एएमयू छात्राओं को राहत, पाबंदियां हटीं

  • 27 जुलाई 2013
एएमयू, छात्राएं, नोटिस
एएमयू के अब्दुल्ला हॉल में क़रीब 1300 छात्राएं रहती है. उन पर पहले कभी पाबंदी नहीं रही हैं.

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) ने छात्राओं को सलवार-कमीज़ पहनने और बाहर खाना न खाने संबंधी नोटिस वापस ले लिया है.

एएमयू के वाइस चांसलर रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल ज़मीरउद्दीन शाह ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "हमें रूढ़िवादी घोषित करने की कोशिश हो रही है. जो नोटिस जारी हुआ था, उससे ग़लतफ़हमी हो रही थी. इसलिए हमने उस नोटिस को वापस ले लिया है. "

उन्होंने कहा, "यह एक आधुनिक धर्मनिरपेक्ष यूनिवर्सिटी है जहाँ छात्राओं को पूरी आज़ादी है. वे जींस पहन सकती हैं. सिर्फ उनसे कुर्ता पहनने के लिए कहा गया था ताकि अलीगढ़ की तहज़ीब का भी एहतराम किया जा सके."

'ठेलों पर खाने से होगा पेट खराब'

वाइस चांसलर ज़हीरउद्दीन शाह का कहना है कि यूनिवर्सिटी को रूढ़िवादी दिखाने की कोशिश की जा रही है.

बाहर खाना न खाने की सलाह के बारे में उन्होंने कहा, "बाहर होटल में खाने से किसी को नहीं रोका गया है. हमने सिर्फ ठेलों पर खाना खाने पर पाबंदी लगाई थी क्योंकि इससे उनकी तबियत ख़राब हो सकती है. हॉस्टल में हम छात्राओं को बेहतर खाना देते हैं."

छात्राओं को इंटरनेट के इस्तेमाल से रोक पर उन्होंने कहा, "यह सरासर ग़लत आरोप हैं. हमारी पूरी कोशिश छात्राओं को इंटरनेट उपलब्ध करवाने की है. हम खुद चाहते हैं कि यहाँ की छात्राएँ आधुनिक हों."

ग़ौरतलब है कि शुक्रवार को यूनिवर्सिटी के गर्ल्स हॉस्टल अबदुल्ला हॉल में प्रोवोस्ट की तरफ़ से एक नोटिस लगाया गया था. इसमें छात्राओं से भड़कीले कपड़े न पहनने, सलवार कमीज़ पहनने और बाहर जाते वक़्त ख़ुद को कपड़ों से पूरी तरह ढककर निकलने को कहा गया था.

इस नोटिस में नियमों का पालन न करने पर 500 रुपए जुर्माना लगाने की बात भी कही गई थी.

ग़ौरतलब है कि एएमयू के गर्ल्स हॉस्टल में क़रीब 1300 लड़कियां रहती हैं. इससे पहले लड़कियों पर कपड़े पहनने संबंधी कोई पाबंदी यूनिवर्सिटी में नहीं थी.

इस साल अप्रैल में वाइस चांसलर ने छात्रों को लिखे एक खुले पत्र में कहा था कि छात्र उनसे मिलने के लिए शेरवानी पहनकर आएं. साथ ही यूनिवर्सिटी ने छात्राओं से कहा था कि वो अलीगढ़ यूनिवर्सिटी की तहज़ीब का ध्यान रखते हुए कपड़े पहनें.

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