अलग तेलंगाना राज्य पर कांग्रेस की मुहर

मंगलवार को बेहद महत्वपूर्ण घटनाक्रम में कांग्रेस ने अलग तेलंगाना राज्य बनाने पर सहमति जता दी. इससे पहले यूपीए समन्वय समिति भी अलग तेलंगाना राज्य के प्रस्ताव को स्वीकार कर चुकी थी.

देर शाम कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक के बाद कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह और अजय माकन ने एक प्रेस कांफ्रेंस कर अलग तेलंगाना राज्य बनाने के फैसले का ऐलान किया.

कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक के बाद पार्टी महासचिव दिग्विजय सिंह ने बताया कि हैदराबाद पहले दस साल तक दोनों राज्यों की संयुक्त राजधानी रहेगा. इसके बाद आंध्र के लिए अलग राजधानी बनाई जाएगी.

इससे पहले यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी के निवास पर हुई एक अहम बैठक में तेलंगाना के निर्माण पर सहमति बन चुकी थी.

तेलंगाना राज्य में तेलंगाना क्षेत्र के दस ज़िलों को शामिल किया जाएगा.

'चुनाव से संबंध नहीं'

Image caption अलग तेलंगाना राज्य के लिए आंध्र प्रदेश में बीते कई वर्षों से प्रदर्शन हो रहे है.

दिग्विजय सिंह ने कहा कि इस फ़ैसले को चुनाव से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि इस फ़ैसले को अन्य राज्यों की मांग से जोड़कर भी नहीं देखा जाना चाहिए.

उन्होंने कहा कि तेलंगाना के ऐतिहासिक, भौगोलिक, सामाजिक कारणों को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है. दिग्विजय सिंह ने कहा कि राज्य निर्माण से जुड़ी प्रक्रिया के पूरे होने में चार से पांच महीने लग सकते हैं और शक्तियों और दायित्वों के विभाजन के बारे में इस संबंध में कानून बनाते समय विचार किया जाएगा.

इससे पहले आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी ने यूपीए अध्यक्ष सोनिया गाँधी, प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और यूपीए के अन्य वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की.

रैलियाँ और विरोध

संयुक्त आंध्र प्रदेश समर्थकों ने मंगलवार को रायलसीमा और तटीय आंध्रा इलाक़ों में विरोध प्रदर्शन जारी रखे. प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय मंत्री के एस राव के संसदीय क्षेत्र एलुरु में रैली भी आयोजित की.

कुरनूल में अधिवक्ताओं ने काम बंद रखा और प्रदर्शन किया.

राज्य के बँटवारें के विरोध में छात्रों ने विजयवाड़ा में भी व्यापक प्रदर्शन किया. यहाँ इंदिरा गाँधी नगर पालिका स्टेडियम के नजदीक करीब तीन हज़ार छात्रों ने रास्ता रोका. छात्रों ने तमाम नेताओं से राज्य के बँटवारे के विरोध में त्यागपत्र देने का आह्वान भी किया.

तेलंगाना के अलग राज्य बनने के बाद अन्य छोटे राज्यों की माँग भी तेज़ होगी. कांग्रेस कार्यसमिति के फ़ैसले के मद्देनज़र कांग्रेस के नेता विलास मुट्टेवर ने महाराष्ट्र से अलग करके विदर्भ राज्य बनाने की माँग की है. उन्होंने इस संबंध में यूपीए अध्यक्ष सोनिया गाँधी को एक पत्र भी लिखा है.

आंध्र प्रदेश के कांग्रेसी मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी ने उन रिपोर्टों को ग़लत बताया है जिनमें कहा गया था कि यदि पृथक तेलंगाना बनाया गया तो वे मुख्यमंत्री पद छोड़ देंगे. कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह को हालात से निपटने की जिम्मेदारी दी गई है. इसी क्रम में उन्होंने किरण रेड्डी से मुलाक़ात भी की.

कांग्रेस में फूट

Image caption अलग तेलंगाना राज्य के मामले पर मंगलवार को कई बैठके हुई.

इससे पहले तेलंगाना राज्य बनने का विरोध कर रहे कांग्रेसी सांसदों ने सोनिया गाँधी से मुलाकात की. समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक सोनिया गाँधी ने उनकी चिंताओं का समाधान करने का भरोसा दिया.

सोनिया गाँधी के साथ बैठक के बाद सीमांध्रा से कांग्रेसी सांसद के बपीराजू ने कहा कि सोनिया गाँधी ने हमारे मुद्दों के समाधान का भरोसा दिया है. कांग्रेस पार्टी की इस अहम बैठक में पार्टी महासचिव दिग्विजय सिंह और अहमद पटेल भी शामिल रहे.

तेलंगाना राष्ट्र समिति के नेता के टी रामाराव ने कहा, "हम बहुत खुश हैं, यह पिछले साल से चल रहे तेलंगाना के लोगों के संघर्ष का परिणाम हैं. लेकिन जब तक बिल संसद में नहीं आ जाता और पास नहीं हो जाता हम तब तक अपने प्रयास नहीं थामेंगे."

तेलंगाना को 1956 में आंध्र प्रदेश में मिलाया गया था. तब से कई बार अलग तेलंगाना राज्य के लिए अभियान किया जा चुका है. साल 2000 में अलग तेलंगाना अभियान ने एक बार फिर जोर पकड़ा और तब से हैदराबाद समेत राज्य के कई हिस्सों में लगातार विरोध प्रदर्शन होते रहे हैं.

9 दिसंबर 2009 को अलग तेलंगाना राज्य बनाने के लिए केंद्र सरकार ने रिपोर्ट माँगी थी. तब से कई बार इस मु्द्दे को लेकर कई बैठक हो चुकी हैं.

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