

आज है सुनवाई

नौ जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को फटकार लगाई थी कि वे खुले बाज़ार में तेज़ाब की बिक्री रोकने के लिए कुछ नहीं कर रही हैं जबकि रोज़ ही तेज़ाब से हमलों के मामले सामने आ रहे हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी थी कि अगर सरकार 16 जुलाई (मंगलवार) तक इस सिलसिले में की जा रही कार्रवाई के बारे में कोई स्पष्टीकरण नहीं देती तो कोर्ट ख़ुद ही खुले बाज़ार में तेज़ाब की बिक्री पर प्रतिबंध लगा देगा.

केंद्र सरकार ने एसिड हमलों की पीड़ितों के पुनर्वास का एक मसौदा भी अदालत के सामने रखा. इस मामले की अगली सुनवाई 18 जुलाई को होनी है जिसमें सुप्रीम कोर्ट नियमों और पुनर्वास से मसौदे पर विचार करेगा

पीड़ित की मांग

Image caption बाजार में खुले आम बिकता है तेजाब.

सुप्रीम कोर्ट दिल्ली में 2006 में तेज़ाब के हमले में घायल नाबालिग़ लक्ष्मी की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा है.

इस याचिका में लक्ष्मी ने नया क़ानून बनाने या फिर भारतीय दंड संहिता, साक्ष्य कानून और अपराध प्रक्रिया संहिता में ही उचित संशोधन करके ऐसे हमलों से निपटने का प्रावधान करने और पीड़ितों के लिए मुआवज़े की व्यवस्था करने का अनुरोध किया था.

अदालत ने पिछले साल 29 अप्रैल को गृह मंत्रालय से कहा था कि इस मामले में उचित नीति तैयार करने के इरादे से राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के साथ तालमेल किया जाए.

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