मेडिकल में संयुक्त प्रवेश परीक्षा की अधिसूचना रद्द

Image caption सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने यह फ़ैसला बहुमत से दिया

एमबीबीएस, बीडीएस और अन्य स्नातकोत्तर मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए संयुक्त प्रवेश परीक्षा कराने की भारतीय चिकित्सा परिषद (एमसीआई) की 2010 में जारी की गई अधिसूचना को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया है.

अब मेडिकल कॉलेज पहले की तरह ही स्वतंत्र प्रवेश परीक्षा आयोजित कर दाखिले कर सकते हैं.

सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय बेंच में से दो जजों ने अधिसूचना को रद्द किए जाने के पक्ष में फ़ैसला दिया. अपने फ़ैसले में अदालत ने कहा कि एमसीआई ने अपने अधिकारों से आगे जाकर यह अधिसूचना जारी की थी.

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अल्तमस कबीर और जस्टिस विक्रमजीत सेन ने बहुमत से फ़ैसला देते हुए कहा कि एमसीआई के पास सूमचे भारत में संयुक्त प्रवेश परीक्षा कराने का अधिकार नहीं है.

एक जज सहमत नहीं

हालांकि बेंच के तीसरे सदस्य जस्टिस एआर दवे ने कहा कि वो जस्टिस कबीर और जस्टिस सेन से सहमत नहीं है. उन्होंने कहा, "राष्ट्रीय पात्रता प्रवेश परीक्षा (एनईईटी) कराना व्यावहारिक और न्यायिक रूप से सही है और समाज की जरूरत है. इसलिए मैंने विरोध किया."

एमसीआई की अधिसूचना के खिलाफ 115 याचिकाएं दायर की गई थीं.

13 मई को अंतरिम आदेश सुनाते हुए अदालत ने पहले से कराई जा चुकी प्रवेश परीक्षाओं के नतीजे घोषित करने पर लगी रोक हटा दी थी ताकि प्रवेश प्रक्रिया जारी रह सके.

इससे पहले अदालत ने 13 दिसंबर 2012 को अपने आदेश में कहा था कि एमसीआई, डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया, राज्य पोषित कॉलेज, सरकारी और निजी विश्वविद्यालय अपनी-अपनी प्रवेश परीक्षाएं करा सकते हैं लेकिन को6र्ट के आदेश तक नतीजे घोषित नहीं कर सकते.

अदालत के इस आदेश के बाद अब मेडिकल कोर्सों में दाखिलों के लिए पुरानी प्रक्रिया ही अपनाई जाएगी. पहले कॉलेज अपनी स्वतंत्र प्रवेश परीक्षा आयोजित कर दाखिले करते थे.

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