फ़ैसला पहले आता तो हमले कम होते: लक्ष्मी

एसिड अटैक की शिकार लक्ष्मी को लगता है कि दोषियों को सजा भी सख़्त से सख़्त दी जाए

सुप्रीम कोर्ट ने एसिड हमलों की शिकार महिलाओं के लिए दिल्ली की जिस पीड़ित लड़की लक्ष्मी की याचिका पर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, वो इस फैसले से खुश तो हैं लेकिन इसे देरी से आया फ़ैसला मानती हैं.

गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट की तरफ से जारी नए दिशा-निर्देशों को एसिड हमलों की शिकार महिलाओं के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है.

सर्वोच्च अदालत ने राज्यों से तेज़ाब की खुदरा बिक्री को तीन माह के भीतर नियमित करने के लिए कहा है. साथ ही तेज़ाब हमलों की शिकार महिलाओं को तीन लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश भी दिया गया है.

सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला तेज़ाब हमले की शिकार दिल्ली की रहने वाली लक्ष्मी की याचिका पर दिया है.

लक्ष्मी अदालत के इस फैसले से खुश तो हैं लेकिन वो मानती हैं कि अगर सात साल पहले ही ये फैसला आ गया होता तो इतने तेज़ाब हमले नहीं होते.

फ्री इलाज

बीबीसी से खास बातचीत में लक्ष्मी ने कहा, "मुझे सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद बहुत अच्छा लग रहा है. पहले तेज़ाब आसानी से मिल जाता था. अब ऐसा नहीं होगा. मुझे लगता है कि इससे बहुत सी लड़कियाँ सुरक्षित महसूस करेंगी."

वे कहती हैं, "सात साल पहले अगर अदालत ने यह किया होता, तो काफ़ी हद तक हमले कम हो गए होते. कम से कम आज के फैसले से यह संतुष्टि तो है कि ऐसा हो पाया है. हमारी सुप्रीम कोर्ट से ये भी माँग थी कि पीड़ित लड़कियों को सरकारी नौकरी और फ्री इलाज दिया जाए."

लक्ष्मी के अनुसार, "जिन लड़कियों पर पहले से हमले हो चुके हैं, उनके लिए अभी कुछ नहीं हुआ है. इस बारे में फैसला चार महीने बाद आएगा. अदालत ने पीड़ित लड़कियों का फ्री इलाज करवाने की बात भी कही है. मैं बस यही चाहती हूं कि अदालत इसे लागू करवाकर भी दिखाए. मैं चाहती हूं कि किसी और लड़की को अदालत के फैसले का इंतजार नहीं करना चाहिए."

लक्ष्मी चाहती हैं कि सुप्रीम कोर्ट तेज़ाब हमले के दोषियों को सख़्त से सख़्त सजा दे.

'कम है सज़ा'

इस बारे में वे कहती हैं, "अदालत ने 2009 में तेज़ाब हमलों के दोषियों के लिए दस साल की सजा तय की थी. ये दस साल की सजा बहुत कम है. जिस पर हमला होता है, उसका पूरा जीवन खत्म हो जाता है. यह तो दोषियों को दोबारा ऐसी वारदातें अंजाम देने का मौका देने जैसा है. वे जल्दी जेल से निकले तो फिर ऐसा ही करेंगे."

लक्ष्मी कहती हैं, "यदि पहले ही क़ानून ने सख़्त सजा दी होती तो हमलावरों को भी डर लगता."

सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद अब तेज़ाब ख़रीदने के लिए फ़ोटो पहचान पत्र ज़रूरी होगा. साथ ही साथ विक्रेता को ख़रीदार का पता भी रखना होगा.

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