टीआरएस को अब भी कांग्रेस पर भरोसा नहीं

  • 1 अगस्त 2013

आंध्र प्रदेश के बंटवारे और तेलंगाना के गठन पर यूपीए संयोजन समिति और कांग्रेस कार्यकारिणी अपनी मुहर लगा चुकी है.

ऐसे में माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में तेलंगाना का बनना तय है लेकिन तेलंगाना के गठन के नाम पर कांग्रेस से अलग होने वाली पार्टी तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) को अब भी सरकार और कांग्रेस पर पूरा भरोसा नहीं है.

तेलंगाना राष्ट्र समिति के सचिव के टी रामाराव ने बीबीसी हिंदी से बातचीत में कहा, “कांग्रेस वर्किंग कमेटी और यूपीए संयोजन समिति ने जो घोषणा की है, उसका हम स्वागत करते हैं. हमें उम्मीद है कि इसे जल्दी ही संसद में लाया जाएगा. पिछली बार भी 9 दिसंबर, 2009 को सरकार ने घोषणा की थी लेकिन पंद्रह दिन के बाद ही मुकर गई. इसलिए हम चाहते हैं कि राज्य के गठन से संबंधित बिल जल्द से जल्द संसद में पारित किया जाए.”

सरकार पर शक

तेलंगाना बनने के बाद की चुनौतियों के बारे में के टी रामाराव ने ये भी कहा, “अभी तो घोषणा हुई है, इसे बनने दीजिए क्योंकि अभी तो ये एलान किया गया लेकिन मेरे ख्याल से ये भी नहीं बताया गया है कि इस बिल को संसद में कब पेश किया जाएगा. इसलिए हम बिल के पारित होने तक सतर्क रहेंगे और अपने समर्थकों को भी अलर्ट रहने के लिए कहेंगे. इसके बाद हम चुनौतियों की बात करेंगे.”

क्या यूपीए सरकार तेलंगाना के गठन के मुद्दे पर पलट भी सकती है?

इस सवाल के जवाब में तेलंगाना राष्ट्रसमिति के सचिव रामाराव ने कहा, “बिलकुल एक बार ऐसा हो चुका है, लिहाज़ा शक तो होगा ही, जब तक तेलंगाना के गठन का बिल संसद में पास नहीं हो जाता तब तक हम अलर्ट रहेंगे.”

तेलंगाना के गठन के फ़ैसले के बाद आंध्र प्रदेश के तटीय इलाक़े और रायलसीमा में विरोध प्रदर्शन भी देखने को मिल रहा है लेकिन तेलंगाना राष्ट्र समिति का मानना है कि बड़े स्तर पर कहीं कोई विरोध प्रदर्शन नहीं हो रहा है.

Image caption तेलंगाना राष्ट्र समिति को अभी भी कांग्रेस पर पूरा भरोसा नहीं ( फ़ाइल तस्वीर)

पार्टी के सचिव के मुताबिक एकाध जगहों पर प्रदर्शन जरूर देखने को मिले हैं लेकिन ज़्यादातर इलाकों में लोग फ़ैसले से काफी प्रसन्न हैं.

कांग्रेस-टीआरएस का विलय

एक सवाल ये भी उठ रहा है कि एक ही भाषा तेलुगू बोलने वाले लोगों के लिए दो राज्यों का क्या औचित्य है?

इस सवाल के जवाब के जवाब में के टी रामाराव ने बीबीसी हिंदी से कहा, “जब एक ही भाषा हिंदी बोलने वालों के लिए आठ राज्यों का गठन हो सकता है तो फिर तेलुगू के लिए दो राज्यों के बनने से क्या दिक्कत है. एक भाषा बोलने वाले सभी लोग एक जगह या फिर एक ही राज्य में रहेंगे तो विकास होगा, यह कहां लिखा हुआ है?”

एक चर्चा ये भी शुरू हो चुकी है कि तेलंगाना के गठन के बाद तेलंगाना राष्ट्र समिति का कांग्रेस में विलय हो सकता है.

इस संभावना से टीआरएस के सचिव के टी रामाराव इनकार नहीं करते हैं. उन्होंने कहा, “जब तेलंगाना का गठन हो जाएगा, तब हम इस पर बात करेंगे. अभी से इस पर बात करना जल्दबाज़ी होगी.”

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